नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इंडिया एग्जिम बैंक (India Exim Bank) से जुड़े करीब 63 करोड़ रुपये के कथित लोन फ्रॉड मामले में एफआईआर दर्ज की है। यह मामला ब्रिटेन की कंपनी हेंजर बायोटेक (एरिथ) लिमिटेड (Hanjer Biotech (Erith) Ltd), उसके पूर्व निदेशकों, गारंटरों और संबंधित कंपनियों से जुड़ा है। आरोप है कि रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृत 10 मिलियन डॉलर का पूरा कर्ज निर्धारित उद्देश्य पर खर्च करने के बजाय कथित तौर पर दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया।
रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट के लिए लिया गया था 10 मिलियन डॉलर का लोन
एफआईआर के मुताबिक, हेंजर बायोटेक ने ब्रिटेन में रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट के लिए जरूरी मशीनरी की आपूर्ति को लेकर नवी इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड (NIEPL) के साथ समझौता किया था। कंपनी ने इस परियोजना की कुल लागत 15.90 मिलियन डॉलर बताई थी।
प्रस्ताव के अनुसार, इसमें से 5.90 मिलियन डॉलर प्रमोटरों की ओर से लगाए जाने थे, जबकि शेष 10 मिलियन डॉलर का वित्तपोषण इंडिया एग्जिम बैंक से प्रस्तावित था। मुंबई स्थित बैंक की कार्यकारी समिति ने वर्ष 2012 में इस टर्म लोन को मंजूरी दी थी।
हालांकि, जांच एजेंसी के सामने आई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिस मशीनरी की खरीद के लिए लोन लिया गया था, उसकी आपूर्ति ही नहीं की गई।
संबंधित कंपनियों के जरिए रकम डायवर्ट करने का आरोप
CBI की एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि मशीनरी खरीदने के लिए दिए गए एडवांस का इस्तेमाल रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट में करने के बजाय संबंधित पक्षों को लोन देने में किया गया। इसमें ह्यूम सिंथेसिस प्राइवेट लिमिटेड (Hume Synthesis Pvt Ltd) का नाम भी शामिल है।
शिकायत के अनुसार, परियोजना के लिए स्वीकृत 10 मिलियन डॉलर की पूरी रकम कथित तौर पर डायवर्ट कर दी गई। बैंक का आरोप है कि इस वजह से उसे करीब 63 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि लोन की रकम किन कंपनियों और खातों के माध्यम से ट्रांसफर की गई तथा इसमें किन लोगों की भूमिका थी।
ब्रिटेन की कंपनी और पूर्व निदेशकों समेत कई आरोपी
CBI ने इस मामले में ब्रिटेन की कंपनी Hanjer Biotech (Erith) Ltd को आरोपी बनाया है, जो अब भंग हो चुकी है। इसके पूर्व निदेशकों और गारंटरों के अलावा Navi Infrastructure Engineering Pvt Ltd और Hume Synthesis Pvt Ltd को भी एफआईआर में नामजद किया गया है।
मामले में कुछ अज्ञात लोक सेवकों को भी आरोपी बनाया गया है। इंडिया एग्जिम बैंक की ओर से सहायक महाप्रबंधक जी. सेल्वा कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बैंक को लगभग 10 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ, जो संबंधित समय में करीब 63 करोड़ रुपये के बराबर था।
2014 में NPA हुआ था लोन खाता
एफआईआर के अनुसार, कर्जदार कंपनी की ओर से वित्तीय दायित्वों का भुगतान नहीं किए जाने के बाद 29 सितंबर 2014 को लोन खाते को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया गया था। इसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के तहत खाते को फ्रॉड के रूप में वर्गीकृत किया गया।
बैंक की शिकायत में मशीनरी की आपूर्ति नहीं होने और एडवांस की रकम संबंधित पक्षों को ट्रांसफर किए जाने को वित्तीय नुकसान की प्रमुख वजह बताया गया है। फिलहाल CBI कंपनी के पूर्व निदेशकों, गारंटरों, संबंधित संस्थाओं और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। एफआईआर दर्ज होने का अर्थ आरोप साबित होना नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
