साइबर ठगी मामले में मुंबई हाई कोर्ट ने बैंक जवाबदेही तय करते हुए वरिष्ठ नागरिक के पक्ष में राहत देने वाला बड़ा आदेश सुनाया

₹5 के टोकन ने कराया लाखों का नुकसान’: गूगल पर मिला नंबर निकला फर्जी, 11.44 लाख की साइबर ठगी

Team The420
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कानपुर। डॉक्टर को दिखाने के लिए गूगल पर नंबर सर्च करना एक व्यक्ति के लिए भारी पड़ गया। मामूली ₹5 के टोकन भुगतान के बहाने साइबर ठग ने उसके दो बैंक खातों से ₹11.44 लाख उड़ा दिए। हैरानी की बात यह रही कि घटना के बाद पीड़ित करीब 12 महीनों तक मुकदमा दर्ज कराने के लिए भटकता रहा, जिसके बाद अब जाकर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

कौशलपुरी निवासी विष्णु मोहन ठक्कर के मुताबिक, 16 मार्च 2025 को तबीयत खराब होने पर उन्होंने सनातन धर्म चिकित्सालय में डॉक्टर को दिखाने के लिए संपर्क करने की कोशिश की। अस्पताल का आधिकारिक नंबर नहीं मिलने पर उन्होंने गूगल सर्च इंजन पर नंबर खोजा और उसी पर कॉल कर दी।

₹5 के ‘टोकन’ से शुरू हुआ ठगी का खेल

पीड़ित ने बताया कि कॉल रिसीव करने वाले व्यक्ति ने खुद को अस्पताल से जुड़ा बताते हुए कहा कि डॉक्टर अगले दिन उपलब्ध होंगे। साथ ही उसने यह भी सलाह दी कि यदि वह ₹5 का टोकन ऑनलाइन जमा कर देते हैं, तो उनका नंबर पहले लग जाएगा और उन्हें लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।

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भीड़ से बचने के लालच में आकर पीड़ित ने एटीएम कार्ड के जरिए ₹5 का ऑनलाइन भुगतान कर दिया। यही छोटी सी ट्रांजैक्शन साइबर ठग के लिए प्रवेश द्वार बन गई। इसके बाद ठग ने तकनीकी तरीके से पीड़ित के बैंक खातों तक पहुंच बनाई और कुछ ही समय में दो खातों से कुल ₹11.44 लाख की रकम निकाल ली।

घटना के बाद 12 महीने तक भटकता रहा पीड़ित

ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। वह लगातार करीब एक साल तक थानों और अधिकारियों के चक्कर लगाता रहा।

आखिरकार उच्च अधिकारियों से शिकायत के बाद नजीराबाद थाना में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने अब जांच शुरू कर दी है और साइबर ठग की पहचान व ट्रांजैक्शन ट्रेल खंगालने का प्रयास किया जा रहा है।

कैसे काम करते हैं ऐसे साइबर ठग

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर अपराधी किस तरह बेहद छोटे भुगतान या ‘वेरिफिकेशन’ के बहाने लोगों को जाल में फंसा लेते हैं। गूगल सर्च पर फर्जी नंबर डालना, खुद को किसी संस्थान का प्रतिनिधि बताना और फिर छोटी रकम का भुगतान करवाकर बैंकिंग डिटेल्स तक पहुंच बनाना—यह ठगी का नया और खतरनाक तरीका बनता जा रहा है।

ऐसे मामलों में कई बार यूजर अनजाने में अपने कार्ड या बैंक से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा कर देते हैं या किसी लिंक पर क्लिक कर देते हैं, जिससे ठग उनके खातों तक पहुंच बना लेते हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है, “साइबर अपराधी अब सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों को छोटी-छोटी ट्रांजैक्शन में फंसाते हैं। ₹5 या ₹10 का भुगतान महज एक बहाना होता है, असल मकसद यूजर की बैंकिंग एक्सेस हासिल करना होता है। लोगों को किसी भी अनजान नंबर या लिंक पर भुगतान करने से पहले पूरी तरह सत्यापन करना चाहिए।”

सावधानी ही बचाव

इस घटना के बाद विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी भी अस्पताल, बैंक या संस्था का नंबर केवल आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय स्रोत से ही लेना चाहिए। गूगल सर्च में दिख रहे हर नंबर पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।

साथ ही, छोटी रकम के नाम पर भी ऑनलाइन भुगतान करते समय सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन को सूचित करना चाहिए।

यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि साइबर अपराधी अब बेहद छोटे और साधारण तरीकों से भी लोगों को बड़े नुकसान पहुंचा रहे हैं, जहां एक छोटी सी लापरवाही लाखों की ठगी में बदल सकती है।

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