नई दिल्ली। हेल्थ सप्लीमेंट्स और दवाएं ऑनलाइन बेचने के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों से ठगी करने वाले साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पूर्वी दिल्ली जिला साइबर थाना पुलिस ने खुलासा किया है। गिरोह के सदस्य खासतौर पर पंजाब के लोगों को निशाना बनाते थे। वेबसाइट पर स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों के आकर्षक ऑफर दिखाकर ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान कराया जाता था, लेकिन रकम मिलने के बाद न तो सामान भेजा जाता था और न ही ग्राहकों को कोई संतोषजनक जवाब मिलता था। ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने बैंक खातों का नेटवर्क तैयार किया था। इसके बदले खाताधारकों को 10 प्रतिशत कमीशन देने का लालच दिया जाता था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों हितेन कुमार और उसके चचेरे भाई आयुष आर्या को गिरफ्तार किया है। आयुष बीकॉम अंतिम वर्ष का छात्र है।
83 हजार रुपये के ऑनलाइन भुगतान के बाद भी नहीं मिला सामान
मामले का खुलासा पंजाब के अमृतसर निवासी धर्मवीर सिंह की शिकायत के बाद हुआ। पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि 27 से 30 सितंबर 2026 के बीच उन्होंने ओपन लाइफ वेडिक्षा नाम की वेबसाइट के माध्यम से हेल्थ सप्लीमेंट्स खरीदने के लिए ऑनलाइन 83,257 रुपये का भुगतान किया था। भुगतान के बावजूद उन्हें न तो ऑर्डर किया गया सामान मिला और न ही उनकी रकम वापस की गई।
पीड़ित को जब वेबसाइट के माध्यम से खरीदे गए उत्पादों की डिलीवरी नहीं हुई तो उन्हें ठगी का संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पूर्वी जिला साइबर थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
बैंक खातों की जांच से मिला ठगी के नेटवर्क का सुराग
जांच के दौरान पुलिस ने ऑनलाइन भुगतान के लेनदेन और उनसे जुड़े बैंक खातों की तकनीकी पड़ताल की। रकम किन खातों में पहुंची और वहां से किस माध्यम से निकाली गई, इसका पता लगाने के लिए बैंकिंग ट्रांजेक्शन की कड़ियां जोड़ी गईं। इस दौरान पंजाब नेशनल बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के कुछ खातों का सुराग मिला। जांच में सामने आया कि ये खाते आयुष आर्या और उसकी दोस्त मीनाक्षी वर्मा के नाम पर थे।
पुलिस के मुताबिक, इन बैंक खातों में कुल 2,66,437 रुपये की रकम ट्रांसफर हुई थी। बाद में पूरी रकम एटीएम के माध्यम से निकाल ली गई। जांच में इन खातों के इस्तेमाल और रकम निकालने के तरीके को संदिग्ध पाया गया। इसके बाद पुलिस ने खाताधारकों और उनसे जुड़े लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की।
कमीशन के लालच में उपलब्ध कराते थे बैंक खाते
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए अपने और परिचितों के बैंक खातों का इस्तेमाल कराते थे। इसके बदले उन्हें कुल रकम का 10 प्रतिशत कमीशन देने का लालच दिया जाता था। ऐसे बैंक खातों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम मंगाई जाती थी और फिर एटीएम के जरिए नकदी निकालकर आगे पहुंचा दी जाती थी। इस तरीके से ठगी की रकम को उसके वास्तविक स्रोत और लाभार्थियों से जोड़ना मुश्किल हो जाता था।
पुलिस ने सबसे पहले आयुष आर्या को गिरफ्तार किया। इसके बाद उसकी दोस्त मीनाक्षी वर्मा से भी पूछताछ की गई। जांच में हितेन कुमार और आयुष आर्या की भूमिका सामने आने पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी वेबसाइट तैयार करने और उसका संचालन करने वाले लोग कौन थे तथा ठगी की रकम किन लोगों तक पहुंचाई जाती थी।
पंजाब के लोगों को निशाना बनाने के पीछे की रणनीति की जांच
पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि गिरोह ने पंजाब के लोगों को विशेष रूप से क्यों निशाना बनाया और फर्जी वेबसाइट के जरिए कितने लोगों से ठगी की गई। वेबसाइट पर इस्तेमाल किए गए नाम, भुगतान के विकल्प, बैंक खातों और एटीएम से निकाली गई रकम के आधार पर अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस का ध्यान इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक खातों के इस्तेमाल और फर्जी वेबसाइट के संचालन की पूरी श्रृंखला का पता लगाने पर है। जांच एजेंसियां यह भी पता कर रही हैं कि कहीं इसी तरह की अन्य वेबसाइटों के जरिए भी लोगों को ठगी का शिकार तो नहीं बनाया गया।
