Semicon 2.0 में फैब्रिकेशन से आगे चिप डिजाइन, उपकरण, सामग्री, एडवांस पैकेजिंग और रिसर्च पर जोर; अगले वर्षों में एक लाख डिजाइन इंजीनियर तैयार करने की योजना

सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता की नई दौड़, भारत का लक्ष्य 7 से 3 नैनोमीटर तकनीक

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By Roopa
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नई दिल्ली। भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी अगली बड़ी छलांग की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने अगले आठ वर्षों में 7 नैनोमीटर से 3 नैनोमीटर तक की उन्नत चिप तकनीक विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने Semicon 2.0 का रोडमैप सामने रखते हुए स्पष्ट किया कि भारत का अगला सेमीकंडक्टर मिशन केवल चिप फैब्रिकेशन और पैकेजिंग तक सीमित नहीं रहेगा। चिप डिजाइन, विनिर्माण उपकरण, विशेष सामग्री, एडवांस पैकेजिंग, रिसर्च और कुशल प्रतिभाओं का विकास भी इस रणनीति का हिस्सा होगा।

भारत में फिलहाल 40 नैनोमीटर सेमीकंडक्टर तकनीक उपलब्ध है। सरकार अब अधिक उन्नत प्रोसेस नोड की ओर बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए तकनीकी क्षमता विकसित करने के साथ-साथ विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया जाएगा। सरकार आने वाले वर्षों में एक लाख सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने की योजना बना रही है। दीर्घकालिक लक्ष्य भारत को वैश्विक चिप डिजाइन का प्रमुख केंद्र बनाना है।

Semicon 2.0 में चिप डिजाइन को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसके तहत कंप्यूटिंग, मेमोरी, रेडियो फ्रीक्वेंसी, पावर, नेटवर्किंग और सेंसर जैसे छह प्रमुख क्षेत्रों में डिजाइन क्षमता विकसित करने की योजना है। सरकार सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के घरेलू उत्पादन को भी प्रोत्साहित करेगी। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करने के साथ देश में चिप निर्माण के लिए जरूरी पूरा औद्योगिक ढांचा तैयार करना है।

सेमीकंडक्टर सामग्री को भी इस मिशन का अहम हिस्सा बनाया गया है। वैष्णव के अनुसार, चिप निर्माण में करीब 150 से 500 प्रकार के विशेष रसायनों, गैसों और अन्य सामग्रियों की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में घरेलू स्तर पर इन सामग्रियों का उत्पादन बढ़ाना जरूरी है। सरकार इस क्षेत्र में निवेश और विनिर्माण को प्रोत्साहन देकर सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना चाहती है।

पहले चरण के Semicon India Programme के तहत पिछले पांच वर्षों में करीब ₹1.77 लाख करोड़ के कुल निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर इकाइयों को मंजूरी दी गई है। इनमें से तीन इकाइयां अब व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं। मंत्री के अनुसार, Micron ने 28 फरवरी 2026 को, Kaynes ने 31 मार्च और CG Power ने 4 जुलाई को वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया। अन्य स्वीकृत परियोजनाओं पर निर्माण कार्य जारी है।

सरकार ने 2021 में करीब ₹88,700 करोड़ के शुरुआती परिव्यय के साथ Semicon India Programme शुरू किया था। पहले चरण का मुख्य उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर फैब और पैकेजिंग सुविधाओं की स्थापना करना था। अब Semicon 2.0 के जरिए सरकार पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें फैब के साथ डिजाइन, सामग्री, उपकरण, पैकेजिंग और अनुसंधान क्षमताओं को एक साथ मजबूत करने पर जोर रहेगा।

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भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक कंपनियों की रुचि भी बढ़ी है। सरकार के अनुसार, Semicon India Programme से अलग अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत में ₹26,600 करोड़ से अधिक का निवेश कर रही हैं। सरकार को उम्मीद है कि देश का तेजी से बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र घरेलू सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए बड़ा बाजार तैयार करेगा।

चिप डिजाइन के क्षेत्र में भी सरकार ने आधार तैयार किया है। Chips to Startup Programme के तहत 320 से अधिक विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स को Electronic Design Automation यानी EDA टूल उपलब्ध कराए गए हैं। इन संसाधनों का इस्तेमाल करके भारतीय छात्रों ने 40 चिप डिजाइन तैयार किए, जिन्हें पिछले Semicon India कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने प्रस्तुत किया गया था।

कुशल इंजीनियरों की संख्या बढ़ाने की योजना भी इसी रणनीति का हिस्सा है। सरकार ने पहले 10 वर्षों में 85,000 प्रशिक्षित सेमीकंडक्टर इंजीनियर तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। अब Semicon 2.0 के तहत इसे बढ़ाकर एक लाख डिजाइन इंजीनियर करने की तैयारी है। वैष्णव के अनुसार, भारत में काम कर रहे इंजीनियर वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के लिए 2 नैनोमीटर और 3 नैनोमीटर प्रोसेस नोड पर आधारित उन्नत चिप डिजाइन में भी योगदान दे रहे हैं।

Design Linked Incentive योजना के तहत 105 स्टार्टअप्स को समर्थन दिया गया है। इनमें 24 स्टार्टअप्स को करीब ₹7,362 करोड़ की वित्तीय सहायता मिली है। इनमें से 15 स्टार्टअप्स ने बाद में करीब ₹10,515 करोड़ का वेंचर कैपिटल निवेश जुटाया। इससे संकेत मिलता है कि सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में घरेलू स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र इस पूरी रणनीति का आधार बन रहा है। देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹11.5 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ₹4.26 लाख करोड़ से ज्यादा पहुंच गया है। 300 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकाइयों से करीब 25 लाख रोजगार जुड़े हैं। मोबाइल फोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन चुका है।

हालांकि 3 नैनोमीटर तकनीक तक पहुंचना आसान नहीं होगा। दुनिया की अग्रणी सेमीकंडक्टर कंपनियां पहले ही 5 नैनोमीटर, 3 नैनोमीटर और 2 नैनोमीटर तकनीक पर आगे बढ़ चुकी हैं। भारत के लिए चुनौती केवल उन्नत चिप बनाने की तकनीक हासिल करना नहीं, बल्कि उसके लिए जरूरी उपकरण, सामग्री, डिजाइन क्षमता, प्रतिभा और अनुसंधान ढांचे को एक साथ विकसित करना है।

Semicon 2.0 इसी व्यापक रणनीति का अगला चरण है। यदि भारत अगले आठ वर्षों में 7 से 3 नैनोमीटर तकनीक तक पहुंचने में सफल रहता है, तो यह देश को केवल इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और चिप पैकेजिंग के केंद्र से आगे ले जाकर उन्नत सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण की वैश्विक दौड़ में अधिक मजबूत स्थिति दे सकता है।

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