नोएडा। बजाज लाइफ इंश्योरेंस के हजारों ग्राहकों की निजी और बीमा संबंधी जानकारी कथित तौर पर लीक कर दूसरी बीमा कंपनी के इस्तेमाल में लाए जाने का मामला सामने आया है। कंपनी की शिकायत पर नोएडा साइबर क्राइम थाने में सात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों में कॉल सेंटर कंपनी आईसीसीएस डिजएक्स लिमिटेड, उसके पांच पूर्व कर्मचारी और जॉपर इंश्योरेंस ब्रोकर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। कंपनी का आरोप है कि ग्राहकों का डेटा केवल लीड जनरेशन और बीमा बिक्री के उद्देश्य से साझा किया गया था, लेकिन कुछ कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ने के बाद भी कथित तौर पर इस गोपनीय जानकारी को अपने पास रखा और उसका इस्तेमाल किया।
पुलिस के मुताबिक, बजाज लाइफ ने संभावित और मौजूदा पॉलिसीधारकों से जुड़ी जानकारी लीड जनरेशन तथा बीमा उत्पादों की बिक्री के लिए आईसीसीएस डिजएक्स लिमिटेड को उपलब्ध कराई थी। इस डेटा में ग्राहकों की निजी जानकारी और पॉलिसी से संबंधित विवरण शामिल थे। कंपनी की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आईसीसीएस के कुछ कर्मचारियों ने बिना अनुमति इस जानकारी को अपने पास रख लिया। बाद में इसी डेटा का इस्तेमाल कथित तौर पर दूसरे व्यावसायिक उद्देश्य के लिए किया गया।
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शिकायत के अनुसार, आईसीसीएस में काम करने वाले पांच कर्मचारी बाद में नौकरी छोड़कर जॉपर इंश्योरेंस ब्रोकर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ गए। कंपनी का आरोप है कि इसके बाद इन पूर्व कर्मचारियों ने बजाज लाइफ के मौजूदा ग्राहकों से संपर्क करना शुरू किया। उन्हें दूसरी बीमा कंपनी के उत्पादों और योजनाओं की जानकारी दी गई। कंपनी ने इसे उसके ग्राहकों की गोपनीय जानकारी के कथित अनधिकृत इस्तेमाल के तौर पर पुलिस के सामने रखा है।
बजाज लाइफ का कहना है कि आईसीसीएस को उपलब्ध कराया गया डेटा केवल कंपनी की ओर से लीड जनरेशन के लिए इस्तेमाल किया जाना था। कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने के बाद ग्राहकों की जानकारी अपने पास रखने या किसी अन्य कंपनी के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि पूर्व कर्मचारियों ने डेटा का इस्तेमाल कर ग्राहकों से संपर्क किया, तो इससे कंपनी की गोपनीय व्यावसायिक जानकारी और ग्राहकों की निजी जानकारी के दुरुपयोग का मामला बनता है।
प्राथमिकी में आईसीसीएस डिजएक्स लिमिटेड के अलावा अभिषेक बजाज, मोहम्मद मुस्तफा, वंशिका, विपिन कुमार, नजीर मोहम्मद और जॉपर इंश्योरेंस ब्रोकर्स प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और डेटा के कथित हस्तांतरण की कड़ियों की जांच कर रही है।
पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के साथ अन्य प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज किया है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि ग्राहकों का डेटा किस सिस्टम या माध्यम से निकाला गया, उसे किसने अपने पास रखा और बाद में किन लोगों या संस्थाओं तक पहुंचाया गया। पुलिस यह भी जांच करेगी कि कितने ग्राहकों की जानकारी कथित तौर पर इस्तेमाल हुई और उससे कितने ग्राहकों से संपर्क किया गया।
मोबाइल और कंप्यूटर की होगी फॉरेंसिक जांच
कंपनी ने आरोपियों के मोबाइल फोन, कंप्यूटर, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और संचार रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। पुलिस इन डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच के जरिए डेटा की उपलब्धता, उसके हस्तांतरण और इस्तेमाल से जुड़े साक्ष्य जुटा सकती है। ईमेल, संदेश, कॉल रिकॉर्ड, फाइल ट्रांसफर और अन्य डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा सकती है।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि डेटा कहां से लिया गया, कितने लोगों तक पहुंचा और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों की जांच के आधार पर आरोपों की पुष्टि की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
