पश्चिम बंगाल में फर्जी कॉल सेंटर और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर ईडी की छापेमारी में ₹2.5 करोड़ की संपत्ति जब्त और 20 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी का पता चला।

‘फर्जी कॉल सेंटर से करोड़ों का खेल’: ईडी की छापेमारी में ₹2.5 करोड़ की संपत्ति जब्त, 20 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी का खुलासा

Team The420
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने व्यापक छापेमारी कर करोड़ों रुपये की संपत्ति जब्त की है। 16 मार्च को कोलकाता, हावड़ा, सिलीगुड़ी और दुर्गापुर में कुल 16 ठिकानों पर की गई इस कार्रवाई में अवैध कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों से ठगी कर जुटाए गए धन के सबूत सामने आए हैं।

जांच के दायरे में M/s Technosolis Informatics Limited, सुराश्री कर, सुभाजित चक्रवर्ती और उनके सहयोगी शामिल हैं। छापेमारी के दौरान ईडी को फिक्स्ड डिपॉजिट, सोने के सिक्के और क्रिप्टोकरेंसी समेत करीब ₹2.5 करोड़ की चल संपत्ति मिली है। इसके अलावा कई अहम दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए हैं, जिनसे पूरे नेटवर्क के संचालन की जानकारी मिलने की उम्मीद है।

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ईडी की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने अवैध गतिविधियों से अर्जित धन से 20 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्तियां खरीदीं। इनमें जमीन, होटल और रिसॉर्ट जैसी संपत्तियां शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर अपराध से प्राप्त आय के जरिए हासिल किया गया। एजेंसी अब इन संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।

छापेमारी के दौरान कई अन्य चौंकाने वाले खुलासे भी हुए हैं। दो बांग्लादेशी पासपोर्ट, चार लग्जरी वाहन—जिनमें एक मर्सिडीज कार भी शामिल है—बरामद किए गए हैं। इसके अलावा सिलीगुड़ी स्थित एक ठिकाने से विभिन्न ब्रांड की 88 शराब की बोतलें भी मिलीं, जिन्हें बाद में राज्य के आबकारी विभाग को सौंप दिया गया। यह कार्रवाई आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के प्रयासों के तहत भी अहम मानी जा रही है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क एक अवैध कॉल सेंटर के जरिए संचालित किया जा रहा था। आरोपी विदेशी नागरिकों, खासकर अमेरिका के लोगों को फोन कर तकनीकी सहायता या अन्य सेवाओं के नाम पर झांसा देते थे और उनसे बड़ी रकम ठगते थे। ठगी से प्राप्त धन को विभिन्न बैंक खातों और कंपनियों के जरिए भारत में ट्रांसफर किया जाता था, जिससे उसकी असल उत्पत्ति को छिपाया जा सके।

मामले की शुरुआत राज्य में दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर हुई थी, जिसमें भारतीय दंड संहिता और भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू की। जांच में यह सामने आया कि Technosolis Informatics Limited और उससे जुड़ी अन्य कंपनियों के नाम पर कई बैंक खाते खोले गए थे, जिनका इस्तेमाल विदेशी मुद्रा प्राप्त करने और उसे वैध दिखाने के लिए किया जाता था।

एजेंसी को संदेह है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा था, जो तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां या संपत्ति जब्ती की कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल इस कार्रवाई को राज्य में साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

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