नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के झांसी में साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों के जरिए घुमाकर क्रिप्टोकरेंसी USDT में बदलने वाले कथित नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। प्रेमनगर पुलिस ने मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का कथित मास्टरमाइंड अरमान समेत तीन आरोपी अभी फरार हैं। जांच में 56 बैंक खातों के जरिए करीब ₹403 करोड़ की मनी ट्रेल सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, इन खातों से देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई साइबर ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर कर USDT में बदला जाता था।
पुलिस के अनुसार, समन्वय पोर्टल पर दर्ज 325 साइबर फ्रॉड शिकायतों की जांच के दौरान संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी सामने आई। इनमें झांसी से जुड़े 35 खाते भी शामिल हैं। जांच में कुल 56 बैंक खातों में साइबर ठगी की रकम पहुंचने की जानकारी मिली। पुलिस अब इन खातों से जुड़े लेनदेन और लाभार्थियों की कड़ियों की जांच कर रही है।
प्रेमनगर पुलिस ने दीपक वर्मा उर्फ सत्यम, अदनान हुसैन, आदिल हुसैन, जान पाल, अभिषेक चौधरी और अर्चित श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह में सभी सदस्यों की अलग-अलग भूमिका थी। सत्यम पर कथित तौर पर बैंक खातों से रकम निकालने और उसे USDT में बदलने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, एक डायरी और करीब 500 USDT से जुड़ी संपत्ति को सीज कराने की कार्रवाई की है।
जांच में अरमान को कथित नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया गया है। पुलिस के अनुसार, अरमान ने सत्यम, अदनान, आदिल, जान पाल, अभिषेक और अर्चित को नेटवर्क से जोड़ा था। उसके साथ अर्श और मोहम्मद फैज के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस इन तीनों की तलाश कर रही है। आरोप है कि गिरोह देशभर में सक्रिय साइबर ठगों से ठगी की रकम अपने नियंत्रण वाले खातों में मंगवाता था। इसके बाद रकम को कई खातों में घुमाकर USDT खरीदी जाती थी और कमीशन काटकर रकम आगे पहुंचाई जाती थी।
पुलिस की जांच में कथित आर्थिक बदलाव भी सामने आया है। अधिकारियों के मुताबिक, अरमान के पास करीब ₹20 करोड़ की संपत्ति होने का पता चला है। जांच में उसके बैंक खातों में लगातार रकम आने की जानकारी भी मिली है। पुलिस अब संपत्तियों, बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन के स्रोत की जांच कर रही है।
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मामले में 114 म्यूल बैंक खातों की भी पहचान की गई है। पुलिस के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया जाता था। ये खाते झांसी के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले लोगों के नाम पर खोले जाने की बात सामने आई है। जांचकर्ताओं का फोकस यह पता लगाने पर है कि खाताधारकों को किस तरह नेटवर्क में शामिल किया गया और उन्हें इसके बदले कितना कमीशन दिया जाता था।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, USDT जैसी स्थिर क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल अपराधी तेजी से धन को अलग-अलग डिजिटल वॉलेट में स्थानांतरित करने के लिए कर सकते हैं। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, ऐसे मामलों में असली चुनौती केवल एक बैंक खाते की पहचान करना नहीं, बल्कि पूरी मनी ट्रेल को जोड़ना होती है। म्यूल खातों, क्रिप्टो वॉलेट और अलग-अलग स्तरों पर रकम ट्रांसफर करने की व्यवस्था की जांच से नेटवर्क के वास्तविक संचालकों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
पुलिस अब इस नेटवर्क के उन साइबर ठगों की पहचान करने में जुटी है, जिनसे कथित तौर पर रकम प्राप्त की जाती थी। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या यही नेटवर्क दूसरे राज्यों में सक्रिय साइबर अपराध गिरोहों के लिए भी रकम खपाने का काम करता था।
पुलिस ने इससे पहले मई में झांसी में कथित चीनी गेमिंग सर्वर हैक कर रकम ट्रांसफर करने वाले एक अन्य गिरोह का भी खुलासा किया था। उस मामले में गिरफ्तार आरोपियों और मौजूदा नेटवर्क के सदस्यों के बीच संपर्क की भी जांच की जा रही है। दोनों मामलों में कई आरोपी एक ही क्षेत्र से जुड़े होने के कारण पुलिस को आपसी कनेक्शन की आशंका है।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल लेनदेन, क्रिप्टो वॉलेट और संपत्तियों की जांच के जरिए नेटवर्क की पूरी संरचना सामने लाने की कोशिश कर रही है। मामले में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं और आरोपियों की भूमिका अंतिम रूप से न्यायिक प्रक्रिया में तय होगी।
