Allahabad High Court ने Ghaziabad की Gulmohar Greens Society के Tower 27 और 28 को पूरी तरह गिराने तथा चार अन्य towers की 9वीं और 10वीं मंजिल हटाने का आदेश दिया है।

गाजियाबाद में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दो 10 मंजिला टावर ढहाने का आदेश

Team The 420
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गाजियाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स हाउसिंग सोसायटी में रक्षा मंत्रालय और वायुसेना की जमीन पर कथित अवैध निर्माण के मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए दो 10 मंजिला टावरों को पूरी तरह ध्वस्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने टावर 27 और 28 को गिराने के साथ ही टावर 16, 17, 18 और 19 की नौवीं तथा दसवीं मंजिल भी हटाने का निर्देश दिया है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) को दो महीने के भीतर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी करनी होगी। इस पर आने वाला खर्च बिल्डर से वसूला जाएगा।

यह फैसला सोसायटी के निवासियों और गुलमोहर ग्रीन्स रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनाया गया। अदालत ने विवादित निर्माण को नियमित करने के लिए जीडीए की ओर से 18 दिसंबर 2024 को जारी तीसरे कंपाउंडिंग आदेश को भी निरस्त कर दिया। साथ ही बिल्डर पर ₹25 लाख का जुर्माना लगाया और प्रमोटर के खिलाफ दो सप्ताह के भीतर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।

80 खाली फ्लैटों वाले दो टावर पूरी तरह होंगे ध्वस्त

अदालत के आदेश के अनुसार, टावर 27 और 28 को पूरी तरह गिराया जाएगा। इन दोनों टावरों में करीब 80 फ्लैट हैं, जो खाली बताए गए हैं। इसके अलावा टावर 16, 17, 18 और 19 की नौवीं तथा दसवीं मंजिल हटाई जाएगी। इन चार टावरों में 32 निर्माणाधीन फ्लैट प्रभावित होंगे। जीडीए को जिला प्रशासन और पुलिस की सहायता से सुरक्षित तरीके से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करनी होगी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि ध्वस्तीकरण पर आने वाली पूरी लागत बिल्डर से भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूली जाएगी। इससे प्राधिकरण पर कार्रवाई का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। बिल्डर को फैसले के एक महीने के भीतर ₹25 लाख की राशि रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के खाते में जमा करनी होगी।

85 परिवारों को मिलेगा मुआवजा, जीडीए भी देगा रकम

फैसले में प्रभावित घर खरीदारों और निवासियों को राहत देने के लिए आर्थिक भुगतान के निर्देश भी दिए गए हैं। बिल्डर को भूतल के 85 फ्लैट मालिकों से साझा क्षेत्रों के नाम पर वसूली गई बिक्री राशि लौटानी होगी। इसके साथ निर्माण लागत और उस पर 10 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।

अदालत ने जीडीए को एक मामले के 11 मूल याचिकाकर्ताओं में से प्रत्येक को ₹50,000 मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह भुगतान दो महीने के भीतर करना होगा। बिल्डर पर लगाया गया ₹25 लाख का जुर्माना भी आरडब्ल्यूए को दिया जाएगा। इस तरह अदालत ने अवैध निर्माण के कारण प्रभावित निवासियों को आर्थिक राहत देने की व्यवस्था की है।

दो सप्ताह में एफआईआर, वरिष्ठ अधिकारी करेंगे जांच

हाईकोर्ट ने प्रमोटर के खिलाफ दो सप्ताह के भीतर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (Additional Commissioner of Police) रैंक से नीचे के अधिकारी को नहीं सौंपी जा सकेगी। अदालत ने जीडीए के अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए और प्रमोटर के साथ मिलीभगत तथा लापरवाही के पहलुओं की जांच के निर्देश दिए।

अदालत ने जीडीए के पूर्व उपाध्यक्ष अतुल वत्स के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश दिया है। साथ ही जांच अधिकारी सुरेंद्र सिंह को तत्काल निलंबित करने का निर्देश दिया गया है। अदालत के मुताबिक, अधिकारियों की कथित लापरवाही से घर खरीदारों को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ी और उन्हें न्याय पाने के लिए भारी खर्च करना पड़ा।

2006 में मिली थी परियोजना को मंजूरी, वायुसेना ने जताई थी आपत्ति

गुलमोहर ग्रीन्स परियोजना को वर्ष 2006 में मंजूरी दी गई थी। योजना के तहत गाजियाबाद के करहेड़ा गांव में 34 टावर और 904 फ्लैट बनाए जाने थे। यह जमीन मोहन नगर के पास स्थित है। बाद में हिंडन एयरफोर्स स्टेशन के अधिकारियों ने परियोजना में केंद्र सरकार की उस जमीन को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई, जिसे वर्ष 1962 में अधिग्रहित किया गया था।

जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठने के बाद जुलाई 2010 में मूल भवन योजना रद्द कर दी गई थी। इसके बावजूद निर्माण जारी रहने के आरोप लगे। बाद में जीडीए ने 2011 और 2015 में कंपाउंडिंग प्रावधानों के तहत संशोधित योजनाओं को मंजूरी दी। इन प्रावधानों के जरिए कुछ निर्माण संबंधी उल्लंघनों को निर्धारित शर्तों के अधीन नियमित किया जा सकता है।

इसके बाद बिल्डर ने चार टावरों में अतिरिक्त मंजिलें बनाईं और टावर 27 तथा 28 का निर्माण किया। जीडीए ने 18 दिसंबर 2024 को तीसरी बार कंपाउंडिंग योजना को मंजूरी दी थी। घर खरीदारों ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

अदालत ने पाया कि बिल्डर ने परियोजना के फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की गणना में वायुसेना की 4,560 वर्ग मीटर जमीन भी शामिल कर ली थी। इस जमीन को हटाने के बाद परियोजना के पास नवीनतम निर्माण को उचित ठहराने के लिए आवश्यक एफएआर नहीं बचता था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपाउंडिंग प्रक्रिया का बार-बार इस्तेमाल कर एक ही उल्लंघन को नियमित नहीं किया जा सकता और न ही इसके जरिए अनिवार्य मंजूरियों से बचा जा सकता है।

यह फैसला वर्ष 2022 में नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावरों के ध्वस्तीकरण की याद दिलाता है। उस मामले में भी निर्माण नियमों के उल्लंघन और प्राधिकरण अधिकारियों की मिलीभगत के आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने टावर गिराने का आदेश बरकरार रखा था। दोनों टावर 28 अगस्त 2022 को ध्वस्त किए गए थे।

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