पटना। बिहार की राजधानी पटना में साइबर अपराधियों ने तीन अलग-अलग मामलों में लोगों को निशाना बनाकर कुल ₹10.18 लाख की ठगी की है। ठगों ने कहीं वाहन चालान के नाम पर एपीके (APK) फाइल भेजकर मोबाइल हैक किया तो कहीं वर्क फ्रॉम होम नौकरी का झांसा देकर टेलीग्राम ग्रुप के जरिए बैंक खातों से रकम निकाल ली। एक अन्य मामले में मोबाइल पर संदिग्ध फाइलें डाउनलोड करवाकर फोन को हैक कर लिया गया। तीनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत पर साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
वाहन चालान के नाम पर 73 वर्षीय महिला से ₹5.18 लाख की ठगी
पहला मामला फुलवारी शरीफ का है, जहां 73 वर्षीय महिला को साइबर अपराधियों ने परिचित बनकर निशाना बनाया। ठगों ने उनके मोबाइल पर वाहन चालान के नाम से एक एपीके फाइल भेजी। संदेश में चालान से संबंधित जानकारी होने का झांसा दिया गया था। महिला ने जैसे ही फाइल डाउनलोड की, उनका मोबाइल साइबर अपराधियों के नियंत्रण में चला गया।
इसके बाद ठगों ने उनके बैंक खाते को निशाना बनाया और महज पांच दिनों के भीतर 36 अलग-अलग लेनदेन के जरिए ₹5.18 लाख निकाल लिए। खाते से लगातार रकम निकलने के बाद महिला को धोखाधड़ी का पता चला। इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब मोबाइल में भेजी गई एपीके फाइल, बैंक खातों और रकम निकालने के लिए इस्तेमाल किए गए माध्यमों की जांच कर रही है।
वर्क फ्रॉम होम का झांसा देकर टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा
दूसरी घटना सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के महेंद्रू की है। यहां रहने वाले एक व्यक्ति को मोबाइल पर घर बैठे नौकरी करने का संदेश मिला। वर्क फ्रॉम होम के जरिए अच्छी कमाई का भरोसा दिलाकर उन्हें ठगों ने अपने संपर्क में लिया। इसके बाद उन्हें एक टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ दिया गया।
कुछ समय बाद आरोपियों ने उन्हें एक लिंक भेजा और उस पर क्लिक करने के लिए कहा। पीड़ित ने जैसे ही लिंक खोला, साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खातों को निशाना बना लिया। ठगों ने उनके तीन अलग-अलग बैंक खातों से कुल ₹2.83 लाख की रकम निकाल ली। खाते से अनधिकृत निकासी की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस मामले में इस्तेमाल किए गए टेलीग्राम ग्रुप, लिंक और बैंक खातों की जांच कर रही है।
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तीन फाइलें डाउनलोड कराते ही मोबाइल हैक, ₹2.17 लाख निकाले
तीसरा मामला कंकड़बाग के चांदमारी रोड का है। यहां रहने वाले एक व्यक्ति के मोबाइल पर 19 अक्टूबर को तीन फाइलें भेजी गई थीं। पीड़ित ने तीनों फाइलें डाउनलोड कर लीं। इसके बाद उनका मोबाइल हैक हो गया और साइबर अपराधियों ने बैंक खाते तक पहुंच बनाकर रकम निकालनी शुरू कर दी।
आरोपियों ने अगले दो दिनों के भीतर खाते से ₹2.17 लाख की अवैध निकासी कर ली। पीड़ित को जब खाते से रकम निकलने की जानकारी मिली तो उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस मोबाइल पर भेजी गई फाइलों और उनसे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
एपीके फाइल और अनजान लिंक से रहें सावधान
तीनों घटनाओं में साइबर अपराधियों ने मोबाइल पर भेजी गई फाइलों और लिंक का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया। वाहन चालान, नौकरी और अन्य जरूरी सेवाओं के नाम पर भेजे जाने वाले संदिग्ध लिंक या एपीके फाइल मोबाइल की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। ऐसी फाइल डाउनलोड करने से अपराधियों को मोबाइल और उसमें मौजूद संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच मिलने का जोखिम रहता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वाहन चालान की जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल का इस्तेमाल करना चाहिए। अनजान नंबरों से भेजी गई एपीके फाइल डाउनलोड नहीं करनी चाहिए और नौकरी के नाम पर टेलीग्राम या अन्य सोशल मीडिया ग्रुप में भेजे गए संदिग्ध लिंक से बचना चाहिए। किसी भी अनजान स्रोत से प्राप्त फाइल डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूरी है।
पटना के तीनों मामलों में पुलिस बैंक खातों में हुए लेनदेन, संदिग्ध मोबाइल नंबरों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
