गोरखपुर। ऑनलाइन निवेश और क्रिप्टो करेंसी में भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी करने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी बैंक खातों के जरिए करीब ₹100 करोड़ (एक अरब) का लेन-देन कर सैकड़ों लोगों को ठगा। गिरोह ने फॉरेक्स ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों को झांसा देकर यह पूरा नेटवर्क खड़ा किया था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजीत यादव (आंबेडकरनगर), पारतेश सिंह (बलिया), अजय कुमार और गणेश साहनी (कुशीनगर) के रूप में हुई है। वहीं, इस मामले में दो अन्य आरोपी—अजय (नोएडा) और ऋषभ (शाहजहांपुर)—फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है।
होटल से चल रहा था ठगी का नेटवर्क
मामले का खुलासा 20 मार्च को उस समय हुआ, जब रामगढ़ताल क्षेत्र में एक होटल में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। बताया गया कि कुछ लोग फॉरेक्स ट्रेडिंग और ऑनलाइन गेमिंग में निवेश के नाम पर लोगों को फंसा रहे हैं और भारी मुनाफे का लालच देकर रकम वसूल रहे हैं।
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सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने होटल में छापा मारकर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मौके से लैपटॉप, कई मोबाइल फोन, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और विभिन्न खातों की यूजर आईडी व पासवर्ड से संबंधित डिटेल बरामद हुई है।
फर्जी खातों के जरिए करोड़ों का लेन-देन
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी और किराए पर लिए गए बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। लोगों से निवेश के नाम पर बड़ी रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। एक खाता बंद या फ्रीज होने पर गिरोह दूसरे व्यक्ति के नाम पर नया खाता खुलवा लेता था और उसकी यूजर आईडी अपने पास रखकर उसी के जरिए ठगी का सिलसिला जारी रखता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई ऐसे खाते चिन्हित हुए हैं, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी और जिन्हें अलग-अलग जिलों की साइबर पुलिस पहले ही फ्रीज कर चुकी है।
क्रिप्टो ट्रेडिंग से दिखाते थे फर्जी मुनाफा
गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित थी। निवेशकों से जुटाई गई रकम को क्रिप्टो करेंसी में ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद निवेशकों को फर्जी मुनाफे के आंकड़े दिखाकर उन्हें और पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था।
जब कोई निवेशक अपनी रकम वापस मांगता, तो आरोपी बहाने बनाकर टालमटोल करते और अंततः संपर्क तोड़ लेते थे। इस तरह सैकड़ों लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया।
अवैध निवेश योजनाओं का संचालन
जांच अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह अविनियमित निक्षेप योजनाएं चला रहा था, जो पूरी तरह गैरकानूनी हैं। बिना किसी वैध अनुमति के लोगों से पैसा जुटाना और उसे निवेश के नाम पर घुमाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
इस मामले में और भी पीड़ितों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और विभिन्न राज्यों में अपने नेटवर्क का विस्तार कर चुका था।
जांच का दायरा बढ़ा, कई और नाम आने की संभावना
पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल डिवाइस और ट्रांजैक्शन ट्रेल की गहन जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कुल ठगी की रकम कितनी है और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर इस गिरोह से जुड़े कई अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है, “क्रिप्टो और फॉरेक्स निवेश के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग और फर्जी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर लोगों को आकर्षक रिटर्न का लालच देते हैं। निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की वैधता और जोखिम को समझना बेहद जरूरी है।”
यह मामला एक बार फिर संकेत देता है कि तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ साइबर ठगी के तरीके भी जटिल होते जा रहे हैं, जहां सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
