नई दिल्ली: भारत की प्रमुख खनन कंपनी वेदांता लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और अडानी ग्रुप के जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (Jaypee Associates Ltd) के लिए मंजूर किए गए रिजॉल्यूशन प्लान को तत्काल रोकने की याचिका दायर की है। यह कदम देश के हाई‑प्रोफाइल दिवालियापन मामलों में कानूनी लड़ाई को और तेज कर रहा है।
पिछले हफ्ते, नेशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने अडानी के प्रस्ताव को लागू करने से रोकने से इंकार कर दिया था, लेकिन यह स्पष्ट किया कि अंतिम फैसले तक योजना लागू हो सकती है। वेदांता का कहना है कि उनकी खुद की बोली अधिक मूल्यवान थी और इसे नकारा जाना इन्सॉल्वेंसी और बैंकक्रप्सी कोड (IBC) के उद्देश्य के खिलाफ है।
विवाद की जड़: मामला जेपी एसोसिएट्स के दिवालियापन समाधान से जुड़ा है। एनसीएलटी इलाहाबाद बेंच ने 17 मार्च को अडानी एंटरप्राइजेज का ₹14,535 करोड़ का रिजॉल्यूशन प्लान मंजूर किया था। अडानी की बोली को नवंबर में क्रीडिटर्स कमेटी द्वारा लगभग 89% समर्थन मिला था, जिससे वेदांता और दलमिया भरत से आगे निकलकर अडानी शीर्ष बोलीदाता बना।
वेदांता का दावा है कि उनकी योजना का नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) अडानी की बोली से कम से कम ₹1,000 करोड़ अधिक थी। कंपनी का कहना है कि यह निर्णय ऋणदाताओं द्वारा कम मूल्य वाली बोली को समर्थन देना IBC के लक्ष्य—अधिकतम संपत्ति मूल्य प्राप्त करना—के खिलाफ है।
कानूनी लड़ाई तेज: सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में वेदांता ने तुरंत स्टे की मांग की है। कंपनी का कहना है कि यदि योजना आगे बढ़ती है, तो उनकी चुनौती व्यर्थ हो जाएगी। न्यायालय का यह निर्णय केवल जयपे की संपत्तियों के अंतिम समाधान को प्रभावित नहीं करेगा बल्कि IBC के तहत मंजूर रिजॉल्यूशन योजनाओं पर भविष्य में आपत्तियों के लिए भी अहम मिसाल बनेगा।
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शेयर बाजार पर असर: आज के ट्रेडिंग सेशन में वेदांता के शेयर लगभग 2% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। पिछले तीन महीनों में कंपनी के शेयरों में 9.24% की तेजी आई है और वर्तमान में शेयर ₹661.50 प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे हैं।
विश्लेषक की राय: बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इस विवाद से कॉर्पोरेट बाय‑आउट प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और क्रेडिटर्स की प्राथमिकताओं पर सवाल उठते हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट वेदांता के पक्ष में फैसला करता है, तो यह भविष्य में IBC के तहत मंजूर किए गए रिजॉल्यूशन प्लानों पर पुनर्विचार के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा।
IBC प्रक्रिया और प्रतिस्पर्धा: इस मामले ने भारत के दिवालियापन ढांचे में प्रतिस्पर्धात्मक बोली की जटिलताओं को उजागर किया है। अडानी और वेदांता जैसी बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल वित्तीय मूल्यांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव क्रीडिटर्स की मंजूरी और नीतिगत निर्णयों पर भी पड़ता है।
आगे का रास्ता: सुप्रीम कोर्ट अपेक्षित रूप से आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि कोर्ट का निर्णय न केवल जयपे की संपत्तियों के भविष्य को तय करेगा बल्कि IBC के तहत मंजूर किसी भी योजना में कानूनी चुनौतियों के दृष्टिकोण को भी स्पष्ट करेगा।
निष्कर्ष: वेदांता का कदम भारत के कॉर्पोरेट और दिवालियापन ढांचे में उच्च स्तरीय कानूनी विवादों की महत्वपूर्ण झलक देता है। यह मामला दर्शाता है कि बड़ी संपत्तियों और प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रियाओं में ऋणदाताओं और कंपनियों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना संवेदनशील और जटिल है।
