दक्षिण मुंबई की संयुक्त संपत्ति को कथित तौर पर रिश्तेदारों की जानकारी के बिना पुनर्विकास सौदे में शामिल करने का आरोप; NBW के बाद EOW ने घर से पकड़ा, अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेजा

₹100 करोड़ की प्रॉपर्टी, ₹3.5 करोड़ का सौदा और 21 गैरहाजिरियां; 72 साल की महिला गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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मुंबई। दक्षिण मुंबई की करीब ₹100 करोड़ मूल्य की संपत्ति से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 72 वर्षीय अमीना उस्मान दादा को गिरफ्तार किया है। अदालत में लगातार गैरहाजिर रहने के कारण उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया गया था। पुलिस के मुताबिक, अदालत की ओर से 21 बार समन भेजे जाने के बावजूद अमीना केवल एक-दो सुनवाई में ही उपस्थित हुई थीं। शुक्रवार को EOW की टीम ने उन्हें दक्षिण मुंबई स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया।

गिरफ्तारी के बाद अमीना को 47वीं मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने अदालत को वारंट की तामील और आरोपी की लगातार गैरहाजिरी से संबंधित रिपोर्ट भी सौंपी। जांच एजेंसी का कहना है कि सुनवाई में नियमित रूप से उपस्थित नहीं होने के कारण अदालत ने उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाया था।

EOW के अनुसार, अमीना इस मामले में पांच आरोपियों में शामिल हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर दक्षिण मुंबई की बड़ी संयुक्त संपत्ति को उसके अन्य सह-मालिक रिश्तेदारों की जानकारी के बिना डेवलपर के साथ पुनर्विकास समझौते में शामिल किया। मामले में आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज है।

मामला लोअर परेल के डेलाई रोड स्थित तीन किराएदार परिसरों से जुड़ा है। शिकायतकर्ता अयाज कपाड़िया ने पुलिस से शिकायत कर आरोप लगाया था कि उनके रिश्तेदारों ने संयुक्त रूप से स्वामित्व वाली संपत्ति पर कथित तौर पर 100 प्रतिशत मालिकाना हक का दावा कर लिया। इसके बाद संपत्ति के पुनर्विकास के लिए बिग ट्री डेवलपर्स के साथ समझौता किया गया।

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पुलिस जांच के मुताबिक, विवादित संपत्तियां शिकायतकर्ता के दिवंगत पिता जाफर और उनके चाचा लतीफ के परिवारों की संयुक्त संपत्ति थीं। जांच एजेंसी का आरोप है कि अमीना उस्मान के पास पावर ऑफ अटॉर्नी थी और इसी अधिकार के आधार पर उन्होंने पुनर्विकास समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस सौदे के तहत उन्हें करीब ₹3.5 करोड़ प्राप्त हुए और दो फ्लैट देने का भी वादा किया गया था।

पुलिस के अनुसार, संपत्ति की कीमत करीब ₹100 करोड़ आंकी गई है। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति के संबंध में अन्य हिस्सेदारों की सहमति और जानकारी के बिना सौदा किया गया। इसी को लेकर विवाद बढ़ा और मामला जांच एजेंसी तक पहुंचा। पुनर्विकास समझौते को लेकर विवाद अब बॉम्बे हाई कोर्ट में भी लंबित है।

वारंट की कार्रवाई के दौरान EOW टीम ने अमीना के 84 वर्षीय पति उस्मान हाशम दादा को भी अदालत के आदेश की जानकारी दी। पुलिस ने उनके वकील को भी वारंट के निष्पादन के बारे में सूचित किया। इसके बाद अमीना को हिरासत में लेकर अदालत के समक्ष पेश किया गया।

इस मामले में EOW पहले भी कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। अबिदा इस्माइल को मैसूर से गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल जमानत पर हैं। UAE निवासी रहीम लतीफ कपाड़िया को लुकआउट सर्कुलर (LOC) के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। वहीं, मलिक लतीफ कपाड़िया अभी फरार बताया जा रहा है। एक अन्य आरोपी अब्दुल अजीज कपाड़िया के खिलाफ अदालत ने उद्घोषणा जारी की है।

जांच एजेंसी अब संपत्ति के स्वामित्व, पावर ऑफ अटॉर्नी के इस्तेमाल, पुनर्विकास समझौते, ₹3.5 करोड़ के कथित भुगतान और अन्य वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है। EOW यह भी पता लगाने में जुटी है कि संयुक्त संपत्ति से जुड़े सौदे में सभी आरोपियों की क्या भूमिका थी और अन्य हिस्सेदारों की सहमति के बिना कथित तौर पर समझौता कैसे किया गया।

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