मुजफ्फरनगर/बिजनौर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख कारोबारी समूह Bindals Group के ठिकानों पर आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई में कर चोरी के व्यापक नेटवर्क का खुलासा हुआ है। 18 मार्च से शुरू हुई इस छापेमारी में ₹3 करोड़ से अधिक की अघोषित नकदी और करीब ₹20 करोड़ मूल्य के स्वर्ण आभूषण बरामद किए गए हैं। इसके अलावा करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन और अचल संपत्तियों से जुड़े अहम दस्तावेज भी जांच एजेंसियों के हाथ लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, मेरठ इन्वेस्टिगेशन विंग की टीम ने गोपनीय तरीके से एक साथ कई स्थानों पर दबिश दी। मुजफ्फरनगर स्थित आवासीय परिसरों, पेपर मिलों और बिजनौर की शुगर यूनिट समेत दिल्ली के ठिकानों को भी जांच के दायरे में लिया गया। कार्रवाई लगातार चार दिनों तक चली और शनिवार शाम करीब छह बजे टीम ने जांच पूरी की।
84 घंटे तक फैक्ट्री में डेरा, गहन जांच
नूरपुर स्थित Bindal Sugar and Distillery यूनिट में जांच टीम ने करीब 84 घंटे तक डेरा डाले रखा। बुधवार सुबह छह गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंची टीम शनिवार शाम तक दस्तावेजों और लेन-देन की बारीकी से जांच करती रही।
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इस दौरान मिल प्रबंधन से जुड़े प्रमुख अधिकारी भी टीम के साथ मौजूद रहे और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। छापेमारी के दौरान उत्पादन, खरीद और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की गई।
फर्जी खरीद दिखाकर मुनाफा कम करने की कोशिश
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि समूह ने कागज निर्माण के क्षेत्र में ₹50 करोड़ से अधिक की फर्जी खरीद दिखाकर अपने मुनाफे को कम दर्शाने की कोशिश की। इस तरह के फर्जी खर्च दिखाकर टैक्स देनदारी घटाने का प्रयास किया गया।
इसके अलावा गन्ने की खोई (बैगास) और अन्य कच्चे माल की खरीद में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियां अब इन लेन-देन के स्रोत और संबंधित कंपनियों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी जब्त
छापेमारी के दौरान टीम को 50 से अधिक अचल संपत्तियों के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इन संपत्तियों की बाजार कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि इन संपत्तियों में निवेश के लिए इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत क्या है और क्या यह घोषित आय के अनुरूप है या नहीं।
अधिकारियों का मानना है कि इन दस्तावेजों से समूह के वित्तीय लेन-देन और निवेश पैटर्न की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
कई ठिकानों पर एक साथ दबिश
कार्रवाई के तहत मुजफ्फरनगर की छह प्रमुख पेपर मिलों—बिंदल्स डुप्लेक्स, अग्रवाल डुप्लेक्स बोर्ड मिल्स, टिहरी पल्प, शाकुंभरी पल्प और बिंदल इंडस्ट्रीज—को जांच के दायरे में लिया गया। इसके अलावा बिजनौर स्थित शुगर यूनिट और दिल्ली के ठिकानों पर भी एक साथ छापेमारी की गई।
इस समन्वित कार्रवाई का उद्देश्य समूह के पूरे व्यावसायिक नेटवर्क और वित्तीय गतिविधियों की व्यापक जांच करना था।
जांच आगे भी जारी रहने के संकेत
सूत्रों के मुताबिक, बरामद नकदी, आभूषण और दस्तावेजों के आधार पर आगे की जांच जारी रहेगी। संबंधित खातों, लेन-देन और संपत्तियों की गहन जांच की जाएगी, जिससे कर चोरी के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।
यह कार्रवाई एक बार फिर दर्शाती है कि कर चोरी के मामलों में विभाग अब बड़े पैमाने पर सख्ती बरत रहा है और जटिल वित्तीय संरचनाओं को भी खंगालने से पीछे नहीं हट रहा।
व्यापारिक जगत के लिए सख्त संदेश
इस छापेमारी को व्यापारिक समुदाय के लिए एक स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि कर नियमों की अनदेखी अब भारी पड़ सकती है। फर्जी खरीद, अघोषित संपत्तियों और संदिग्ध लेन-देन जैसे मामलों पर विभाग की पैनी नजर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से न केवल कर अनुपालन बढ़ेगा, बल्कि व्यापारिक पारदर्शिता भी मजबूत होगी।
