रूसी खुफिया एजेंसियों से जुड़े साइबर जासूसी अभियान में मैसेजिंग ऐप्स के जरिए सरकारी अधिकारी, सैन्य कर्मी और पत्रकारों को निशाना बनाया गया।

‘मैसेजिंग ऐप्स पर साइबर जासूसी’: रूसी खुफिया एजेंसियों का बड़ा अभियान, हजारों अकाउंट्स में सेंध का दावा

Team The420
5 Min Read

वॉशिंगटन। वैश्विक स्तर पर साइबर जासूसी के बढ़ते खतरे के बीच अमेरिकी एजेंसियों ने एक बड़े अभियान का खुलासा किया है, जिसमें रूसी खुफिया तंत्र से जुड़े हैकर्स द्वारा मैसेजिंग ऐप्स के यूजर्स को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। यह अभियान खास तौर पर उन लोगों पर केंद्रित बताया गया है, जिन्हें ‘हाई वैल्यू टारगेट’ माना जाता है—जैसे सरकारी अधिकारी, सैन्य कर्मी, राजनीतिक हस्तियां और पत्रकार।

अमेरिकी जांच एजेंसी के अनुसार, इस साइबर अभियान के तहत हजारों अकाउंट्स तक अनधिकृत पहुंच बनाई जा चुकी है। एक बार अकाउंट पर नियंत्रण मिलने के बाद हमलावर न केवल निजी संदेश पढ़ सकते हैं, बल्कि संपर्क सूची तक पहुंच हासिल कर उसी पहचान के जरिए आगे और लोगों को भी निशाना बना सकते हैं।

फिशिंग के जरिए अकाउंट्स पर कब्जा

जांच में सामने आया है कि इस अभियान में मुख्य रूप से फिशिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हमलावर भरोसेमंद संपर्क के रूप में संदेश भेजकर यूजर्स को सुरक्षा कोड या वेरिफिकेशन डिटेल साझा करने के लिए प्रेरित करते हैं। जैसे ही यूजर यह जानकारी साझा करता है, अकाउंट पर उसका नियंत्रण खत्म हो जाता है।

FCRF Launches Premier CISO Certification Amid Rising Demand for Cybersecurity Leadership

विशेष रूप से एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स जैसे Signal और WhatsApp को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग आमतौर पर सुरक्षित संचार के लिए किया जाता है, जिससे इन पर हमला और भी संवेदनशील माना जा रहा है।

वैश्विक स्तर पर फैला नेटवर्क

यूरोपीय खुफिया एजेंसियों ने भी इस तरह के हमलों की पुष्टि की है और इसे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अभियान का हिस्सा बताया है। उनके अनुसार, इस अभियान का दायरा केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य देशों के सरकारी और रणनीतिक महत्व के लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमलों का उद्देश्य केवल जासूसी तक सीमित नहीं होता, बल्कि संवेदनशील सूचनाओं के जरिए भविष्य की रणनीतिक बढ़त हासिल करना भी होता है।

हाइब्रिड वॉरफेयर का हिस्सा बनते साइबर हमले

विश्लेषकों के मुताबिक, साइबर हमले अब पारंपरिक युद्ध का पूरक बनते जा रहे हैं। खासकर Russia और Ukraine के बीच जारी संघर्ष के बाद से साइबर गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी आई है।

साइबर हमलों के जरिए न केवल सरकारी सिस्टम्स को निशाना बनाया जा रहा है, बल्कि नागरिक ढांचे, संचार नेटवर्क और यहां तक कि चुनावी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की भी कोशिशें सामने आई हैं। इस तरह की गतिविधियां ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ का अहम हिस्सा मानी जा रही हैं, जिसमें सैन्य, डिजिटल और सूचना युद्ध एक साथ चलते हैं।

संवेदनशील डेटा तक पहुंच का खतरा

एक बार अकाउंट हैक होने के बाद हमलावरों को न केवल निजी बातचीत तक पहुंच मिलती है, बल्कि वे ग्रुप चैट्स, आधिकारिक संचार और अन्य संवेदनशील जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी पैदा हो सकते हैं।

इसके अलावा, हैक किए गए अकाउंट्स का इस्तेमाल आगे फिशिंग या गलत जानकारी फैलाने के लिए भी किया जा सकता है, जिससे बड़े स्तर पर भ्रम और अव्यवस्था पैदा हो सकती है।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के हमलों से बचने के लिए यूजर्स को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। किसी भी अनजान लिंक, कोड या संदिग्ध संदेश पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, नियमित पासवर्ड अपडेट और आधिकारिक स्रोतों से ही ऐप्स का उपयोग जैसी सावधानियां जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि डिजिटल दुनिया में सुरक्षा की चुनौतियां लगातार जटिल होती जा रही हैं, जहां एक छोटी सी लापरवाही भी बड़े स्तर पर नुकसान का कारण बन सकती है।

 

हमसे जुड़ें

Share This Article