नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन ठगी ने आम नागरिकों और छोटे निवेशकों की वित्तीय सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी है। संसद में राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को बताया कि 2023 से 2025 के बीच कुल ₹1,716.6 करोड़ का नुकसान हुआ, लेकिन केवल ₹174.8 करोड़ ही वसूला जा सका। ये आंकड़े दिल्ली में डिजिटल फ्रॉड की लगातार बढ़ती घटनाओं को दर्शाते हैं।
राय ने कहा कि 2023 में 1,475 मामले, 2024 में 1,707 और 2025 में 3,800 मामले डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन ठगी के दर्ज किए गए। उन्होंने यह भी बताया कि समय पर शिकायत दर्ज कराना वसूली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बढ़ती डिजिटल फ्रॉड घटनाओं को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कई ठोस कदम उठाए हैं। राजधानी में 15 साइबर थाने और 2 साइबर सेल काम कर रहे हैं, जिनमें कुल 40 इंस्पेक्टर, 115 सब-इंस्पेक्टर, 64 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर, 371 हेड कॉन्स्टेबल और 323 कॉन्स्टेबल तैनात हैं। यह विशेष टीम डिजिटल अपराधों की जांच और तत्काल समाधान के लिए लगातार काम कर रही है।
पुलिस ने ‘1930’ हेल्पलाइन का विस्तार किया है और डेल्ही साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (DCFMC) की स्थापना की है। यहाँ 14 बैंकों के नोडल अधिकारी सीधे पुलिस के साथ काम करते हैं और ठगी गई राशि को तुरंत फ्रीज कर सकते हैं। इसके अलावा, आई4सी (Indian Cyber Crime Coordination Centre) की एक विशेष टीम बैंकों के साथ वास्तविक समय में जानकारी साझा करती है, जिससे अपराधियों की पकड़ और राशि की वसूली में मदद मिलती है।
एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है। अब ₹1 लाख से अधिक की ठगी के मामलों में ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है, जिससे कानूनी कार्रवाई तेज हो रही है।
साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों में क्लास 9 से 11 तक के छात्रों को साइबर वॉरियर डाइवर्सिटी प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डिजिटल कंटेंट के माध्यम से लोगों को साइबर बुलिंग, ऑनलाइन स्टॉकिंग और डिजिटल ठगी के मामलों के प्रति शिक्षित किया जा रहा है।
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नौकरी और निवेश से जुड़ी ठगी के खिलाफ विशेष जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, हर महीने के पहले बुधवार को स्कूलों, मॉल और आवासीय क्षेत्रों में ‘जागरूकता दिवस’ मनाया जाता है, जिसमें नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने की जानकारी दी जाती है।
राज्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल फ्रॉड का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय पर शिकायत और बैंक सहयोग से ही पीड़ितों की राशि की वसूली सुनिश्चित की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान फ्रॉड में तेजी से वृद्धि के पीछे सोशल इंजीनियरिंग, नकली निवेश स्कीम और फर्जी वेबसाइट्स मुख्य कारण हैं। वे आम लोगों को सतर्क रहने और लेन-देन की पुष्टि करने की सलाह देते हैं, जिससे ठगी के मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।
रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि तकनीकी दक्षता और जागरूकता ही डिजिटल अपराधों से निपटने का सबसे मजबूत हथियार है। दिल्ली पुलिस और बैंकों का संयुक्त प्रयास समय पर शिकायत और ठगी गई राशि की रोकथाम में अहम साबित हो रहा है।
राजधानी में डिजिटल फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं के बीच यह स्पष्ट है कि सरकारी और बैंकिंग प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों की सतर्कता ही इस खतरे को कम करने की कुंजी है।
