गोरखपुर में NASA प्रोजेक्ट के नाम पर 100 गुना रिटर्न का झांसा देकर करोड़ों की कथित ठगी मामले में आरोपी की पत्नी गिरफ्तार हुई है।

म्यूल खातों का जाल बिछाकर ₹100 करोड़ का अवैध लेनदेन! तीन शातिर गिरफ्तार, दुबई तक जुड़े तार

Roopa
By Roopa
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कानपुर। साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों के जरिए इधर-उधर कर ठिकाने लगाने वाले म्यूल अकाउंट नेटवर्क का कानपुर पुलिस ने खुलासा किया है। फजलगंज थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने लोगों के नाम पर सेविंग, करंट और मर्चेंट खाते खुलवाकर उनमें साइबर ठगी की रकम का अवैध लेनदेन करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग से जुड़े पोर्टल पर 29 शिकायतें दर्ज मिली हैं और जांच के दौरान करीब ₹23 करोड़ की संदिग्ध रकम फ्रीज कराई गई है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने पिछले दो वर्षों में करीब ₹100 करोड़ का अवैध लेनदेन किया।

पुलिस ने शनिवार को दादा नगर ढाल के पास से फतेहपुर के कल्याणपुर निवासी कपिल वर्मा उर्फ कपिल देव उर्फ शंटी को उसके दो कथित सहयोगियों साढ़ निवासी अभय प्रताप और रोहित सिंह उर्फ रुद्र के साथ गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में तीनों की भूमिका लोगों के बैंक खाते खुलवाने, उन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने और खातों में आने वाली ठगी की रकम को आगे स्थानांतरित कराने में सामने आई है।

जांच में इस नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश से बाहर और दुबई तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस लखनऊ के कथित सरगना ‘जोकर’, कानपुर के जगदीश, आगरा के केपी और उन्नाव के आशीष की तलाश कर रही है। पुलिस के अनुसार, शंटी और अभय के संपर्क लखनऊ के ‘जोकर’ से जुड़े बताए जा रहे हैं। वहीं, ‘जोकर’ का कथित संपर्क दुबई में बैठे सुल्तान मिर्जा से बताया जा रहा है, जिस पर करीब ₹3,200 करोड़ के साइबर अपराध से जुड़े मामले में आरोपी होने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस कड़ी की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है।

आरोपियों का तरीका लोगों को कमीशन का लालच देना या सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल करना था। पुलिस के मुताबिक, वे लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और मोबाइल नंबर लेकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। एक ही पहचान के आधार पर तीन तक खाते खुलवाने की बात जांच में सामने आई है। इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त रकम के लेनदेन के लिए किया जाता था।

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पुलिस की जांच के अनुसार, प्रत्येक खाते के जरिए करीब ₹10 लाख तक का संदिग्ध लेनदेन किया जाता था। सेविंग खाते के लिए खाताधारक को करीब ₹40 हजार और करंट खाते के लिए करीब ₹80 हजार तक कमीशन दिए जाने की बात सामने आई है। इसमें गिरोह के सदस्य अपना हिस्सा रखने के बाद खाताधारक को भी कुछ रकम देते थे। इस तरह कम समय में बड़ी संख्या में बैंक खाते जुटाकर उन्हें साइबर ठगी के नेटवर्क में इस्तेमाल किया जाता था।

मर्चेंट खातों का भी कथित तौर पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। पुलिस के मुताबिक, ऐसे खातों को बंद कराने की प्रक्रिया में कम से कम 10 दिन लगते थे। गिरोह इसी समय का फायदा उठाकर खातों में अधिक से अधिक संदिग्ध लेनदेन कराने की कोशिश करता था। जांच एजेंसियां अब इन खातों से जुड़े लेनदेन और रकम के अंतिम लाभार्थियों का पता लगाने में जुटी हैं।

मामले में बैंकिंग व्यवस्था के भीतर संभावित मिलीभगत की आशंका ने जांच को और गंभीर बना दिया है। पुलिस को कथित तौर पर साइबर ठगों और विभिन्न बैंकों के अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बीच बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली है। इनमें Bank of India, Canara Bank, DCB Bank, CSB Bank, Punjab National Bank, Axis Bank, HDFC Bank, IDFC, Overseas, Ujjivan Finance, Jana Small Finance Bank और Airtel Payments Bank समेत 23 बैंकों के अधिकारियों या कर्मचारियों की कथित बातचीत शामिल होने की बात कही गई है। पुलिस इन रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है।

गिरफ्तार आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन से जुड़ी सामग्री बरामद हुई है। पुलिस ने तीन लैपटॉप, 85 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, चार POS मशीन, 37 सिम कार्ड, 15 चेकबुक, 18 पासबुक, हिसाब-किताब के चार रजिस्टर, दो वर्क ऑर्डर की छायाप्रति, चार मुहरें और एक इंक पैड जब्त किया है। इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से खातों के संचालन और रकम के लेनदेन की कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर खाताधारकों, बैंकिंग संपर्कों, साइबर ठगों और विदेश में बैठे कथित संचालकों के बीच संबंधों की जानकारी जुटा रही है। जांच का अगला फोकस उन बैंक खातों और लेनदेन पर है, जिनके जरिए कथित साइबर ठगी की रकम अलग-अलग स्तरों पर पहुंचाई गई। अधिकारियों का मानना है कि नेटवर्क की पूरी जांच होने पर म्यूल खातों के जरिए चल रहे बड़े साइबर वित्तीय तंत्र और उससे जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

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