सोना तस्करी के बहुचर्चित मामले में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है, जहां कन्नड़ अभिनेत्री Ranya Rao और उनके सहयोगी Tarun Konduru Raju पहले एक अंतरराष्ट्रीय ठगी के शिकार बने और बाद में उसी असफलता के बाद कथित तौर पर एक बड़े तस्करी नेटवर्क का हिस्सा बन गए। जांच में खुलासा हुआ है कि अफ्रीका से सीधे सोना मंगाने की उनकी शुरुआती योजना युगांडा में फेल हो गई, जहां उन्हें करीब ₹2 करोड़ का नुकसान हुआ।
जांच दस्तावेजों के अनुसार, दोनों ने शुरुआत में अफ्रीकी देशों—Uganda, Kenya और Tanzania—से सीधे सोना खरीदने की रणनीति बनाई थी। लेकिन शुरुआती असफलताओं के बाद उन्होंने अपना तरीका बदलते हुए Dubai को तस्करी का केंद्र बना लिया।
युगांडा में ‘डील’ बनी जाल, करोड़ों का नुकसान
जांच में सामने आया कि दोनों ने युगांडा के एक एजेंट से संपर्क किया, जिसने उन्हें खदानों से सीधे सोना सप्लाई करने का भरोसा दिलाया। शुरुआती तौर पर 5 किलो सोने की ट्रायल डील तय हुई थी, जिसके बाद बड़ी खेप की योजना बनाई गई थी।
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इस सौदे के लिए अग्रिम भुगतान के रूप में हजारों डॉलर दिए गए। इसके बाद टैक्स और अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम भी मांगी गई। जब तय समय तक सोने की आपूर्ति नहीं हुई, तो राजू Kampala पहुंचे। वहां उन्हें एक रिफाइनरी में सोना दिखाया गया, लेकिन उसे रिलीज कराने के नाम पर ₹1.70 करोड़ और मांगे गए।
आखिरकार यह पूरी डील फर्जी साबित हुई और दोनों को ₹2 करोड़ से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा।
केन्या में भी असफल कोशिश, फिर बदली रणनीति
युगांडा में धोखा खाने के बाद दोनों ने केन्या में भी इसी तरह की कोशिश की, लेकिन वह भी सफल नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने सीधे अफ्रीका से सोना मंगाने का विचार छोड़ दिया और दुबई के बाजारों की ओर रुख किया।
बताया गया कि दुबई के डेरा गोल्ड सूक में सक्रिय अफ्रीकी मूल के डीलरों से संपर्क कर उन्होंने सीमित मात्रा में सोना खरीदना शुरू किया। इन लेनदेन में नकद भुगतान को प्राथमिकता दी जाती थी, जिसके चलते बड़ी मात्रा में नकदी का इंतजाम किया जाता था।
दुबई से भारत तक तस्करी का जटिल नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि सोना खरीदने के बाद उसे भारत लाने के लिए एक सुनियोजित तंत्र तैयार किया गया। इसमें फर्जी निर्यात दस्तावेजों का सहारा लिया जाता था, ताकि यह दिखाया जा सके कि सोना Switzerland या Thailand जैसे तीसरे देशों में भेजा जा रहा है।
असल में यह सोना दुबई एयरपोर्ट पर ही राव को सौंप दिया जाता था, जो इसे छिपाकर भारत लेकर आती थीं। यात्रा योजनाएं और टिकट भी केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए बनाए जाते थे, ताकि दस्तावेजी तौर पर निर्यात वैध लगे।
127 किलो सोने की तस्करी का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच राव ने दुबई से भारत तक करीब 15 यात्राएं कीं। इस दौरान 127.87 किलोग्राम सोने की तस्करी की गई, जिसकी अनुमानित कीमत ₹102 करोड़ बताई गई है।
आरोप है कि भारत पहुंचने के बाद इस सोने को स्थानीय नेटवर्क के जरिए बाजार में बेचा जाता था, जिसमें बिचौलिए और ज्वैलर्स की भूमिका सामने आई है।
एयरपोर्ट प्रोटोकॉल के दुरुपयोग के आरोप
मामले में यह भी आरोप है कि एयरपोर्ट पर जांच से बचने के लिए विशेष प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया गया। जांच में संकेत मिले हैं कि कई बार सामान्य कस्टम जांच से बचने के लिए प्रभाव का उपयोग किया गया।
अब जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य संभावित सहयोगियों और कड़ियों की भी पड़ताल कर रही हैं।
ठगी से तस्करी तक—एक बड़ा नेटवर्क
यह मामला इस बात का उदाहरण बनकर उभरा है कि कैसे एक असफल अंतरराष्ट्रीय सौदे और ठगी की घटना के बाद रणनीति बदलकर एक बड़ा तस्करी नेटवर्क खड़ा किया गया।
अफ्रीका में हुए ₹2 करोड़ के नुकसान से शुरू हुआ यह सिलसिला आगे चलकर ₹100 करोड़ से ज्यादा के अवैध कारोबार में बदल गया, जिसने जांच एजेंसियों के सामने एक जटिल अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की तस्वीर पेश कर दी है।
