नई दिल्ली, 26 अगस्त। रक्षाबंधन के त्योहार के साथ ऑनलाइन खरीदारी, गिफ्ट भेजने और विशेष ऑफर का फायदा उठाने वालों की संख्या बढ़ जाती है। इसी दौरान साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। जालसाज त्योहार से जुड़े गिफ्ट, राखी, मिठाई, कूरियर डिलीवरी, कैशबैक और UPI रिफंड जैसे बहानों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना सकते हैं। कई मामलों में ठगी की शुरुआत एक आकर्षक लिंक या फोन कॉल से होती है और कुछ ही मिनटों में पीड़ित को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
साइबर अपराधियों की रणनीति आमतौर पर लोगों की जल्दबाजी और त्योहार से जुड़ी जरूरतों का फायदा उठाने पर आधारित होती है। वे फर्जी वेबसाइट, नकली ऐप, सोशल मीडिया संदेश या फोन कॉल के जरिए लोगों को भरोसे में लेते हैं। इसके बाद भुगतान कराने, बैंकिंग जानकारी हासिल करने या मोबाइल में संदिग्ध ऐप डाउनलोड कराने की कोशिश की जाती है।
फर्जी गिफ्ट लिंक से हो सकता है बड़ा नुकसान
रक्षाबंधन के दौरान साइबर ठग गिफ्ट या शुभकामना संदेश के साथ फर्जी लिंक भेज सकते हैं। लिंक खोलने पर नकली वेबसाइट दिखाई जा सकती है या APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जा सकता है। कुछ मामलों में गिफ्ट पाने के नाम पर नाम, मोबाइल नंबर, बैंक खाते या कार्ड से जुड़ी जानकारी भरने को कहा जाता है। ऐसे लिंक के जरिए मोबाइल में हानिकारक सॉफ्टवेयर पहुंचने का भी खतरा रहता है।
राखी और गिफ्ट पर भारी डिस्काउंट का लालच
त्योहारी सीजन में 80 से 90 प्रतिशत तक छूट का दावा करने वाले ऑफर लोगों को आकर्षित कर सकते हैं। साइबर ठग इसी तरह के फर्जी ऑफर तैयार कर नकली ई-कॉमर्स वेबसाइट बना सकते हैं। ग्राहक को सस्ते गिफ्ट या राखी का लालच देकर पहले भुगतान कराया जा सकता है और बाद में न तो सामान मिलता है और न ही रकम वापस होती है। कुछ फर्जी वेबसाइट भुगतान के दौरान कार्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी भी हासिल करने की कोशिश कर सकती हैं।
कूरियर डिलीवरी के नाम पर ठगी
रक्षाबंधन पर रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच गिफ्ट और पार्सल भेजने का सिलसिला बढ़ जाता है। ठग इसका फायदा उठाकर खुद को कूरियर कंपनी का कर्मचारी बता सकते हैं। वे एड्रेस गलत होने, पार्सल रोक दिए जाने या डिलीवरी के लिए अतिरिक्त शुल्क की बात कहकर संपर्क कर सकते हैं। इसके बाद OTP बताने, किसी लिंक पर जाने या कोई ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जा सकता है।
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UPI रिफंड के नाम पर फर्जीवाड़ा
ऑनलाइन खरीदारी के बाद रिफंड का इंतजार कर रहे ग्राहकों को भी निशाना बनाया जा सकता है। जालसाज खुद को कंपनी या भुगतान सेवा का कर्मचारी बताकर रिफंड जारी करने का दावा कर सकते हैं। इसके बाद वे UPI रिक्वेस्ट स्वीकार करने, UPI PIN डालने या QR कोड स्कैन करने के लिए कह सकते हैं। ऐसी स्थिति में यह समझना जरूरी है कि पैसा प्राप्त करने के लिए UPI PIN डालने की आवश्यकता नहीं होती।
कैशबैक और बैंक ऑफर भी बन सकते हैं हथियार
त्योहारी सीजन में बैंक और डिजिटल भुगतान सेवाओं के नाम पर फर्जी कैशबैक या इनाम का लालच भी दिया जा सकता है। जालसाज कैशबैक जारी करने के लिए मामूली प्रोसेसिंग फीस मांग सकते हैं या बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। किसी अनजान नंबर या लिंक से मिले ऐसे ऑफर पर भरोसा करने के बजाय संबंधित बैंक या कंपनी के आधिकारिक ऐप और वेबसाइट से इसकी पुष्टि करनी चाहिए।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, त्योहारों के दौरान साइबर अपराधी लोगों की जल्दबाजी, खरीदारी और गिफ्ट भेजने की जरूरत को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं। किसी भी ऑफर, रिफंड या डिलीवरी संबंधी संदेश पर तुरंत कार्रवाई करने के बजाय पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि UPI से पैसा प्राप्त करने के लिए UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती और किसी अनजान व्यक्ति के निर्देश पर QR कोड स्कैन नहीं करना चाहिए।
इन सावधानियों से बच सकते हैं साइबर ठगी से
अनजान लिंक पर क्लिक न करें। किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ OTP, ATM PIN, UPI PIN या बैंकिंग पासवर्ड साझा न करें। किसी के कहने पर रिफंड या पैसा प्राप्त करने के लिए UPI रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। QR कोड स्कैन करने से पहले यह जरूर समझें कि उसके जरिए पैसा आपके खाते में आएगा या आपके खाते से जाएगा।
ऑनलाइन खरीदारी के लिए आधिकारिक और विश्वसनीय वेबसाइट या ऐप का ही इस्तेमाल करें। किसी भी वेबसाइट पर भुगतान करने से पहले उसके पते और कंपनी की पहचान की जांच करें। मोबाइल में किसी अनजान स्रोत से APK या अन्य ऐप डाउनलोड न करें।
त्योहार के दौरान सबसे जरूरी सावधानी यह है कि असामान्य रूप से बड़े डिस्काउंट, अचानक मिलने वाले गिफ्ट और तुरंत भुगतान करने के दबाव से सावधान रहें। साइबर ठग अक्सर पहले भरोसा पैदा करते हैं और फिर जल्दबाजी में गलती करवाते हैं। थोड़ी सी सतर्कता फर्जी गिफ्ट लिंक, कूरियर, रिफंड और कैशबैक के नाम पर होने वाली बड़ी वित्तीय ठगी से बचा सकती है।
