मदुरै। तमिलनाडु के मदुरै और डिंडीगुल जिलों में क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर कथित Ponzi स्कैम का मामला सामने आया है। ठगी का शिकार हुए दैनिक मजदूरों, गृहिणियों और ऑटो चालकों समेत सैकड़ों छोटे निवेशकों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया और अपनी रकम वापस दिलाने की मांग की। डिंडीगुल के कासमपट्टी गांव में मामला उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब गुस्साए निवेशकों ने कथित तौर पर एजेंटों और बिचौलियों के घरों में तोड़फोड़ की। मदुरै जिला साइबर क्राइम पुलिस ने केस दर्ज कर 12 लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक 500 से अधिक शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। जांचकर्ताओं को आशंका है कि कथित नेटवर्क से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं और ठगी की रकम करोड़ों रुपये में हो सकती है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई के साथ निवेशकों से कथित तौर पर जुटाई गई रकम का पता लगाने और उसे बरामद करने में जुटी है।
जांच में मेलूर निवासी रंजीत को कथित नेटवर्क का मुख्य संचालक बताया गया है। आरोप है कि वह खुद को अमेरिका से लौटा हुआ व्यक्ति बताकर लोगों को प्रभावित करता था। वह विदेश में निवेश का अनुभव होने और अमेरिका में संपर्क होने का दावा करता था। इसी आधार पर वह लोगों को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर ऊंचे रिटर्न का भरोसा देता था।
पुलिस के मुताबिक, कथित स्कैम को लिंक और ऐप के माध्यम से संचालित किया जाता था। एजेंट निवेशकों को अलग-अलग लिंक या APK फाइल भेजते थे। इन्हें खोलने पर प्रत्येक निवेशक का अलग अकाउंट स्टेटस दिखाई देता था, जिसमें अमेरिकी डॉलर में बैलेंस और कथित कमाई प्रदर्शित होती थी।
निवेशकों को कथित तौर पर ‘FQL Scheme’ में ₹50,000 और ‘VG Scheme’ में करीब ₹1 लाख लगाने के लिए कहा जाता था। रकम ऑनलाइन जमा कराने के बजाय एजेंटों को नकद दी जाती थी। भुगतान के बाद लिंक या ऐप पर निवेशक के खाते में अमेरिकी डॉलर का बैलेंस दिखाई देता था। इससे निवेशकों को लगता था कि उनकी रकम किसी वास्तविक डिजिटल निवेश योजना में लगी है।
इसके बाद निवेशकों को ऑनलाइन तीन टास्क पूरे करने के लिए दिए जाते थे। इन्हें पूरा करने पर अतिरिक्त डॉलर कमीशन के रूप में मिलने का दावा किया जाता था। शुरुआती दौर में रकम निकालने वाले कुछ निवेशकों को एजेंटों द्वारा नकद भुगतान किया जाता था। निकासी के बाद ऐप पर खाते का बैलेंस कम दिखाई देता था।
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निवेशकों को कथित तौर पर ‘copy-trading’ मॉडल के तहत एक निश्चित अवधि में रकम दोगुनी होने का भरोसा दिया जाता था। अधिक निवेश करने वालों को ‘Level-Two Investor’ बनाने और ज्यादा ब्याज व रिटर्न देने का दावा किया जाता था। ऐसे निवेशकों को अतिरिक्त ऑनलाइन टास्क भी दिए जाते थे। अधिक लोगों को योजना में शामिल कराने पर बाइक, सोने के आभूषण और अन्य पुरस्कार देने का कथित लालच दिया जाता था।
निवेशकों के अनुसार, शुरुआत में कुछ लोगों को कमीशन और रिटर्न मिलने के कारण योजना पर भरोसा बढ़ा। इसके बाद यह व्यवस्था लोगों के बीच मौखिक प्रचार के जरिए तेजी से फैलती गई। पुलिस का कहना है कि कथित नेटवर्क कम से कम दो वर्षों से सक्रिय था और बाद में मदुरै से डिंडीगुल तक फैल गया।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh ने कहा कि इस तरह की निवेश धोखाधड़ी में जालसाज पहले छोटे भुगतान या शुरुआती रिटर्न के जरिए पीड़ितों का भरोसा जीतते हैं। इसके बाद उन्हें अधिक रकम लगाने और नए लोगों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता, कंपनी की पंजीकृत जानकारी और रिटर्न के दावों की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है।
सोशल मीडिया पर मामला फैलने के बाद कासमपट्टी में निवेशकों की भीड़ एजेंटों के घरों के बाहर जमा हो गई। रamesh और Vijay नामक एजेंटों के घरों में कथित तोड़फोड़ की गई। पुलिस जब रamesh को पूछताछ के लिए ले जाने लगी तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहन पर पत्थर और चप्पलें फेंकने का आरोप है। बाद में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने प्रभावित निवेशकों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया।
गिरफ्तार आरोपियों में ए कालननई, पी कालनई, के पुष्पम, ए पंचु, आर आनंदी और ए राजलक्ष्मी समेत अन्य लोग शामिल हैं। पुलिस अब कथित नेटवर्क के बैंक खातों, नकद लेनदेन, एजेंटों की भूमिका और निवेशकों से जुटाई गई रकम की जांच कर रही है। जांच में ऐप पर दिखाई जाने वाली डॉलर राशि और कथित निवेश रिटर्न की वास्तविकता भी खंगाली जा रही है।
