Telegram पर घर बैठे कमाई का ऑफर देकर पहले छोटे भुगतान से जीता भरोसा; बाद में NEFT, RTGS, PhonePe और नकद के जरिए किस्तों में ₹37.61 लाख ट्रांसफर कराए, पीड़ित को सिर्फ ₹61,143 लौटाए

होटल रेटिंग के नाम पर जालसाजों का जाल, जबलपुर के युवक से ₹37 लाख की ऑनलाइन ठगी

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By Roopa
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जबलपुर, 26 अगस्त। मध्य प्रदेश के जबलपुर में ऑनलाइन होटल रेटिंग के जरिए घर बैठे कमाई का झांसा देकर 29 वर्षीय युवक से ₹37 लाख से अधिक की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। अधारताल थाना क्षेत्र के जागृति नगर अमखेरा निवासी विक्रांत साहू को जालसाजों ने Telegram और एक मोबाइल ऐप के जरिए होटल रेटिंग का काम देने का दावा किया। शुरुआती चरण में छोटे भुगतान और मुनाफे का लालच देकर भरोसा कायम किया गया, जिसके बाद उससे कई किस्तों में बड़ी रकम ट्रांसफर कराई गई।

पुलिस के अनुसार, ठगी की शुरुआत 8 जनवरी 2025 को हुई। विक्रांत को Telegram पर ‘अदिति रियांश’ नाम से एक संदेश मिला था। इसमें ‘सीक्रेट एस्केप्स’ के माध्यम से होटलों को रेटिंग देकर मुनाफा कमाने का प्रस्ताव दिया गया। शुरुआत में जालसाजों ने रेटिंग के बदले ₹1,024 भेजे। इसके बाद ₹10,000 जमा कराने पर ₹17,546 और ₹20,960 के निवेश पर ₹42,573 वापस भेजे गए। इन शुरुआती भुगतानों से पीड़ित को यह विश्वास हो गया कि ऑनलाइन काम वास्तविक है और इससे मुनाफा कमाया जा सकता है।

इसके बाद ठगी का दायरा तेजी से बढ़ा। 11 से 15 जनवरी 2025 के बीच विक्रांत ने NEFT, RTGS और PhonePe के जरिए अलग-अलग किस्तों में बड़ी रकम ट्रांसफर की। पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, उसने अपने भारतीय स्टेट बैंक की मिलौनीगंज शाखा के खाते के अलावा पत्नी के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया खाते से ₹99,000 भी ट्रांसफर किए।

ठगों की मांग पूरी करने के लिए पीड़ित ने अपने परिचितों के खातों का भी इस्तेमाल किया। साथी शुभम विश्वकर्मा से ₹84,787 और परिचित अंकिता गुप्ता के इंडियन बैंक खाते से कुल ₹17 लाख भेजे गए। इसके अलावा विक्रांत ने मदनमहल और आईसीआईसीआई बैंक की शाखाओं में जाकर कथित तौर पर बड़ी रकम नकद जमा की।

जालसाजों ने इसके बाद भी पैसे की मांग बंद नहीं की। शिकायत के मुताबिक, मार्च 2026 तक अलग-अलग बैंक खातों और PhonePe के माध्यम से उससे बार-बार ₹40,000 से ₹50,000 की किस्तों में रकम जमा कराई जाती रही। इस दौरान ठगों ने कुल ₹37,61,566 हासिल किए, लेकिन केवल ₹61,143 वापस किए।

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जब लगातार भुगतान के बावजूद अपेक्षित रिटर्न नहीं मिला और रकम वापस करने के लिए नई-नई मांगें सामने आती रहीं, तब विक्रांत को ठगी का एहसास हुआ। शिकायत के मुताबिक, उसे कुल ₹37,00,423 का नुकसान हुआ है। इसके बाद उसने 25 अगस्त की रात अधारताल थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जांच एजेंसियां अब Telegram खातों, मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। अलग-अलग खातों में भेजी गई रकम का ट्रेल तैयार कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पैसा किन लोगों तक पहुंचा और इसके पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह सक्रिय है या नहीं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, इस तरह की ठगी में साइबर अपराधी पहले छोटे भुगतान या सीमित मुनाफे के जरिए पीड़ित का भरोसा हासिल करते हैं। इसके बाद उसे अधिक कमाई का लालच देकर लगातार निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाता है। जैसे ही पीड़ित बड़ी रकम लगा देता है, उससे अलग-अलग शुल्क, टैक्स या निकासी के नाम पर और पैसे मांगे जाते हैं। ऐसे मामलों में शुरुआती भुगतान को कमाई का प्रमाण मानने के बजाय लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि करना जरूरी है।

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, होटल रेटिंग, ऑनलाइन टास्क, पार्ट-टाइम नौकरी और घर बैठे कमाई के नाम पर आने वाले अनजान संदेशों में सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी प्लेटफॉर्म पर रकम जमा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और कंपनी की वास्तविक पहचान की जांच जरूरी है। पुलिस फिलहाल बैंक लेनदेन और Telegram गतिविधियों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

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