हाईकोर्ट के अधिवक्ता पर ₹21.70 लाख के फर्जी भुगतान का आरोप, 87 बिल जांच के घेरे में

Team The 420
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एफसीआई के मंडल प्रबंधक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज, 48 बिल ऐसे मामलों से जुड़े जिनमें आरोपी अधिकृत वकील नहीं थे; 39 बिलों में निर्धारित शुल्क से अधिक रकम लेने का आरोपआजमगढ़। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) में विधिक शुल्क के भुगतान से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता विजय कुमार दीक्षित के खिलाफ ₹21,70,586 की धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। एफसीआई के मंडल प्रबंधक बजरंग लाल अग्रवाल की तहरीर पर पुलिस ने बुधवार को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। विभागीय जांच में वर्ष 2017 से 2021 के बीच प्रस्तुत किए गए 87 विधिक शुल्क बिलों में अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है।

शिकायत के मुताबिक, भारतीय खाद्य निगम ने विभिन्न न्यायालयों में विभाग से जुड़े मुकदमों की पैरवी के लिए निर्धारित शर्तों और शुल्क दरों के आधार पर अधिवक्ताओं को सूचीबद्ध किया था। विजय कुमार दीक्षित को केवल इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों की पैरवी करने के लिए अधिकृत किया गया था। आरोप है कि इसके बावजूद उन्होंने दूसरे न्यायालय में लंबित मुकदमों के नाम पर भी विधिक शुल्क के बिल प्रस्तुत किए और भुगतान प्राप्त किया।

48 बिलों में अधिकृत न होने के बावजूद भुगतान लेने का आरोप

तहरीर में कहा गया है कि जांच के दौरान 87 बिलों का भुगतान संदिग्ध पाया गया। इनमें से 48 बिल ऐसे मुकदमों से संबंधित थे, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में लंबित थे। इन मामलों में एफसीआई की ओर से पैरवी के लिए अधिवक्ता एमडी राजा खान को नामित किया गया था। शिकायत के अनुसार, विजय कुमार दीक्षित इन मामलों में विभाग की ओर से अधिकृत अधिवक्ता नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने इन मुकदमों के नाम पर विधिक शुल्क का दावा किया और भुगतान हासिल कर लिया।

विभागीय जांच में इन 48 बिलों को कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा बताया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के लिए बिल प्रस्तुत करते समय अधिवक्ता के अधिकृत कार्यक्षेत्र और संबंधित मुकदमों में उनकी वास्तविक भूमिका का पालन नहीं किया गया। इससे निगम की ओर से ऐसे मामलों में भी भुगतान किया गया, जिनकी पैरवी के लिए किसी अन्य अधिवक्ता को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

39 बिलों में निर्धारित शुल्क से अधिक रकम लेने का आरोप

जांच में शेष 39 बिलों में भी अनियमितता सामने आने का दावा किया गया है। आरोप है कि इन बिलों में अधिवक्ता ने निर्धारित और स्वीकृत दरों से अधिक विधिक शुल्क का दावा प्रस्तुत किया। शिकायत के अनुसार, इन दावों के आधार पर अनुमन्य राशि से अधिक भुगतान प्राप्त किया गया। विभाग ने बिलों और उनके आधार पर किए गए भुगतान की जांच के बाद कुल ₹21,70,586 की राशि को कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा बताया है।

एफसीआई में अधिवक्ताओं को मुकदमों की पैरवी के लिए सूचीबद्ध करते समय निर्धारित शर्तें और शुल्क दरें लागू होती हैं। ऐसे में बिलों में दर्ज राशि, संबंधित मुकदमों का विवरण, अधिवक्ता की नियुक्ति और भुगतान के अभिलेख जांच के प्रमुख आधार माने जा रहे हैं। मामले में यह पता लगाया जाना है कि संबंधित बिल किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुए और भुगतान से पहले उनकी जांच किस स्तर पर की गई थी।

विभागीय जांच के बाद पुलिस तक पहुंचा मामला

शिकायत के अनुसार, विधिक शुल्क के बिलों और भुगतान की जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद मंडल प्रबंधक ने पुलिस को तहरीर दी। इसके आधार पर बुधवार को अधिवक्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, संबंधित बिलों और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी।

जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाना है कि 48 बिलों में संबंधित अधिवक्ता की नियुक्ति और पैरवी की स्थिति क्या थी तथा अन्य 39 बिलों में निर्धारित शुल्क से अधिक भुगतान किस आधार पर हुआ। इसके लिए विभागीय रिकॉर्ड और भुगतान संबंधी दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल, अधिवक्ता विजय कुमार दीक्षित के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच जारी है। मुकदमा दर्ज होना आरोपों की पुष्टि नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।

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