देशभर में 544 साइबर शिकायतों से जुड़ा नेटवर्क उजागर, करीब 3,300 फर्जी एसएमएस भेजकर लोगों को बनाया निशाना; 15 मोबाइल-टैबलेट, 59 डेबिट कार्ड, 52 पासबुक और पांच पीओएस मशीनें बरामद

फर्जी ट्रैफिक चालानों से ठगी के ₹10 करोड़ कुवैत भेजे, अंतरराज्यीय गिरोह के पांच सदस्य गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
7 Min Read


Follow us on Google News


Follow The420.in on Google News

नई दिल्ली। देशभर में वाहन चालकों को फर्जी ट्रैफिक चालान के नाम पर एसएमएस भेजकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के सदस्य फर्जी चालान भुगतान लिंक भेजकर लोगों को निशाना बनाते थे और उनके बैंक खातों से रकम निकालकर अलग-अलग बैंक खातों के जरिये विदेश भेजते थे। पुलिस जांच में ठगी की रकम का एक वित्तीय सुराग नेशनल बैंक ऑफ कुवैत में संचालित खाते तक पहुंचा है। इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में इनके नेटवर्क से देशभर में दर्ज 544 साइबर शिकायतें जुड़ी मिली हैं, जबकि संबंधित बैंक खातों में 10 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन सामने आया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजस्थान निवासी मोती सिंह बघेला और विशाल दास वैष्णव, हरदोई निवासी हर्षपाल, दिल्ली निवासी विक्की और पंजाब निवासी बृजेश कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से 15 मोबाइल फोन और टैबलेट, 59 डेबिट कार्ड, 52 बैंक पासबुक और चेकबुक, 14 फर्मों की मुहरें, पांच पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें, आठ क्यूआर स्कैनर, एक सोने की चेन और एक कार बरामद की है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और विदेश में रकम प्राप्त करने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है।

2.21 लाख रुपये की शिकायत से खुला ठगी के नेटवर्क का राज

पुलिस के मुताबिक, पिछले वर्ष 28 नवंबर को दक्षिण-पश्चिम जिले के साइबर थाने में 2.21 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी। पीड़ित ने बताया था कि उसे ट्रैफिक चालान का भुगतान करने के नाम पर मोबाइल पर एक लिंक भेजा गया था। चालान भरने की प्रक्रिया समझकर उसने लिंक खोल दिया, लेकिन इसके बाद उसके बैंक खाते से 2.21 लाख रुपये निकल गए।

शिकायत की जांच शुरू होने पर पुलिस को पता चला कि इसी तरीके से बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बनाया जा रहा था। तकनीकी जांच में सामने आया कि करीब 3,300 फर्जी एसएमएस भेजे गए थे। इन संदेशों में वाहन के लंबित चालान का भुगतान करने के लिए लिंक दिया जाता था। लिंक पर क्लिक करने वाले लोगों को भुगतान प्रक्रिया के नाम पर फंसाया जाता था और उनकी रकम आरोपियों के नियंत्रण वाले बैंक खातों तक पहुंच जाती थी।

जांच के दौरान पुलिस ने एसएमएस भेजने में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और विंगो कैश ऐप का पता लगाया। इसके बाद ऐप के जरिये किए गए लेनदेन और संबंधित बैंक खातों की जांच शुरू की गई।

https://the420.in/fcrf-academy-12-india-focused-professional-certifications/

रिवॉर्ड ऐप के जरिये बैंक खाते तक पहुंची पुलिस

पुलिस ने फर्जी रिवॉर्ड ऐप के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को भुगतान करने वाले बैंक खाते की पड़ताल की। जांच में यह खाता मुंबई की श्री बालाजी एंटरप्राइजेज के नाम पर मिला, जिसे आरोपी मोती सिंह बघेला संचालित कर रहा था। इस खाते के लेनदेन की जांच से गिरोह के बैंकिंग नेटवर्क की कई परतें खुलीं।

पुलिस के अनुसार, इस खाते से महज तीन दिनों के भीतर 41 हजार से अधिक लोगों को छोटे-छोटे भुगतानों के रूप में करीब दो करोड़ रुपये भेजे गए थे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों को किए गए भुगतान और बैंकिंग गतिविधियों ने जांचकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद खाते से जुड़े अन्य बैंक खातों, फर्मों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ी गईं।

जांच के दौरान ठगी की रकम के लेनदेन का एक महत्वपूर्ण सुराग नेशनल बैंक ऑफ कुवैत में संचालित खाते तक भी पहुंचा। इससे पुलिस को आशंका हुई कि गिरोह का नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि ठगी की रकम को विदेश भेजने की व्यवस्था भी की गई थी। हालांकि, कुवैत स्थित खाते में पहुंची रकम और उसमें शामिल लोगों की भूमिका का विस्तृत ब्योरा जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

10 प्रतिशत कमीशन पर खुलवाते थे फर्जी कंपनियों के खाते

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी अलग-अलग फर्मों के नाम पर चालू बैंक खाते खुलवाने के लिए लोगों को कमीशन का लालच देते थे। इन खातों के लिए कंपनी से संबंधित दस्तावेज, डेबिट कार्ड, चेकबुक और बैंक खातों से जुड़े मोबाइल सिम हासिल किए जाते थे। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को जमा करने, आगे स्थानांतरित करने और भुगतान करने के लिए किया जाता था।

इस व्यवस्था में बैंक खातों के वास्तविक धारकों और ठगी करने वाले मुख्य आरोपियों के बीच दूरी बनाए रखी जाती थी। अलग-अलग फर्मों के नाम पर खुले खातों के जरिये रकम का लेनदेन होने से ठगी के पैसे के वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता था। पुलिस बरामद 59 डेबिट कार्ड, 52 पासबुक और चेकबुक तथा 14 फर्मों की मुहरों के आधार पर इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

पांच राज्यों से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी

पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों से मिले सुरागों के आधार पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब तक फैले नेटवर्क की पड़ताल की। इसके बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से मिले मोबाइल फोन और टैबलेट में डिजिटल गतिविधियों से जुड़े साक्ष्य तलाशे जा रहे हैं। पीओएस मशीनों और क्यूआर स्कैनरों के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।

दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर देशभर में दर्ज 544 साइबर शिकायतों की कड़ियां खंगाली जा रही हैं। 10 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन का हिसाब जुटाने के साथ यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितनी रकम विदेश भेजी गई और किन लोगों को इसका लाभ मिला।

जांच एजेंसियों के सामने अब गिरोह के मुख्य संचालकों, फर्जी कंपनियों के दस्तावेज तैयार करने वालों, बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रकम प्राप्त करने वाले नेटवर्क की पहचान करने की चुनौती है। फर्जी चालान के नाम पर की जा रही ठगी ने एक बार फिर दिखाया है कि साइबर अपराधी सरकारी सेवाओं और यातायात नियमों से जुड़े संदेशों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं।

Share This Article