कंपनी में बिना काम की नौकरी देकर दोस्त को छह अंकों का वेतन दिलाने और करीब 60% रकम किकबैक के रूप में वापस लेने का आरोप; अमेरिकी अदालत ने Karan Gupta को सुनाई सजा

भारतीय मूल के पूर्व Optum निदेशक को 3 साल की जेल, ₹8 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी

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By Roopa
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नई दिल्ली। अमेरिका में भारतीय मूल के स्वास्थ्य सेवा कंपनी Optum के पूर्व वरिष्ठ निदेशक Karan Gupta को कंपनी के साथ करीब $950,000 की धोखाधड़ी की साजिश में तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई है। यह रकम भारतीय मुद्रा में लगभग ₹8 करोड़ से अधिक बैठती है। कैलिफोर्निया निवासी 48 वर्षीय Gupta को वायर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित अपराधों में दोषी ठहराए जाने के बाद 24 अगस्त को सजा सुनाई गई।

अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, Gupta ने अपने लंबे समय के मित्र Shangraf Kaul, 45, के लिए ऐसी नौकरी की व्यवस्था की जिसमें उसे कथित तौर पर काम किए बिना कई वर्षों तक छह अंकों का वेतन मिलता रहा। Kaul पेन्सिलवेनिया के East Stroudsburg का निवासी है। Gupta ने उसे 2015 के अंत में अपनी टीम में Data Engineering Manager के पद पर नियुक्त किया था।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, Kaul के पास इस पद के लिए आवश्यक योग्यता नहीं थी। इसके बावजूद उसे नौकरी दी गई और उसने Optum में तीन साल से अधिक समय तक कथित तौर पर कोई काम नहीं किया। इस दौरान उसे छह अंकों का वेतन मिलता रहा। जांच में आरोप सामने आया कि Gupta ने इस व्यवस्था के बदले Kaul से उसके वेतन का लगभग 60% हिस्सा किकबैक के तौर पर वापस मांगा।

शुरुआत में यह रकम नकद जमा के जरिए Gupta के बैंक खाते में पहुंचाई गई। बाद में दोनों ने एक अलग चेकिंग अकाउंट का इस्तेमाल किया, जिस तक Gupta की पहुंच थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य दोनों के बीच होने वाले धन के हस्तांतरण को छिपाना था।

Gupta को 17 फरवरी को छह दिन चली संघीय अदालत की सुनवाई के बाद जूरी ने दोषी ठहराया था। जूरी ने उन्हें वायर फ्रॉड की साजिश, वायर फ्रॉड के 10 मामलों और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश से जुड़े आरोपों में दोषी पाया। इसके बाद अदालत ने 24 अगस्त को उन्हें तीन साल की जेल की सजा सुनाई।

मामला तब सामने आया जब Optum ने नवंबर 2019 में Gupta को एक अन्य कथित नो-शो कर्मचारी धोखाधड़ी में उनकी भूमिका के चलते नौकरी से निकाल दिया। कंपनी ने बाद में मामले की आंतरिक जांच की और इसकी जानकारी संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दी। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और Gupta तथा उनके सहयोगी की भूमिका की पड़ताल की गई।

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अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने इस मामले को केवल एक निजी कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाला अपराध मानने से इनकार किया। अभियोजन अधिकारियों के अनुसार, निजी कंपनी के साथ धोखाधड़ी का प्रभाव व्यापक हो सकता है, खासकर तब जब संबंधित संस्था स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी हो और उस पर लाखों अमेरिकी नागरिक निर्भर हों।

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी किसी संगठन की वित्तीय व्यवस्था के साथ-साथ उसके कामकाज और भरोसे को भी नुकसान पहुंचाती है। Optum स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में शामिल है और इसके संचालन पर बड़ी संख्या में लोग निर्भर हैं।

इस मामले में Gupta के सह-आरोपी Kaul ने फरवरी 2025 में वायर फ्रॉड की साजिश के आरोप में अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। उसके बाद Gupta के खिलाफ मामला संघीय अदालत में आगे बढ़ा और छह दिन की सुनवाई के बाद जूरी ने उन्हें दोषी करार दिया।

मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी कथित ‘नो-शो जॉब’ व्यवस्था रही। आरोप है कि Kaul को नियुक्त किए जाने के बाद उसे वास्तविक जिम्मेदारियां नहीं दी गईं, लेकिन कंपनी से नियमित वेतन मिलता रहा। Gupta द्वारा वेतन का बड़ा हिस्सा वापस लिए जाने की कथित व्यवस्था ने इस नियुक्ति को कथित वित्तीय लाभ के माध्यम में बदल दिया।

अदालत की सजा के साथ यह मामला अमेरिका में कॉर्पोरेट धोखाधड़ी, फर्जी नियुक्तियों और कर्मचारियों के वेतन से जुड़े किकबैक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उदाहरण भी बन गया है। जांच में सामने आए वित्तीय लेनदेन और बैंक खातों का इस्तेमाल अभियोजन पक्ष के मामले में महत्वपूर्ण रहा।

Gupta की सजा के बाद मामले में अब उनके सहयोगी Kaul की भूमिका और उसकी पूर्व में स्वीकार की गई दोषसिद्धि भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। दोनों के खिलाफ हुई कानूनी कार्रवाई ने कथित तौर पर वर्षों तक चलाए गए उस तंत्र को उजागर किया, जिसमें एक कर्मचारी को बिना वास्तविक काम के वेतन दिलाकर उससे रकम वापस लेने का आरोप है।

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