35 ATM कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 17 SIM और 18 मोबाइल बरामद; म्यूल खातों में साइबर ठगी की रकम मंगाकर UPI से ट्रांसफर और ATM से निकासी का आरोप, बिहार तक फैले नेटवर्क की जांच

हरिद्वार में ₹2.75 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़, पांच गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
6 Min Read

हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार में पुलिस ने कथित अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के जरिए ₹2.75 करोड़ से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेनदेन का पता चला है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 35 ATM कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 17 SIM कार्ड, 18 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और ₹37,500 नकद बरामद किए हैं।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ₹2.75 करोड़ की राशि आरोपियों के पास से बरामद नकदी नहीं है, बल्कि प्रारंभिक जांच के दौरान सामने आए संदिग्ध बैंक लेनदेन का कुल मूल्य है। पुलिस अब डिजिटल फोरेंसिक जांच और बैंक रिकॉर्ड के जरिए कथित साइबर ठगी की वास्तविक रकम का पता लगाने में जुटी है।

वाहन चेकिंग के दौरान मिली अहम सुराग

पुलिस के मुताबिक, 25 अगस्त की रात श्यामपुर थाना क्षेत्र में वाहन चेकिंग के दौरान संदिग्ध साइबर गतिविधियों से जुड़े लोगों के बारे में सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर सज्जनपुर पीली के पास सफेद रंग की Swift कार पर नजर रखी गई।

रसीयाबाद सिंगल लाइन प्वाइंट पर पुलिस ने चिड़ियापुर की ओर से आ रही कार को रोककर तलाशी ली। कार में पांच लोग सवार थे। तलाशी के दौरान एक बैग से बड़ी संख्या में ATM कार्ड, बैंक पासबुक, SIM कार्ड, मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद हुए।

पुलिस के अनुसार, बरामद बैंक पासबुक Central Bank of India, Indian Overseas Bank, State Bank of India, UCO Bank, Bank of Maharashtra, Indian Bank और Nainital Bank से जुड़े खातों की थीं।

कई शहरों में खुले थे बैंक खाते

जांच में सामने आया कि इन बैंक खातों को हरिद्वार, कनखल, ऋषिकेश, देहरादून और आसपास के इलाकों में खोला या संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने जब आरोपियों के मोबाइल फोन की प्रारंभिक जांच की तो WhatsApp चैट में कथित तौर पर बैंक खाता नंबर, खाताधारकों के नाम, QR कोड और लेनदेन से जुड़ी जानकारी मिली।

मोबाइल फोन की गैलरी में बैंक पासबुक और अन्य बैंकिंग दस्तावेजों की तस्वीरें भी मिलीं। पुलिस अब इन डिजिटल साक्ष्यों को बैंक रिकॉर्ड से मिलाकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खातों का इस्तेमाल किन साइबर अपराधों से जुड़ी रकम के लिए किया गया।

खातों और SIM का इस्तेमाल करने का आरोप

पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे अलग-अलग लोगों से बैंक खाते, पासबुक, ATM कार्ड और SIM कार्ड हासिल करते थे। आरोप है कि इन खातों के PIN और UPI की पहुंच भी उनके पास रहती थी।

जांच के अनुसार, साइबर ठगी से हासिल रकम पहले इन कथित ‘म्यूल अकाउंट’ में भेजी जाती थी। इसके बाद रकम को UPI के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर किया जाता और ATM से निकाला जाता था। कथित तौर पर निकाली गई रकम को नेटवर्क में शामिल लोगों के बीच कमीशन के आधार पर बांटा जाता था।

पुलिस के मुताबिक, कुछ खाताधारकों को प्रत्येक बैंक खाते के लिए ₹8,000 तक दिए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद खाते की जानकारी, SIM और अन्य एक्सेस डिटेल्स बिहार के नालंदा में मौजूद कथित संचालकों तक भेजी जाती थीं।

Algoritha Security Launches ‘Make in India’ Cyber Lab for Educational Institutions

ठगी की रकम पर 10 प्रतिशत कमीशन

पुलिस की प्रारंभिक जांच में आरोप है कि गिरफ्तार किए गए लोगों को साइबर ठगी से प्राप्त रकम का करीब 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था। नेटवर्क के अन्य सदस्य कथित तौर पर रकम ट्रांसफर करने और ATM से नकदी निकालने का काम संभालते थे।

पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क में गिरफ्तार पांच लोगों के अलावा भी कई अन्य लोग शामिल हो सकते हैं। जांच अब उन खाताधारकों तक पहुंचने पर केंद्रित है, जिनके नाम पर खाते और SIM कार्ड इस्तेमाल किए गए।

बिहार तक पहुंची जांच

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान Krishna Pandey, उम्र 24 वर्ष, निवासी Nalanda; Niranjan Kumar, 24, और Chandramani Kumar, 24, दोनों निवासी Nawada; तथा Haridwar निवासी Sunny, 21, और Chandan Pandey, 20 के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, तीन आरोपी बिहार और दो हरिद्वार के रहने वाले हैं। जांच टीम अब बिहार जाकर उन लोगों की पहचान करने की तैयारी कर रही है, जिनसे कथित तौर पर बैंक खाते और SIM कार्ड लिए गए या जिन्हें डिजिटल एक्सेस भेजा गया।

बैंक रिकॉर्ड से खुलेगा ठगी का पूरा नेटवर्क

पुलिस बैंक स्टेटमेंट, KYC दस्तावेज, खाते की लेनदेन हिस्ट्री और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर रही है। मोबाइल फोन और लैपटॉप से मिले WhatsApp चैट, QR कोड, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य डिजिटल सामग्री की भी जांच की जा रही है।

फोरेंसिक विश्लेषण से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि ₹2.75 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन में कितनी रकम वास्तव में साइबर ठगी से जुड़ी थी और उसे किन-किन खातों के जरिए आगे भेजा गया। पुलिस को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और साइबर ठगी से जुड़े मामलों का भी खुलासा हो सकता है।

हमसे जुड़ें

Share This Article