वास्को में फर्जी टेक्नोलॉजी कंपनी और स्टार्टअप निवेश के नाम पर ₹90 लाख की ठगी के आरोप में छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

स्टार्टअप निवेश के नाम पर ₹90 लाख की ठगी, वास्को में छह लोगों पर मामला दर्ज

Team The420
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वास्को में एक बड़े स्टार्टअप निवेश घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें कुल ₹90 लाख की ठगी के आरोप में छह लोगों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। आरोप है कि एक टेक्नोलॉजी कंपनी के नाम पर फर्जी वादे और झूठे बिजनेस मॉडल दिखाकर निवेशकों को लंबे समय तक भ्रमित किया गया और उनके धन का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया।

यह शिकायत संतोष महाले द्वारा दर्ज कराई गई है, जो विष्वास वेयरहाउसिंग एंड ट्रेडिंग प्रा. लि. और शिकरगाह प्रा. लि. के अधिकृत प्रतिनिधि हैं। उनके अनुसार यह पूरा मामला वर्ष 2015 से 2019 के बीच वास्को क्षेत्र में संचालित हुआ, जब निवेश के नाम पर उन्हें एक टेक्नोलॉजी आधारित क्लाउड प्रोडक्ट बिजनेस में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया गया।

पुलिस के अनुसार आरोपियों में केमिया टेक्नोलॉजीज प्रा. लि. की सीईओ अरुणा श्वार्ज, कंपनी की डायरेक्टर रेवथी अशोक, सुनील कोलियोट, चंदू नायर, पी. सेंथामरई कन्नन के प्रतिनिधि एस. प्रभु कन्नन और एसपीए कैपिटल एडवाइजर्स लिमिटेड के प्रतिनिधि संजय जैन शामिल हैं।

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शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने निवेशकों को यह विश्वास दिलाया कि कंपनी एक उन्नत क्लाउड आधारित तकनीकी उत्पादों के क्षेत्र में काम कर रही है और भविष्य में भारी मुनाफा देगी। इसी भरोसे पर दोनों निवेशक कंपनियों ने कुल ₹90 लाख का निवेश किया, जिसमें विष्वास वेयरहाउसिंग एंड ट्रेडिंग प्रा. लि. ने ₹45 लाख और शिकरगाह प्रा. लि. ने ₹45 लाख का निवेश किया।

आरोप है कि निवेश प्राप्त करने के बाद कंपनी ने वादे के अनुसार कोई वास्तविक व्यवसायिक गतिविधि शुरू नहीं की। इसके बजाय धन का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया और वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि वित्तीय विवरणों में जानबूझकर गड़बड़ी की गई ताकि असली स्थिति छिपाई जा सके।

समय बीतने के बाद जब निवेशकों को किसी प्रकार का लाभ या स्पष्ट व्यावसायिक गतिविधि नहीं दिखी, तो उन्होंने मामले की जांच की मांग की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कंपनी द्वारा प्रस्तुत कई दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते थे।

इसके बाद वास्को पुलिस ने शिकायत के आधार पर छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि सभी आरोपियों पर एक साथ मिलकर निवेशकों को धोखा देने और धन के दुरुपयोग का आरोप है।

फिलहाल मामले की जांच पुलिस निरीक्षक निकिल देसाई द्वारा की जा रही है। जांच टीम दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और कंपनी से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि निवेश की गई राशि का उपयोग कहां और किस उद्देश्य से किया गया।

यह मामला स्टार्टअप निवेश के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों की ओर भी इशारा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार आकर्षक बिजनेस मॉडल और हाई रिटर्न के वादों के जरिए निवेशकों को फंसाया जाता है, जबकि वास्तविक संचालन या तो सीमित होता है या पूरी तरह अनुपस्थित रहता है।

स्थानीय व्यापार जगत का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता की कमी और उचित जांच न होने के कारण निवेशक आसानी से धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। विशेषकर स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों के नाम पर निवेश आकर्षित करना अब एक सामान्य तरीका बनता जा रहा है।

फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों की भूमिका की जांच तेज कर दी है और जल्द ही आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि निवेश से पहले कंपनियों की वास्तविक स्थिति और वित्तीय रिकॉर्ड की गहराई से जांच कितनी जरूरी है।

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