गुरुग्राम। बंद हो चुके मोबाइल नंबर के दोबारा आवंटन का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग के बैंक खाते तक पहुंच बना ली। नंबर चालू होते ही खाते से जुड़े बैंक लेनदेन के संदेश आरोपियों के मोबाइल पर पहुंचने लगे। इसके बाद गिरोह ने नेट बैंकिंग सक्रिय कर बुजुर्ग के नाम से नया डेबिट कार्ड मंगाया और कूरियर कर्मचारी से घर के बाहर कार्ड हासिल कर लिया। कार्ड हाथ लगने के बाद खाते से अलग-अलग लेनदेन कर कुल ₹32.10 लाख निकाल लिए गए। साइबर क्राइम ईस्ट थाना पुलिस ने मामले में एक महिला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुणाल कश्यप, कालकाजी निवासी अंकित, तुगलकाबाद एक्सटेंशन निवासी मोहम्मद साहिल और आशा किरण अपार्टमेंट, दिल्ली निवासी संगीता के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 चांदी के सिक्के, सोने की बाली और दो आईफोन बरामद किए हैं। पुलिस पूछताछ में ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए तरीके का खुलासा हुआ है। जांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने इस तरीके से किसी अन्य बैंक खाते या व्यक्ति को भी निशाना बनाया था या नहीं।
बहू की शिकायत पर सामने आया मामला
पुलिस के मुताबिक 13 सितंबर को बुजुर्ग की बहू ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके ससुर के बैंक खाते से 7 मार्च से 2 जून के बीच कई ऐसे लेनदेन हुए, जिनकी जानकारी परिवार को नहीं थी। खाते में हुई गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने बैंक से संपर्क किया। बैंक रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि खाते से जुड़ा एक नया डेबिट कार्ड जारी हुआ था।
परिवार के लिए यह बात हैरान करने वाली थी, क्योंकि बुजुर्ग ने नए डेबिट कार्ड के लिए कोई आवेदन नहीं किया था। इसके बाद मामले की जानकारी साइबर क्राइम ईस्ट थाना पुलिस को दी गई। पुलिस ने बैंक से खाते के लेनदेन, कार्ड जारी होने और मोबाइल नंबर से जुड़ी जानकारी हासिल कर जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस दिल्ली पहुंची और अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
बंद नंबर दोबारा हुआ आवंटित
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि बुजुर्ग के बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं था। टेलीकॉम कंपनी की प्रक्रिया के तहत बंद हो चुके नंबर को बाद में कुणाल कश्यप को आवंटित कर दिया गया। नंबर उसके पास पहुंचने के बाद बुजुर्ग के बैंक खाते से जुड़े लेनदेन संबंधी संदेश उसके मोबाइल पर आने लगे।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने इसी स्थिति का फायदा उठाया। बैंक खाते से जुड़े संदेशों की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने खाते तक डिजिटल पहुंच बनाने की योजना तैयार की। इसके लिए नेट बैंकिंग सक्रिय की गई। बैंकिंग गतिविधियों की जानकारी मिलने से आरोपियों को खाते में मौजूद रकम और होने वाले लेनदेन के बारे में जानकारी मिलती रही।
नेट बैंकिंग से नया कार्ड मंगाया
गिरोह ने इसके बाद बुजुर्ग के नाम से नया डेबिट कार्ड जारी कराने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस जांच के मुताबिक आवेदन नेट बैंकिंग के जरिए किया गया और कार्ड बुजुर्ग के पंजीकृत पते पर भेजा गया। आरोपियों की योजना कार्ड को उसके वास्तविक धारक तक पहुंचने से पहले ही हासिल करने की थी।
इसके लिए गिरोह के सदस्य बुजुर्ग के घर के आसपास नजर रखने लगे। जब कूरियर कर्मचारी डेबिट कार्ड लेकर पहुंचा तो आरोपियों ने खुद को संबंधित व्यक्ति बताकर कार्ड घर के बाहर से ही रिसीव कर लिया। इस तरह बैंक खाते तक पहुंच बनाने के बाद उनके हाथ में वैध डेबिट कार्ड भी आ गया।
कार्ड मिलने के बाद खाते से निकाली रकम
पुलिस के अनुसार डेबिट कार्ड हासिल करने के बाद आरोपियों ने बुजुर्ग के बैंक खाते से अलग-अलग लेनदेन किए। 7 मार्च से 2 जून के बीच खाते से कुल ₹32.10 लाख की अनधिकृत निकासी सामने आई। रकम निकालने के बाद आरोपियों ने उससे सामान और अन्य चीजें खरीदने में भी खर्च किया। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 10 चांदी के सिक्के, सोने की बाली और दो आईफोन बरामद किए हैं।
पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि बंद मोबाइल नंबर दोबारा मिलने के बाद बैंकिंग जानकारी का इस्तेमाल कर गिरोह ने किसी अन्य व्यक्ति के खाते को निशाना बनाया था या नहीं। पुलिस गिरोह के संभावित अन्य सदस्यों और रकम के पूरे लेनदेन की कड़ियां भी खंगाल रही है।
