भुवनेश्वर। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने बचत राशि में ₹13.98 लाख के कथित गबन के मामले में 11 साल से फरार चल रही पूर्व पोस्टमास्टर शब्दा स्वाईं को गिरफ्तार किया है। सीबीआई के अनुसार, आरोपी महिला 2015 में आरोप तय होने के बाद से गिरफ्तारी से बच रही थी। उसके खिलाफ 2022 में गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया था।
सीबीआई के मुताबिक, मामला 2014 में दर्ज किया गया था और कथित वित्तीय अनियमितताएं बड़गढ़ जिले के बोंडा डाकघर में सामने आई थीं। शब्दा स्वाईं वर्ष 2008 से 2014 के बीच वहां पोस्टमास्टर के पद पर तैनात थीं। इसी अवधि में उन पर डाकघर के ग्राहकों से बचत खाते में जमा कराने के लिए रकम लेने और बाद में उस धनराशि का हिसाब सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करने का आरोप है।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ग्राहकों से रकम लेने के बाद उनकी पासबुक में जमा की फर्जी प्रविष्टियां करती थीं। हालांकि, इन जमाओं को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाता था। सीबीआई ने इस प्रक्रिया को सरकारी धन और ग्राहकों की जमा राशि के कथित दुरुपयोग से जोड़ते हुए मामला दर्ज किया था।
सीबीआई ने बताया कि मामले में 31 दिसंबर 2015 को आरोप तय किए गए थे। इसके बाद से शब्दा स्वाईं लगातार फरार थीं। गिरफ्तारी के लिए जांच एजेंसी की ओर से लगातार प्रयास किए जाते रहे। करीब सात साल बाद 2022 में अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया, लेकिन इसके बावजूद वह पुलिस और जांच एजेंसी की पकड़ से बाहर रहीं।
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लगभग 11 वर्षों तक फरार रहने के बाद आखिरकार सीबीआई को उनकी मौजूदगी के बारे में जानकारी मिली। जांच एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, शब्दा स्वाईं बड़गढ़ में एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने पहुंची थीं। इसी दौरान सीबीआई की टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को भुवनेश्वर की अदालत में पेश किया गया। अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई अदालत की निगरानी में होगी। जांच एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों और कथित वित्तीय अनियमितताओं की भी पड़ताल कर रही है।
यह मामला डाकघर की बचत योजनाओं में जमा रकम के प्रबंधन से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं को सामने लाता है। डाकघर में ग्राहकों की ओर से जमा की गई रकम का आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज होना और उसका सही हिसाब रखना वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरोप है कि इस मामले में ग्राहकों से रकम लेने के बाद पासबुक में प्रविष्टियां की गईं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उन लेनदेन को दर्ज नहीं किया गया।
सीबीआई की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि इस प्रक्रिया के कारण कुल ₹13.98 लाख की राशि का हिसाब प्रभावित हुआ। एजेंसी ने इसी आधार पर पूर्व पोस्टमास्टर के खिलाफ कार्रवाई की थी। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
जांच एजेंसी की कार्रवाई ऐसे मामलों में लंबे समय तक फरार रहने वाले आरोपियों के खिलाफ चलाए जा रहे प्रयासों को भी दर्शाती है। गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद आरोपी के कई वर्षों तक गिरफ्तारी से बचते रहने के बाद सीबीआई ने लगातार निगरानी और सूचना जुटाने के जरिए उसकी मौजूदगी का पता लगाया।
अब अदालत में मामले की आगे की सुनवाई के दौरान कथित गबन, फर्जी प्रविष्टियों और सरकारी रिकॉर्ड में जमा राशि दर्ज नहीं किए जाने से जुड़े साक्ष्यों की जांच होगी। सीबीआई यह भी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया में है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड न्यायिक कार्यवाही के सामने रखे जाएं।
