नई दिल्ली: पिछले दिनों सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेजी से फैली कि 1 अप्रैल से बैंकिंग सिस्टम में बड़े बदलाव होने वाले हैं। हालांकि, यह पूरी तरह सच नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2025 के दौरान कई नए नियम चरणबद्ध तरीके से लागू किए हैं। ये बदलाव नवंबर 2025 से शुरू होकर जुलाई 2026 तक धीरे-धीरे सभी पर लागू होंगे।
इन बदलावों का सीधा असर लोन लेने वालों पर दिखाई देगा। अब लोन जल्दी चुकाने में कम खर्च लगेगा, क्रेडिट स्कोर तेजी से अपडेट होंगे और बैंकिंग में पहले से ज्यादा लचीलापन मिलेगा।
लोन जल्दी चुकाने पर अब कोई पेनाल्टी नहीं
रिटेल ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन और एजुकेशन लोन पर प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर शुल्क अब खत्म हो गया है। यह नियम 1 जनवरी 2026 से उन लोन पर लागू होगा जो इसके बाद मंजूर किए जाएंगे या रिन्यू होंगे।
इसका मतलब है कि जब आपकी आमदनी बढ़े या कैश फ्लो बेहतर हो, तो आप आसानी से लोन जल्दी चुका सकेंगे। दूसरे बैंक में कम ब्याज दर पर बैलेंस ट्रांसफर करना भी आसान होगा। इससे लोन की योजना पहले से ज्यादा लचीली और व्यवहारिक होगी।
क्रेडिट स्कोर अब हर हफ्ते अपडेट होंगे
RBI के नए सिस्टम के अनुसार लेंडर्स अब हर हफ्ते क्रेडिट डेटा रिपोर्ट करेंगे। यह बदलाव 1 जुलाई 2026 से पूरी तरह लागू होगा।
इसका फायदा यह है कि आपकी किस्त चुकाने का असर क्रेडिट स्कोर पर जल्दी दिखाई देगा। वहीं, अगर कोई भुगतान में देरी करता है या डिफॉल्ट होता है, तो वह भी तुरंत दर्ज होगा। इससे अच्छे व्यवहार वाले लोग जल्दी फायदा उठा सकेंगे, लेकिन छोटी गलतियों का असर भी तत्काल दिखेगा।
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अब बैंक अकाउंट और लॉकर में चार नॉमिनी रख सकेंगे
RBI ने बैंक अकाउंट और लॉकर के लिए नॉमिनी की संख्या बढ़ाकर चार कर दी है। यह बदलाव 1 नवंबर 2025 से लागू है।
अब आप डिपॉजिट अकाउंट में चार नॉमिनी जोड़ सकते हैं और लॉकर में क्रमिक नॉमिनी रखने की सुविधा भी है। इससे किसी आकस्मिक स्थिति में संपत्ति का ट्रांसफर आसान होगा और परिवारिक विवाद कम होंगे।
ज्वेलर्स को गोल्ड लोन में राहत
गोल्ड लोन चुकाने की अवधि अब 180 दिनों से बढ़ाकर 270 दिन कर दी गई है। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।
इससे ज्वेलर्स को कैश फ्लो संभालने में आसानी होगी और बार-बार लोन रिफाइनेंस कराने का दबाव कम होगा। इसका सीधे आम ग्राहकों पर असर नहीं होगा, लेकिन गोल्ड फाइनेंसिंग सेक्टर में क्रेडिट की उपलब्धता और ब्याज दरों पर इसका कुछ अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
ब्याज दर कम करवाना अब आसान?
क्रेडिट स्कोर तेजी से अपडेट होने और RBI की मौजूदा गाइडलाइंस के चलते लोग अब जल्दी ब्याज दर कम करवाने के लिए बैंक से बात कर सकते हैं। बेहतर स्कोर वाले ग्राहकों के लिए यह सुविधा पहले से आसान और तेज हो जाएगी।
