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₹80 लाख के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा, किराए के बैंक खातों से रकम घुमा रहे थे आरोपी; 4 गिरफ्तार

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By Roopa
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छतरपुर/नरसिंहपुर: मध्य प्रदेश पुलिस ने साइबर ठगी की रकम को कथित तौर पर किराए के बैंक खातों के जरिए इधर-उधर करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, जांच में कई राज्यों से जुड़ी करीब 50 शिकायतों में लगभग ₹80 लाख के संदिग्ध साइबर लेनदेन का पता चला है। आरोप है कि गिरोह सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर बैंक खाते किराए पर लेता था और उनका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने तथा तेजी से दूसरे खातों में भेजने के लिए करता था।

मामला छतरपुर जिले के एक व्यक्ति से कथित ₹28 लाख की ठगी से सामने आया। पीड़ित को Telegram के जरिए ऑनलाइन रेटिंग बढ़ाने के नाम पर निवेश की गई रकम दोगुनी करने का झांसा दिया गया था। शिकायत के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों, ऑनलाइन लेनदेन और डिजिटल संचार माध्यमों की जांच शुरू की, जिसके आधार पर गिरोह के नरसिंहपुर के गोटेगांव क्षेत्र में सक्रिय होने का पता चला।

₹28 लाख दोगुने करने का दिया झांसा

पुलिस के मुताबिक, छतरपुर निवासी मोहित चौबे ने खजुराहो थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि उन्हें Telegram ऐप के जरिए ऑनलाइन रेटिंग बढ़ाने का काम देकर रकम दोगुनी करने का लालच दिया गया। शुरुआत में उन्हें ऑनलाइन गतिविधियों के जरिए कमाई का भरोसा दिलाया गया और बाद में अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से उनसे करीब ₹28 लाख जमा करा लिए गए।

जब रकम वापस नहीं मिली तो पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस से शिकायत की। इसके बाद एक विशेष टीम गठित कर मामले की जांच शुरू की गई।

Instagram से किराए पर लेते थे बैंक खाते

जांच में कथित तौर पर सामने आया कि आरोपी खुद ठगी की पूरी रकम अपने खातों में रखने के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खाते किराए पर लेते थे। पुलिस के अनुसार, ऐसे बैंक खातों की तलाश Instagram पर डाले गए विज्ञापनों के जरिए की जाती थी।

ठगी से प्राप्त रकम पहले इन खातों में भेजी जाती और उसके बाद बहुत कम समय में दूसरे बैंक खातों या अन्य वित्तीय माध्यमों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य कथित तौर पर रकम के मूल स्रोत और वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना मुश्किल बनाना था।

जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि साइबर ठगी से हासिल रकम को आगे क्रिप्टोकरेंसी में बदले जाने की कोशिश की जाती थी। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि रकम को किस क्रिप्टो प्लेटफॉर्म या डिजिटल वॉलेट के जरिए स्थानांतरित किया गया।

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आठ राज्यों तक पहुंची लेनदेन की कड़ियां

पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध बैंक खातों में अब तक लगभग ₹80 लाख के साइबर अपराध से जुड़े लेनदेन का पता चला है। इन लेनदेन से संबंधित शिकायतें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, दिल्ली, बिहार और झारखंड में दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

जांचकर्ताओं को पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और महाराष्ट्र में भी आरोपी नेटवर्क से जुड़े लोगों या लेनदेन के संकेत मिले हैं। इससे पुलिस को संदेह है कि गिरोह का संचालन केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं था और इसके सदस्य कई राज्यों में बैंक खातों तथा वित्तीय चैनलों का इस्तेमाल कर रहे थे।

चार आरोपी गिरफ्तार

तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद पुलिस ने सोमवार को नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव क्षेत्र में कार्रवाई कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभम उर्फ शिवम पटेल, नीरज पटेल, कैलाश उर्फ केवल रजक और हीरालाल उर्फ संदीप रजक के रूप में हुई है। चारों गोटेगांव क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।

पुलिस ने आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में करीब ₹1.50 लाख की रकम फ्रीज कराई है। उनके कब्जे से कई ATM कार्ड, बैंक खाते खोलने में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन और ₹38,000 नकद बरामद किए गए हैं।

दूसरे आरोपियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, साइबर ठगी के मामलों में ‘म्यूल अकाउंट’ का इस्तेमाल अपराधियों के लिए रकम की असली कड़ी छिपाने का अहम माध्यम बन गया है। उनका कहना है कि जब ठगी की रकम कई किराए के खातों से होकर गुजरती है और बाद में डिजिटल संपत्ति या अन्य माध्यमों में बदल दी जाती है, तो जांच एजेंसियों के लिए वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर उन लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने अपने बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्रिप्टोकरेंसी में कथित रूपांतरण के पीछे कौन लोग थे और गिरोह ने अब तक कितने साइबर अपराधों में ऐसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया।

जांच जारी है और पुलिस ने संकेत दिया है कि नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका सामने आने पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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