अमेरिका-कनाडा के लोगों को पॉप-अप और फर्जी सपोर्ट नंबर से बनाया निशाना; चंडीगढ़-मोहाली, पंजाब और मध्य प्रदेश में आठ ठिकानों पर छापेमारी, ₹50 लाख का बैंक बैलेंस फ्रीज

विदेशियों को फर्जी टेक सपोर्ट के नाम पर ठगी, ED की बड़ी कार्रवाई; ₹20 लाख नकद जब्त

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By Roopa
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चंडीगढ़: अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को फर्जी टेक्निकल सपोर्ट कॉल सेंटर के जरिए कथित तौर पर ठगने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के चंडीगढ़ जोनल कार्यालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत चंडीगढ़-मोहाली, पंजाब और मध्य प्रदेश में आठ ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान करीब ₹20 लाख की बेहिसाबी नकदी जब्त की गई। इसके अलावा जांच से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी कब्जे में लिए गए हैं। एजेंसी ने करीब ₹50 लाख के बैंक बैलेंस को फ्रीज करने की कार्रवाई भी की है।

ED के मुताबिक, तलाशी विजय राज कपूरिया, वरिंदर राज, मैसर्स इन्फिनम एंटरप्राइजेज एलएलपी और उनसे जुड़े अन्य व्यक्तियों तथा संस्थाओं से संबंधित परिसरों पर की गई। जांच एजेंसी अब कथित ठगी से हासिल रकम के स्रोत, उसके लेनदेन और विदेशों में भेजे गए धन की कड़ियों की जांच कर रही है।

यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच पंजाब के एसएएस नगर स्थित सोहाना थाने में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। FIR में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत कथित अपराधों का उल्लेख किया गया था। मामला मोहाली के सेक्टर-108 स्थित एमार के प्लॉट नंबर-29 से संचालित बताए गए फर्जी कॉल सेंटर से जुड़ा है। पंजाब पुलिस इस मामले में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

फर्जी पॉप-अप और सपोर्ट नंबर से बनाया जाता था जाल

ED की जांच के अनुसार, आरोपियों ने विदेशों में मौजूद सहयोगियों के साथ मिलकर अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को निशाना बनाया। कथित तौर पर पीड़ितों के कंप्यूटर, प्रिंटर, आईपैड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में तकनीकी समस्या होने का भ्रम पैदा करने वाले फर्जी पॉप-अप और लिंक भेजे जाते थे।

इन पॉप-अप में टोल-फ्री नंबर प्रदर्शित किए जाते थे। लोगों को इन नंबरों पर कॉल करने के लिए प्रेरित किया जाता था। इसके बाद कथित कॉल सेंटर के ऑपरेटर पहले से तैयार स्क्रिप्ट के जरिए ग्राहकों से बातचीत करते थे।

आरोप है कि ऑपरेटर पीड़ितों को उनके कंप्यूटर या अन्य डिवाइस का रिमोट एक्सेस देने के लिए तैयार करते थे। इसके बाद उन्हें अनावश्यक या काल्पनिक तकनीकी सेवाओं के लिए भुगतान करने को कहा जाता था। इसी तरीके से कथित तौर पर विदेशों में बैठे लोगों से रकम वसूली गई।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर Apple और Microsoft जैसे प्रमुख तकनीकी ब्रांडों के सपोर्ट सिस्टम से जुड़े होने का भ्रम भी पैदा करते थे। इससे पीड़ितों को कॉल सेंटर की विश्वसनीयता पर भरोसा करने के लिए प्रभावित किया जाता था।

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PayPal, Stripe और क्रिप्टो के जरिए रकम का कथित लेनदेन

ED की जांच में कथित ठगी की रकम के लेनदेन के कई माध्यम सामने आए हैं। एजेंसी के मुताबिक, रकम PayPal, Stripe, बैंकिंग चैनलों, Bitcoin और अन्य क्रिप्टोकरेंसी के अलावा कथित हवाला नेटवर्क के माध्यम से प्राप्त और ट्रांसफर की गई।

जांच में यह भी सामने आया कि कथित ठगी से प्राप्त रकम को अमेरिका समेत विभिन्न देशों में स्थित विदेशी संस्थाओं के बैंक खातों में भेजा गया। PMLA जांच के दौरान मैसर्स इन्फिनम एंटरप्राइजेज एलएलपी के बैंक खाते में कई विदेशी संस्थाओं से रकम आने की जानकारी मिली।

ED ने इन विदेशी संस्थाओं को कथित तौर पर संदिग्ध डमी या शेल इकाइयों के रूप में चिन्हित किया है। एजेंसी अब इन संस्थाओं, उनके बैंक खातों और भारत से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।

तलाशी के दौरान मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों से कथित कॉल सेंटर संचालन, विदेशी संपर्कों और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी मिलने की उम्मीद है। ED अब जब्त सामग्री का विश्लेषण कर कथित मनी ट्रेल और इसमें शामिल अन्य लोगों तथा संस्थाओं की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच से सामने आने वाले वित्तीय और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

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