नई दिल्ली। OpenAI ने रूस से जुड़े ChatGPT अकाउंट्स के एक समूह पर प्रतिबंध लगा दिया है। कंपनी के अनुसार, इन अकाउंट्स का इस्तेमाल एक गुप्त प्रभाव अभियान में किया जा रहा था, जिसमें ChatGPT की मदद से सोशल मीडिया पोस्ट और कमेंट तैयार कर एक कथित अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक को बढ़ावा दिया जा रहा था। इस अभियान के जरिए रूस के पक्ष में नैरेटिव को मजबूत करने की कोशिश की गई।
OpenAI के मुताबिक, संबंधित अकाउंट्स ने VPN सेवाओं का इस्तेमाल कर एक्सेस प्रतिबंधों को दरकिनार किया और ChatGPT से तैयार सामग्री को Substack, Telegram, X, Facebook और LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्म पर फैलाया। कंपनी ने बताया कि जांच की शुरुआत AI से तैयार सोशल मीडिया पोस्ट की पहचान के बाद हुई, लेकिन आगे चलकर एक बड़े नेटवर्क का पता चला। इसमें एक वेबसाइट, अकादमिक सामग्री की कथित कॉपी, एक तथाकथित Sovereignty Index और ऑपरेटरों की रूसी पहचान छिपाने के प्रयास शामिल थे।
इन अकाउंट्स का इस्तेमाल International Burke Institute (IBI) के प्रचार के लिए किया जा रहा था। IBI खुद को इजरायल स्थित विशेषज्ञों का एक अंतरराष्ट्रीय समुदाय बताता है, जो अर्थशास्त्र, राजनीति, समाजशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे विषयों पर काम करने का दावा करता है। इसकी वेबसाइट फरवरी 2025 में रजिस्टर की गई थी और वहां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के विशेषज्ञों को जोड़ने वाले मंच के रूप में संगठन की पहचान पेश की गई है।
OpenAI ने कहा कि अभियान की पहुंच अपेक्षाकृत सीमित थी। Telegram इसके लिए प्रमुख माध्यम नजर आया, जहां कुछ चैनलों के 10,000 से 20,000 तक फॉलोअर्स थे। ChatGPT से तैयार अधिकांश सामग्री अंग्रेजी में थी। ऑपरेटरों ने कथित तौर पर AI को ऐसे निर्देश दिए कि सामग्री में भाषा संबंधी ऐसे संकेत न आएं, जिनसे उनके रूसी मूल का पता लगाया जा सके।
हालांकि IBI की वेबसाइट पर प्रकाशित लेखों को ChatGPT से तैयार किए जाने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। OpenAI के अनुसार, इनमें से कई सामग्री अकादमिक लेखों से कॉपी की गई प्रतीत होती हैं और कुछ मामलों में लेखकों का गलत श्रेय दिया गया। कुछ अन्य सामग्री पहले किसी रूसी या अन्य स्लाविक भाषा में तैयार की गई और बाद में मशीन अनुवाद के जरिए अंग्रेजी में बदली गई प्रतीत हुई।/
इस अभियान का एक प्रमुख हिस्सा तथाकथित Sovereignty Index था, जिसे Burke Index भी कहा गया। OpenAI के अनुसार, इस इंडेक्स का इस्तेमाल रूस को अनुकूल तरीके से पेश करने और पश्चिमी देशों की आलोचना को बढ़ावा देने के लिए किया गया।
IBI की वेबसाइट के मुताबिक, Sovereignty Index किसी देश की राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी, सूचना, सांस्कृतिक, संज्ञानात्मक और सैन्य संप्रभुता समेत सात क्षेत्रों का आकलन करता है। प्रत्येक श्रेणी को अधिकतम 100 अंक दिए जाते हैं। संगठन के अनुसार, गणना में आधिकारिक राष्ट्रीय और वैश्विक आंकड़ों के साथ विशेषज्ञों के आकलन का इस्तेमाल किया जाता है। सातों श्रेणियों के संयुक्त अंकों से 100 से 700 के बीच अंतिम Cumulative Sovereignty Index तैयार होता है।
Algoritha Security Launches ‘Make in India’ Cyber Lab for Educational Institutions
वेबसाइट पर प्रकाशित आंकड़ों में अमेरिका 650.9 अंकों के साथ शीर्ष पर है। इसके बाद चीन 649.1, स्विट्जरलैंड 610.7 और रूस 601.4 अंकों के साथ सूची में हैं। रूस से संबंधित रिपोर्ट में देश को उच्च स्तर की संप्रभुता और मजबूत सैन्य तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता वाला बताया गया है। हालांकि इसमें जनसांख्यिकीय बदलाव, नवाचार संबंधी सीमाओं और नागरिक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है।
OpenAI के अनुसार, अभियान केवल IBI के प्रचार तक सीमित नहीं था। एक ChatGPT अकाउंट का इस्तेमाल “American Observer” नाम के Telegram चैनल के लिए प्रोफाइल तस्वीर तैयार करने में भी किया गया। इसी अकाउंट से चैनल की गतिविधियों के रूसी भाषा में सारांश तैयार करने के लिए बार-बार अनुरोध किए गए।
कंपनी ने कहा कि यह अभियान पहले सामने आए रूस से जुड़े प्रभाव अभियानों से अलग था। इसकी खासियत केवल सोशल मीडिया पोस्ट तैयार करना नहीं, बल्कि एक ऐसी संस्था की छवि बनाना थी जो देखने में विश्वसनीय और स्वतंत्र विशेषज्ञ मंच जैसी लगे।
OpenAI के मुताबिक, इस अभियान का महत्व इसकी तत्काल पहुंच से अधिक उस बुनियादी ढांचे में था जिसे इसके पीछे तैयार किया गया। कथित विशेषज्ञों, दोबारा प्रकाशित अकादमिक सामग्री, एक तथाकथित स्वतंत्र इंडेक्स और सोशल मीडिया चैनलों को एक साथ इस्तेमाल कर एक संस्थागत विश्वसनीयता बनाने की कोशिश की गई।
कंपनी ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि प्रभाव अभियान चलाने वाले समूह AI का इस्तेमाल पूरी मुहिम संचालित करने के बजाय सहायक उपकरण के रूप में कर सकते हैं। वे AI की मदद से प्रचार सामग्री, अनुवाद, सोशल मीडिया संदेश और अन्य डिजिटल संपत्तियां तैयार कर सकते हैं तथा अपनी वास्तविक पहचान और संदेशों के स्रोत को छिपाने का प्रयास कर सकते हैं।
OpenAI के अनुसार, AI की मदद से ऐसे अभियानों की लागत और मेहनत कम हो सकती है, जबकि दिखने में वैध वेबसाइट और शोध संस्थान उनके नैरेटिव को विश्वसनीयता प्रदान कर सकते हैं। साथ ही, AI के इस्तेमाल से उत्पन्न डिजिटल संकेत जांचकर्ताओं को ऐसे व्यापक नेटवर्क की पहचान करने में मदद भी कर सकते हैं।
