हैदराबाद। देश की एक प्रमुख फार्मा कंपनी में शेयरधारकों की पहचान से जुड़ा बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसमें एक संगठित गिरोह द्वारा फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान के आधार पर ₹3 करोड़ से अधिक के अनपेड डिविडेंड को हड़पने का आरोप लगाया गया है। इस मामले ने निवेशक सुरक्षा और पुराने भौतिक शेयर रिकॉर्ड की कमजोरियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
मामला SMS Pharmaceuticals Limited से जुड़ा है, जिसका मुख्यालय हैदराबाद के बंजारा हिल्स क्षेत्र में स्थित है। कंपनी के प्रतिनिधि की शिकायत के आधार पर सेंट्रल क्राइम स्टेशन (CCS) पुलिस ने केस दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।
कंपनी सचिव थिरुमलेश तुम्मा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में बताया गया कि यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक वास्तविक शेयरधारक ने कंपनी से लंबित डिविडेंड को लेकर अलग दावा प्रस्तुत किया। जांच के दौरान सामने आया कि उसी डिविडेंड पर पहले ही किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दावा किया जा चुका था, जिससे संदेह गहरा गया।
शिकायत के अनुसार, आरोपी गिरोह ने विशेष रूप से उन निवेशकों को निशाना बनाया जिनके पास वर्ष 1994 में जारी किए गए भौतिक (फिजिकल) शेयर सर्टिफिकेट थे और जिन्होंने 2007 में कंपनी के बीएसई और एनएसई में लिस्ट होने के बाद अपने शेयरों को डीमैट रूप में परिवर्तित नहीं कराया था। इसी तकनीकी कमजोरी का फायदा उठाकर आरोपियों ने फर्जीवाड़ा किया।
आरोप है कि गिरोह के सदस्यों ने खुद को वास्तविक शेयरधारक बताकर कंपनी में आवेदन किया और डिविडेंड प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके लिए उन्होंने फर्जी पहचान दस्तावेज, बदले हुए फोटो और हस्ताक्षर वाले पैन कार्ड जैसे कागजात का इस्तेमाल किया, जिससे कंपनी रिकॉर्ड में वे वैध दावेदार के रूप में दर्ज हो सकें।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध अनक्लेम्ड डिविडेंड जानकारी का दुरुपयोग किया, जो कानूनी नियमों के तहत सार्वजनिक की जाती है। इसी डेटा के आधार पर उन्होंने उन खातों और शेयरधारकों को चुना जिनके डिविडेंड लंबे समय से अनक्लेम्ड थे।
शिकायत में यह भी बताया गया कि गिरोह ने पहले कंपनी से संपर्क कर पते अपडेट कराने के नाम पर पत्राचार किया और फिर डुप्लीकेट शेयर सर्टिफिकेट जारी कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इसके बाद इन डुप्लीकेट शेयरों को अपने सहयोगियों के नाम ट्रांसफर कराकर बाद में डीमैट कर दिया गया और बाजार में बेच दिया गया।
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इस पूरे मामले में कुल सात अलग-अलग घटनाओं का उल्लेख किया गया है, जिनमें लगभग 85,000 शेयर शामिल हैं। इन शेयरों का बाजार मूल्य 28 अप्रैल 2026 तक NSE दरों के अनुसार ₹3.31 करोड़ से अधिक बताया गया है।
कंपनी ने बताया कि कुछ मामलों में जब वास्तविक शेयरधारकों ने भी दावा प्रस्तुत किया, तब कंपनी ने सतर्कता दिखाते हुए कुछ ट्रांसफर रोक दिए, जिससे बड़ा नुकसान होने से बचाव हो सका।
शिकायत के आधार पर CCS पुलिस ने K Varu Dinesh सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 420, 419, 467, 468, 471 और 120B के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश शामिल हैं।
फिलहाल पुलिस प्रारंभिक जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। साथ ही, फंड ट्रेल, बैंकिंग लेनदेन और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच भी की जा रही है।
कंपनी की ओर से कहा गया है कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए शेयरधारक रिकॉर्ड और डिविडेंड क्लेम प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा। वहीं, निवेशक विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने भौतिक शेयरों को जल्द से जल्द डीमैट करना इस तरह की धोखाधड़ी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
मामला अभी जांच के शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इसमें और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि जांच एजेंसियां पूरे ट्रांजैक्शन नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
