जहानाबाद, 26 अगस्त। बिहार के जहानाबाद जिले में आधार निर्माण के नाम पर कथित बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। मखदुमपुर स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा के परिसर में संचालित आधार केंद्र पर एक व्यक्ति के अनधिकृत तरीके से काम करने और किसी अन्य की वैध आईडी क्लोन कर सिस्टम चलाने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। बैंक प्रबंधन ने संबंधित कंप्यूटर सिस्टम जब्त कर लिया है और अधिकृत एजेंसी को मामले की जानकारी देकर जांच शुरू कर दी है।
घटना उस समय सामने आई जब आधार केंद्र पर काम कर रहे एक कर्मी की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई और उससे कंप्यूटर सिस्टम को दोबारा लॉग-इन करने के लिए कहा गया। आरोप है कि इस पर वह नाराज हो गया और खुद को जज का भाई बताते हुए धमकाने लगा।
मामला बढ़ने के बाद बैंक शाखा प्रबंधन को इसकी जानकारी दी गई। शाखा प्रबंधक ने संबंधित ऑपरेटर को अपने कक्ष में बुलाकर सिस्टम को दोबारा लॉग-इन करने के लिए कहा। दबाव बढ़ने पर आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह किसी अन्य व्यक्ति की वैध आईडी का क्लोन बनाकर आधार संबंधी सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा था।
बताया गया है कि सच्चाई सामने आने के तुरंत बाद आरोपी बैंक परिसर से निकलकर फरार हो गया। उसके फरार होने के बाद बैंक प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आधार केंद्र में इस्तेमाल किए जा रहे कंप्यूटर सिस्टम को अपने कब्जे में ले लिया। अब इस सिस्टम की जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्लोन आईडी का इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था और उसके जरिए कितने आधार संबंधी कार्य किए गए।
बैंक प्रबंधन ने संबंधित एजेंसी ‘पेय इन सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड’ और बैंक के उच्च अधिकारियों को भी मामले की सूचना दे दी है। एजेंसी के संचालन से जुड़े जिम्मेदार व्यक्ति को भी तलब किया गया है। बैंक प्रबंधन का कहना है कि परिसर में कथित अवैध गतिविधि की जानकारी पहले से नहीं थी और मामले की जानकारी मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई की गई।
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आधार नामांकन और अपडेट से जुड़ी प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है। अधिकृत केंद्रों पर काम करने वाले ऑपरेटरों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत डिजिटल पहचान और प्रमाणीकरण व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही बायोमेट्रिक सत्यापन और निर्धारित स्थान से काम करने जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं भी लागू होती हैं।
ऐसे में किसी अन्य ऑपरेटर की वैध आईडी को कथित तौर पर क्लोन कर सिस्टम चलाने का मामला गंभीर सुरक्षा चिंता पैदा करता है। यदि किसी अनधिकृत व्यक्ति को आधार संबंधी सिस्टम तक पहुंच मिल जाती है, तो उसके जरिए संवेदनशील नागरिक जानकारी से छेड़छाड़ या गलत तरीके से डेटा दर्ज किए जाने का जोखिम बढ़ सकता है।
जांच एजेंसियों के सामने अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित क्लोन आईडी किसकी थी, उसे किस तरीके से हासिल किया गया और आरोपी ने सिस्टम तक पहुंच कैसे बनाई। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि उसके जरिए कितने लोगों के आधार नामांकन या अपडेट से संबंधित काम किए गए और क्या किसी नागरिक के डेटा में अनधिकृत बदलाव हुआ।
बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी के फरार होने के कारण उसकी भूमिका और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने के प्रयास जारी हैं।
यह घटना आधार जैसी संवेदनशील पहचान प्रणाली में ऑपरेटर स्तर की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े करती है। बैंक परिसर में कथित फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अब यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि अधिकृत एजेंसी की ओर से ऑपरेटरों की पहचान, लॉगिन क्रेडेंशियल और सिस्टम इस्तेमाल की निगरानी कितनी प्रभावी तरीके से की जा रही थी।
