रांची। बैंकिंग क्षेत्र में बड़े कर्ज घोटाले का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने नटराज राइस मिल्स प्राइवेट लिमिटेड और आठ अन्य आरोपियों के खिलाफ ₹19.30 करोड़ की कथित ऋण धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई बैंक ऑफ इंडिया के रांची जोनल कार्यालय की शिकायत के आधार पर की गई है। CBI ने 3 नवंबर 2026 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
बैंक की ओर से रिकवरी विभाग के डिप्टी जोनल मैनेजर असीम कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि चावल मिलिंग का कारोबार करने वाली कंपनी ने बैंक से लिए गए कर्ज का इस्तेमाल निर्धारित व्यावसायिक उद्देश्यों के बजाय अन्य कामों में किया, जिससे बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
2013 से 2025 के बीच मंजूर हुआ ₹20.43 करोड़ का कर्ज
बैंक ऑफ इंडिया ने नटराज राइस मिल्स प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2013 से 2025 के बीच कुल ₹20.43 करोड़ की क्रेडिट सुविधाएं मंजूर की थीं। इसमें ₹17 करोड़ की कैश क्रेडिट लिमिट और ₹3.43 करोड़ का वर्किंग कैपिटल टर्म लोन शामिल था।
बैंक की शिकायत के अनुसार, कंपनी ने स्वीकृत शर्तों के मुताबिक कर्ज की रकम का इस्तेमाल नहीं किया। आरोप है कि उधार ली गई राशि को निर्धारित कारोबारी उद्देश्यों से हटाकर अन्य गतिविधियों में लगाया गया।
बैंक ने 24 जून 2025 को कंपनी के ऋण खाते को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया था। उस समय खाते में बकाया राशि ₹19.30 करोड़ थी। इसी कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर बैंक ने CBI से जांच की मांग की।
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पांच पूर्व निदेशकों समेत नौ आरोपी नामजद
CBI ने इस मामले में कुल नौ आरोपियों को नामजद किया है। इनमें नटराज राइस मिल्स प्राइवेट लिमिटेड और कंपनी के पांच पूर्व निदेशक विवेक कुमार बांका, नीलू बांका, नीरज कुमार बांका, संदीप कुमार और रितेश कुमार बिंजराजका शामिल हैं।
इसके अलावा तीन अन्य कंपनियों डिलाइट इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, लक्ष्मी डीलमार्क प्राइवेट लिमिटेड और तिरुपति स्टॉक कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपी बनाया गया है।
बैंक की शिकायत में कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी इनकी भूमिका की भी पड़ताल कर सकती है।
CBI की आर्थिक अपराध शाखा करेगी जांच
इस मामले की जांच CBI की कोलकाता स्थित आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Branch) को सौंपी गई है। एजेंसी बैंक से मंजूर कर्ज की राशि के इस्तेमाल, संबंधित वित्तीय लेनदेन और कथित फंड डायवर्जन की जांच करेगी।
जांच के दौरान कंपनी के पूर्व निदेशकों और अन्य नामजद कंपनियों की भूमिका भी खंगाली जाएगी। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि बैंक से प्राप्त धनराशि कहां और किन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की गई।
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। CBI द्वारा केस दर्ज किए जाने का मतलब आरोपियों का दोषी साबित होना नहीं है। उनकी जिम्मेदारी और कथित धोखाधड़ी में भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
