डिजिटल म्यूजिक इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना निवासी माइकल स्मिथ ने AI की मदद से नकली गाने और फर्जी श्रोताओं का पूरा नेटवर्क खड़ा कर करोड़ों रुपये की रॉयल्टी हासिल की। अब उसने वायर फ्रॉड की साजिश के आरोप में अदालत में अपना अपराध कबूल कर लिया है। यह अमेरिका में AI-आधारित म्यूजिक स्ट्रीमिंग धोखाधड़ी का पहला आपराधिक मामला माना जा रहा है।
अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक, स्मिथ ने करीब 8.1 मिलियन डॉलर (लगभग ₹67 करोड़) की अवैध कमाई की, जिसे अब जब्त किया जाएगा। उसे अधिकतम पांच साल की सजा हो सकती है और सजा पर अंतिम फैसला जुलाई में सुनाया जाएगा।
कैसे खड़ा किया ‘वर्चुअल फैन बेस’ का जाल
जांच में सामने आया कि स्मिथ ने पारंपरिक तरीके से लोकप्रियता हासिल करने के बजाय तकनीक का सहारा लिया। उसने AI टूल्स के जरिए हजारों गाने तैयार किए और उन्हें अलग-अलग फर्जी कलाकारों के नाम से म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किया।
इन गानों के नाम भी असामान्य और वैज्ञानिक शब्दों जैसे रखे गए, ताकि वे असली कंटेंट जैसे लगें। लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू होता था।
स्मिथ ने क्लाउड सर्विसेज के जरिए 50 से ज्यादा अकाउंट्स बनाए और हर अकाउंट से कई बॉट्स चलाए। ये बॉट्स दिन-रात उन्हीं गानों को सुनते रहते थे। एक समय पर उसके गानों को रोजाना 6.6 लाख से ज्यादा स्ट्रीम्स मिल रही थीं, जिससे हर साल लाखों डॉलर की रॉयल्टी उसके खाते में जाती थी।
चार्ट में नंबर-1, फिर अचानक गायब
2018 में स्मिथ ने अपने सहयोगी के साथ ‘जैज़’ नाम का एक एल्बम रिलीज किया, जो रिलीज होते ही म्यूजिक चार्ट में नंबर-1 पर पहुंच गया। लेकिन यह सफलता ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी।
कुछ ही दिनों में प्लेटफॉर्म्स ने संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ लिया और एल्बम को हटा दिया गया। इसके बाद से म्यूजिक डिस्ट्रीब्यूटर्स और रॉयल्टी एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर दिया।
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AI म्यूजिक टूल्स और बॉट्स का ‘परफेक्ट कॉम्बिनेशन’
जांच में यह भी सामने आया कि स्मिथ ने एक AI म्यूजिक जनरेशन प्लेटफॉर्म की मदद से हर हफ्ते हजारों गाने तैयार किए। इन गानों को अलग-अलग फर्जी प्रोफाइल्स के जरिए अपलोड किया जाता था, जिससे यह पूरा नेटवर्क असली कलाकारों जैसा दिखाई दे।
इसके बाद बॉट नेटवर्क इन गानों को बार-बार स्ट्रीम करता था, जिससे प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिद्म को धोखा देकर रॉयल्टी सिस्टम से पैसा निकाला जाता था।
रॉयल्टी सिस्टम में बड़ी खामी उजागर
यह मामला म्यूजिक इंडस्ट्री के उस कमजोर पहलू को भी उजागर करता है, जहां हर स्ट्रीम पर कलाकारों को भुगतान किया जाता है। इसी मॉडल का फायदा उठाकर स्मिथ जैसे लोग असली कलाकारों के हिस्से की कमाई हड़प लेते हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, आज भी म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर 1% से 10% तक स्ट्रीम्स फर्जी हो सकती हैं, जिससे इंडस्ट्री को हर साल अरबों डॉलर का नुकसान होता है।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आगे की चुनौती
2023 में एक रॉयल्टी कलेक्शन संस्था ने स्मिथ के भुगतान रोक दिए थे, जिसके बाद मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा। 2024 में उसके खिलाफ औपचारिक कार्रवाई शुरू हुई और अब उसने दोष स्वीकार कर लिया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला सिर्फ शुरुआत है। AI तकनीक के तेजी से विस्तार के बीच म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए यह बड़ी चुनौती बनता जा रहा है कि असली और नकली कंटेंट में फर्क कैसे किया जाए।
डिजिटल दौर में ‘फेक स्टारडम’ पर लगाम
इस केस ने साफ कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लोकप्रियता का भ्रम पैदा करना अब आसान हो गया है, लेकिन कानून के शिकंजे से बचना मुश्किल।
म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए यह एक चेतावनी भी है कि तकनीक के साथ-साथ सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना जरूरी है, ताकि असली कलाकारों का हक सुरक्षित रह सके और ‘वर्चुअल स्टारडम’ के नाम पर होने वाले इस तरह के घोटालों पर समय रहते रोक लगाई जा सके।
