वाराणसी। फर्जी फर्म और कागजी लेन-देन के जरिए करोड़ों रुपये की कर चोरी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। ₹4.31 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले में पंजाब से एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। जांच में सामने आया है कि बिना किसी वास्तविक कारोबार के ही फर्जी बिलिंग के जरिए करोड़ों रुपये की सप्लाई दिखाकर टैक्स लाभ हासिल किया गया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान सूरज वर्मा, निवासी गोविंदगढ़, फतेहगढ़ साहिब (पंजाब) के रूप में हुई है। इस मामले में उसका सहयोगी मो. फरहान पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। दोनों पर आरोप है कि इन्होंने मिलकर फर्जी फर्म के जरिए टैक्स सिस्टम को चूना लगाया।
फर्जी फर्म का इस्तेमाल कर रचा गया खेल
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब सहायक आयुक्त, राज्य कर की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में बताया गया कि ‘सिंह इंटरप्राइजेज’ नामक एक फर्म, जिसका GST पंजीकरण सारनाथ क्षेत्र में था, भौतिक सत्यापन के दौरान दिए गए पते पर मौजूद ही नहीं मिली।
FCRF Launches Premier CISO Certification Amid Rising Demand for Cybersecurity Leadership
जांच आगे बढ़ने पर खुलासा हुआ कि इस फर्म का इस्तेमाल केवल कागजी लेन-देन के लिए किया जा रहा था। मई 2025 के दौरान फर्म ने करीब ₹21.49 करोड़ की आउटवर्ड सप्लाई दिखाते हुए विभिन्न राज्यों की फर्मों को बिल जारी किए, जबकि वास्तविकता में कोई माल या सेवा का लेन-देन नहीं हुआ था।
ITC के नाम पर ₹4.31 करोड़ का फायदा
इस फर्जी सप्लाई के आधार पर लुधियाना, दिल्ली और अहमदाबाद की कुल पांच फर्मों को लगभग ₹4.31 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अनुचित लाभ दिलाया गया। इस तरह सरकार के राजस्व को सीधा नुकसान पहुंचाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले भी कूटरचित दस्तावेजों के जरिए फर्जी GST पंजीकरण कराने की कोशिश कर चुके थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह गतिविधि सुनियोजित तरीके से लंबे समय से चल रही थी।
पंजाब से गिरफ्तारी, नेटवर्क की तलाश जारी
मामले में सक्रियता दिखाते हुए पुलिस टीम ने आरोपी सूरज वर्मा को पंजाब से गिरफ्तार कर लिया। उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया है। अब जांच एजेंसियां उसके नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुट गई हैं।
अधिकारियों का मानना है कि इस घोटाले में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं, जो फर्जी फर्म बनाकर इसी तरह के लेन-देन में संलिप्त हैं। ऐसे मामलों में आमतौर पर बिचौलियों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों की भूमिका भी अहम होती है।
दूसरे मामले में करोड़ों की ठगी का आरोपी भी गिरफ्तार
इसी दौरान एक अन्य कार्रवाई में निवेश के नाम पर ठगी करने वाले आरोपी संतोष किशन सपकाले को भी गुजरात के सूरत से गिरफ्तार किया गया है। Aastha International Limited का यह निदेशक लोगों को पांच साल में रकम दोगुनी करने का लालच देकर ₹3.61 करोड़ की ठगी करने के आरोप में वांछित था।
बताया गया कि उसने वाराणसी में कार्यालय खोलकर लोगों को निवेश के नाम पर झांसे में लिया और बड़ी रकम इकट्ठा की। आरोपी पर ₹25 हजार का इनाम घोषित था और उसे अब वाराणसी लाया जा रहा है।
कर चोरी पर सख्ती का संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, फर्जी ITC और कागजी लेन-देन के जरिए टैक्स चोरी के मामले हाल के वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। ऐसे घोटाले न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि ईमानदार कारोबारियों के लिए भी असमान प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं।
इस कार्रवाई को कर चोरी के खिलाफ सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह के मामलों में सख्ती जारी रहेगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि डिजिटल टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ने के बावजूद फर्जीवाड़े के नए तरीके सामने आ रहे हैं, जिनसे निपटने के लिए लगातार निगरानी और सख्त प्रवर्तन जरूरी है।
