अस्पताल का नंबर समझकर किया फोन, ठगों ने भेजी ‘hospital appointment book csc.apk’ फाइल; ₹5 का भुगतान करने के बाद खाते से ₹85 हजार और ₹5 हजार निकले

मेडिकल अपॉइंटमेंट के नाम पर साइबर जाल, फर्जी APK डाउनलोड कराते ही खाते से निकले ₹90 हजार

Roopa
By Roopa
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पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में अस्पताल की अपॉइंटमेंट बुक कराने के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। फुरसुंगी के भेकराईनगर की 28 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर कथित तौर पर एक फर्जी APK फाइल डाउनलोड करने के बाद ₹90 हजार की ठगी का शिकार हो गईं। साइबर अपराधियों ने अस्पताल का प्रतिनिधि बनकर पहले उनकी मां से संपर्क किया और अपॉइंटमेंट बुक कराने के लिए एक लिंक भेजा। लिंक के जरिए मोबाइल में ऐप डाउनलोड कराया गया और महज ₹5 का भुगतान कराया गया। इसके बाद पीड़िता के बैंक खाते से बिना अनुमति ₹85 हजार और ₹5 हजार की रकम निकाल ली गई।

पीड़िता मूल रूप से नागपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने प्रसव के लिए नागपुर स्थित एक मैटरनिटी अस्पताल में पंजीकरण कराया था और वहां जाने की तैयारी कर रही थीं। उनकी मां भी उनके साथ जाने वाली थीं। अपॉइंटमेंट से जुड़ी जानकारी लेने के लिए उनकी मां ने इंटरनेट पर अस्पताल का संपर्क नंबर खोजा। ऑनलाइन मिले एक नंबर पर कॉल करने के बाद दूसरी तरफ मौजूद महिला ने खुद को अस्पताल से जुड़ा बताकर अपॉइंटमेंट बुक कराने में मदद करने की बात कही।

ठगों ने यहीं से जाल बिछाना शुरू किया। महिला ने पीड़िता की मां को एक लिंक भेजा और मरीज की जानकारी भरने के साथ केवल ₹5 का मामूली शुल्क जमा करने को कहा। लिंक में ‘hospital appointment book csc.apk’ नाम की APK फाइल थी। पीड़िता की मां ने वह लिंक अपनी बेटी को भेज दिया।

पीड़िता ने लिंक पर क्लिक किया तो APK फाइल के जरिए कथित अस्पताल अपॉइंटमेंट ऐप उनके मोबाइल फोन में डाउनलोड हो गया। ऐप में मांगी गई जानकारी भरने के बाद उन्हें भुगतान के विकल्प पर ले जाया गया। उन्होंने ठगों के निर्देश के अनुसार ₹5 का भुगतान कर दिया। इस दौरान उन्हें किसी बड़े वित्तीय जोखिम का अंदाजा नहीं था।

मामला 24 अगस्त को तब सामने आया, जब पीड़िता के मोबाइल पर बैंक खाते से रकम कटने के संदेश पहुंचे। पहले ₹85 हजार और उसके बाद ₹5 हजार उनके खाते से बिना अनुमति डेबिट हो गए। बैंक की ओर से भी इन लेनदेन की पुष्टि के लिए उनसे संपर्क किया गया। इसके बाद पीड़िता को संदेह हुआ कि अस्पताल की अपॉइंटमेंट के नाम पर उन्हें साइबर ठगी का शिकार बनाया गया है।

पीड़िता ने तत्काल बैंक से संपर्क कर आगे होने वाले ऑनलाइन लेनदेन को रोकने का अनुरोध किया। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की। फुरसुंगी पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं और भारतीय न्याय संहिता की धारा 318, 316 और 319 के तहत मामला दर्ज किया है।

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पुलिस अब उस मोबाइल नंबर की जांच कर रही है, जिससे पीड़िता की मां से संपर्क किया गया था। इसके अलावा भेजे गए लिंक, APK फाइल, बैंक खाते और रकम के डिजिटल ट्रेल की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इसी तरीके से अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया है या नहीं।

यह मामला फर्जी वेबसाइट, इंटरनेट सर्च और APK फाइल के जरिए होने वाली साइबर ठगी के बढ़ते खतरे को उजागर करता है। साइबर अपराधी अस्पताल, बैंक, सरकारी विभाग और अन्य भरोसेमंद संस्थानों के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी संपर्क नंबर उपलब्ध कराते हैं। जब कोई व्यक्ति इन नंबरों पर संपर्क करता है तो उसे व्हाट्सऐप या अन्य माध्यम से लिंक भेजकर ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, मेडिकल अपॉइंटमेंट जैसे मामलों में लोग जल्दी समाधान की तलाश में रहते हैं और इसी भरोसे तथा जल्दबाजी का फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं। अस्पताल का संपर्क नंबर इंटरनेट पर मिलने के बाद उसे सीधे सही मानने के बजाय आधिकारिक वेबसाइट या अन्य सत्यापित माध्यम से उसकी पुष्टि करनी चाहिए। किसी अनजान नंबर से भेजे गए लिंक या APK फाइल को डाउनलोड नहीं करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल ₹5 जैसी छोटी रकम के भुगतान की मांग को सुरक्षित नहीं मानना चाहिए। ठग मामूली भुगतान के जरिए पीड़ित को यह भरोसा दिला सकते हैं कि प्रक्रिया सामान्य है, जबकि असली खतरा संदिग्ध लिंक या ऐप में छिपा हो सकता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, APK फाइल को आधिकारिक ऐप स्टोर के बाहर से डाउनलोड करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। किसी अस्पताल की अपॉइंटमेंट के लिए अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए ऐप को इंस्टॉल करने के बजाय अस्पताल के आधिकारिक डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करना चाहिए। बैंक खाते में अनधिकृत लेनदेन दिखाई देने पर तुरंत बैंक को सूचित करने और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने से रकम को ट्रेस या फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।

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