EPCG योजना के तहत आयातित Stainless Steel Pipes और Tubes के classification की पड़ताल; गुजरात के Navsari प्लांट में 27 अगस्त को हुई कार्रवाई, कंपनी ने ब्याज समेत शुल्क जमा करने की जानकारी दी

₹2.33 करोड़ की Anti-Dumping Duty जमा, फिर भी DRI जांच जारी; Waaree Energies की यूनिट पर तलाशी

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली। Directorate of Revenue Intelligence (DRI) ने Waaree Energies की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Sangam Solar One Pvt Ltd के गुजरात स्थित manufacturing plant पर तलाशी ली है। यह कार्रवाई Export Promotion Capital Goods (EPCG) योजना के तहत आयात किए गए कुछ stainless steel pipes और tubes के classification तथा उन पर Anti-Dumping Duty (ADD) की देनदारी से जुड़ी है। कंपनी ने exchange filing में बताया कि DRI की टीम ने 27 अगस्त को नवसारी जिले के उन्न गांव स्थित प्लांट में तलाशी ली, जो शाम 6:40 बजे तक चली।

कंपनी के अनुसार, DRI की जांच मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि EPCG योजना के तहत आयात किए गए संबंधित stainless steel pipes और tubes का सही classification क्या है और उन पर Anti-Dumping Duty लागू होती है या नहीं। आयातित उत्पादों की tariff classification सीमा शुल्क देनदारी तय करने में अहम भूमिका निभाती है। इसी वजह से DRI इस मामले में आयात दस्तावेजों और संबंधित शुल्क व्यवस्था की जांच कर रही है।

Waaree Energies ने बताया कि उसने संबंधित Anti-Dumping Duty के रूप में ₹2,33,82,930 जमा कर दिए हैं। कंपनी ने इसके साथ लागू interest की राशि भी जमा करने की जानकारी दी है। हालांकि, शुल्क का भुगतान किए जाने के बावजूद DRI की जांच जारी है। एजेंसी यह देख रही है कि संबंधित उत्पादों का आयात किस classification के तहत किया गया था और उन पर लागू शुल्क की गणना तथा भुगतान नियमों के अनुरूप था या नहीं।

EPCG योजना के तहत पात्र कंपनियों को capital goods के आयात पर निर्धारित शर्तों के अधीन customs duty में राहत मिलती है। इसके बदले उन्हें निर्धारित export obligations पूरा करने होते हैं। योजना के तहत आयातित वस्तुओं की प्रकृति, उपयोग और classification महत्वपूर्ण होते हैं। किसी उत्पाद को अलग tariff category में रखने से उस पर लागू duty और अन्य trade-related levies में अंतर आ सकता है।

Sangam Solar One Pvt Ltd, Waaree Energies की wholly owned subsidiary है। इसका संबंधित manufacturing plant गुजरात के नवसारी जिले के उन्न गांव में स्थित है। DRI की तलाशी इसी परिसर में की गई। कंपनी ने अपनी regulatory filing में कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि तलाशी का संबंध कुछ stainless steel pipes और tubes के आयात तथा उन पर Anti-Dumping Duty की applicability से है।

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DRI की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब भारत में renewable energy और solar manufacturing sector का विस्तार जारी है। Waaree समूह solar modules और renewable energy से जुड़े कारोबार में सक्रिय है। ऐसे में imported components, equipment और raw materials पर customs तथा trade duties से जुड़े मामले कंपनियों की लागत और परियोजनाओं की आर्थिक गणना को प्रभावित कर सकते हैं।

इस घटनाक्रम के बीच Waaree Energies ने एक अलग exchange filing में महाराष्ट्र के Solapur में एक बड़े renewable energy project का order मिलने की भी जानकारी दी है। यह order state-owned Solar Energy Corporation of India (SECI) से मिला है। परियोजना के तहत 700 MW solar capacity और 700 MW/2,800 MWh energy storage solution विकसित किया जाना है।

यह order Waaree Energies की wholly owned subsidiary Waaree Forever Energies Pvt Ltd के माध्यम से हासिल किया गया है। हालांकि, SECI से मिला यह project order और DRI की तलाशी दो अलग-अलग घटनाक्रम हैं। DRI की कार्रवाई imported stainless steel pipes और tubes के classification तथा Anti-Dumping Duty की applicability से संबंधित है, जबकि SECI का order solar power generation और battery energy storage infrastructure के विकास से जुड़ा है।

DRI की तलाशी के दौरान एजेंसी ने संबंधित आयात और शुल्क से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य रिकॉर्ड की जांच की। कंपनी की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ₹2.33 करोड़ से अधिक की Anti-Dumping Duty और लागू interest जमा किया जा चुका है। इसके बावजूद DRI यह निर्धारित करने की प्रक्रिया में है कि आयातित सामान की classification और duty liability से जुड़े सभी पहलू नियमों के अनुरूप थे या नहीं।

फिलहाल DRI की जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कार्रवाई किसी अंतिम दोष निर्धारण का संकेत नहीं है, बल्कि आयातित stainless steel products के classification और संबंधित duty liability की जांच का हिस्सा है। आगे की कार्रवाई जांच एजेंसी के निष्कर्षों और लागू सीमा शुल्क प्रावधानों के आधार पर तय होगी।

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