समस्तीपुर में फेसबुक दोस्ती, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और वॉट्सएप ग्रुप के जरिए युवक से ₹11.10 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया।

‘फेसबुक दोस्ती बनी जाल’: ट्रेडिंग के नाम पर ₹11 लाख की ठगी, वॉट्सएप ग्रुप से बुना गया पूरा खेल

Team The420
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समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर जिले में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फेसबुक पर हुई एक सामान्य दोस्ती धीरे-धीरे एक बड़े आर्थिक जाल में बदल गई। ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर एक युवक से ₹11.10 लाख की ठगी कर ली गई। शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है और पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।

पीड़ित की पहचान मुसापुर निवासी कुमार अमर के रूप में हुई है। उसने बताया कि उसे फेसबुक पर आरूषी कुमारी नाम की एक युवती की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली थी। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती रही, लेकिन कुछ दिनों बाद युवती ने खुद को ऑनलाइन ट्रेडिंग विशेषज्ञ बताते हुए निवेश का प्रस्ताव दिया। उसने कम समय में भारी मुनाफा कमाने का दावा किया।

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विश्वास जीतने के लिए आरोपी ने पीड़ित से एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करवाया और उसके जरिए ट्रेडिंग शुरू करवाई। शुरुआती दिनों में खाते में मुनाफा दिखाया गया और थोड़ी रकम भी ट्रांसफर की गई, जिससे पीड़ित का भरोसा मजबूत हो गया। यही वह मोड़ था, जहां से साइबर ठगों ने अपने जाल को कसना शुरू किया।

इसके बाद पीड़ित को कई वॉट्सएप ग्रुप्स में जोड़ा गया, जहां अन्य लोगों के जरिए भारी मुनाफे की कहानियां दिखाकर भरोसा और बढ़ाया गया। इस सुनियोजित रणनीति के तहत उसे लगातार अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। आरोपियों ने दो अलग-अलग खातों के माध्यम से ₹9.79 लाख और ₹1.31 लाख की रकम ट्रांसफर करवा ली।

पीड़ित के मुताबिक, उसे बार-बार यह भरोसा दिलाया गया कि उसकी कुल निवेश राशि और मुनाफा मिलाकर करीब ₹68 लाख तक पहुंच चुका है। लेकिन जब उसने पैसे निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने नया बहाना पेश कर दिया। उससे कहा गया कि निकासी से पहले ₹20.64 लाख का कमीशन जमा करना होगा।

यहीं से पीड़ित को शक हुआ। जब उसने पैसे निकालने का दबाव बनाया, तो आरोपियों ने बातचीत कम कर दी और हर बार केवल कमीशन जमा करने की बात दोहराने लगे। धीरे-धीरे कॉल और मैसेज का जवाब देना भी बंद कर दिया गया। इसके बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया और बाद में साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता है। इसमें सोशल मीडिया, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और वॉट्सएप ग्रुप्स का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसाया जाता है। खासतौर पर बेरोजगार और जल्दी पैसा कमाने की चाह रखने वाले युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है।

साइबर अपराध के जानकारों के अनुसार, ऐसे मामलों में ठग पहले छोटे मुनाफे का झांसा देकर भरोसा बनाते हैं और फिर बड़ी रकम निवेश करवाकर अचानक गायब हो जाते हैं। यह “सोशल इंजीनियरिंग” का एक क्लासिक उदाहरण है, जिसमें शिकार को मानसिक रूप से प्रभावित कर फैसले करवाए जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश करना, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करना या वॉट्सएप ग्रुप्स के जरिए ट्रेडिंग करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले प्लेटफॉर्म और व्यक्ति की पूरी जांच करना जरूरी है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और साइबर ठगी के इस नए पैटर्न को लेकर अलर्ट भी जारी किया गया है, ताकि अन्य लोग इस तरह के जाल में फंसने से बच सकें।

 

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