Panchkula के एक सरकारी school में तीसरी कक्षा के छात्र द्वारा KG की बच्ची पर कथित हमले के बाद school safety और बच्चे की gaming habits समेत behavioral factors की जांच की जा रही है।

फ्री फायर गेम की लत का खौफनाक असर! तीसरी के छात्र ने केजी की बच्ची को ईंट से कूंचा, 36 घंटे बाद आया होश

Team The 420
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पंचकूला। मोबाइल गेम की लत और बच्चों के व्यवहार पर उसके संभावित प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना हरियाणा के पंचकूला में सामने आई है। यहां एक सरकारी स्कूल में तीसरी कक्षा के आठ वर्षीय छात्र ने केजी में पढ़ने वाली मासूम बच्ची पर बेरहमी से हमला कर दिया। आरोप है कि छात्र ने पहले बच्ची का सिर बेंच पर पटका, फिर लात-घूंसों से पीटा और बाल पकड़कर घसीटा। इसके बाद ईंट से सिर पर कई वार किए, जिससे बच्ची अचेत हो गई। करीब सवा तीन मिनट तक चली इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। गंभीर रूप से घायल बच्ची को चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में भर्ती कराया गया, जहां करीब 36 घंटे बाद उसे होश आया। बताया जा रहा है कि हमला करने वाला छात्र मोबाइल पर फ्री फायर गेम खेलने का आदी था और परिजनों ने करीब डेढ़ महीने पहले उससे मोबाइल छीन लिया था। हालांकि, पुलिस अभी बच्चे के व्यवहार और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच कर रही है।

कक्षा में अकेली बच्ची पर किया हमला

घटना पंचकूला के एक सरकारी स्कूल की है। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहा है कि तीसरी कक्षा का छात्र केजी की बच्ची पर हमला करता है। वह पहले बच्ची का सिर बेंच पर पटकता है। इसके बाद उसे लात-घूंसों से पीटता है और बाल पकड़कर घसीटता है। हमले के दौरान बच्ची खुद को बचाने की कोशिश करती दिखाई देती है, लेकिन छात्र लगातार उस पर वार करता रहता है। इसके बाद वह ईंट उठाकर बच्ची के सिर पर कई बार प्रहार करता है। हमले के कारण बच्ची अचेत होकर जमीन पर गिर जाती है। घटना का करीब तीन मिनट 15 सेकंड का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

ऑटो चालक के पहुंचने पर खुला मामला

स्कूल में हुई इस घटना की जानकारी तत्काल किसी शिक्षक या कर्मचारी को नहीं हो सकी। मामला तब सामने आया, जब ऑटो चालक बच्ची को घर ले जाने के लिए स्कूल पहुंचा। बच्ची वहां नहीं मिली तो उसकी तलाश शुरू की गई। बच्ची के चाचा के मुताबिक, हमलावर छात्र ने ही उन्हें बताया कि बच्ची कहां पर पड़ी है। इसके बाद परिजन और स्कूल से जुड़े लोग मौके पर पहुंचे। बच्ची गंभीर रूप से घायल और अचेत अवस्था में मिली। उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने के कारण उसे चंडीगढ़ स्थित पीजीआई रेफर किया गया। वहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज चला। करीब 36 घंटे बाद बच्ची को होश आया। इस घटना ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया।

डेढ़ महीने पहले परिजनों ने छीना था मोबाइल

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हमला करने वाला आठ वर्षीय छात्र मोबाइल पर फ्री फायर गेम खेलने का आदी था। परिजनों ने करीब डेढ़ महीने पहले उससे मोबाइल छीन लिया था। घटना के बाद मोबाइल गेम खेलने की उसकी आदत और व्यवहार के बीच संभावित संबंध को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, केवल गेम खेलने की आदत को इस हमले का प्रत्यक्ष कारण नहीं माना जा सकता। पुलिस बच्चे के व्यवहार, पारिवारिक माहौल और अन्य परिस्थितियों की पड़ताल कर रही है। यह भी जांच की जा रही है कि छात्र का पहले से किसी के साथ विवाद था या उसके व्यवहार में हिंसक बदलाव के कोई संकेत दिखाई दिए थे।

स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर, दो शिक्षिकाएं निलंबित

घटना के बाद पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने छात्र के माता-पिता और स्कूल प्रबंधन से पूछताछ की है। घटना के समय बच्चों की निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाली दोनों कक्षा अध्यापिकाओं को निलंबित कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने भी मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की है। कमेटी स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा, कक्षाओं में निगरानी की व्यवस्था और घटना के दौरान शिक्षकों की मौजूदगी सहित विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी देर तक बच्ची पर हमला होता रहा और स्कूल प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। सीसीटीवी फुटेज को भी जांच का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है।

हिंसक ऑनलाइन गेम और बच्चों के व्यवहार पर चिंता

इस घटना ने कम उम्र के बच्चों में हिंसक ऑनलाइन गेम के इस्तेमाल और उनके व्यवहार पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, हिंसा और मारपीट पर आधारित गेम का अत्यधिक इस्तेमाल कुछ बच्चों में आक्रामक व्यवहार को बढ़ावा दे सकता है। लगातार गेम खेलने से बच्चों की दिनचर्या, सामाजिक गतिविधियों और आपसी संवाद पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, किसी बच्चे के हिंसक व्यवहार के पीछे केवल ऑनलाइन गेम को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। पारिवारिक वातावरण, मानसिक विकास, आसपास का माहौल और अन्य व्यवहार संबंधी कारणों की भी भूमिका हो सकती है।

अभिभावकों और स्कूलों की जिम्मेदारी पर सवाल

पंचकूला की इस घटना ने अभिभावकों और स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छोटे बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल, गेम खेलने के समय और ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी रखना जरूरी है। वहीं, स्कूलों में कक्षाओं और खाली समय के दौरान बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त स्टाफ और प्रभावी निगरानी व्यवस्था होनी चाहिए। खासकर छोटे बच्चों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है। अब पुलिस की जांच और शिक्षा विभाग की कमेटी की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना के दौरान स्कूल की निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई और हमले के पीछे छात्र के व्यवहार से जुड़े कौन-कौन से कारण सामने आते हैं।

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