चेन्नई। चेन्नई में ₹1.05 करोड़ के कथित निवेश धोखाधड़ी मामले में करीब 10 साल से फरार चल रहे एक दंपती को सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) की विशेष टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान ननमंगलम निवासी D. Rajalakshmi, 41, और उनके पति J. Dharani, 49, के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक दोनों पर एक परिचित को चिट फंड और रियल एस्टेट कारोबार में निवेश के बदले आकर्षक रिटर्न का भरोसा देकर बड़ी रकम लेने और बाद में फरार होने का आरोप है।
मामला 2010-11 के दौरान शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता James, 45, पलावंथंगल निवासी हैं। पुलिस के अनुसार Rajalakshmi ने अपने परिचित James को बताया था कि वह चिट फंड का कारोबार चलाती हैं, जबकि उनके पति रियल एस्टेट से जुड़े हुए हैं। कथित तौर पर उन्होंने James को दोनों कारोबारों में निवेश करने पर बेहतर रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया।
आरोप है कि इस भरोसे में आकर James ने 2010 और 2011 के बीच बैंक ट्रांजैक्शन के माध्यम से करीब ₹58.13 लाख दंपती को दिए। इसके अलावा उन्होंने कथित चिट फंड में ₹22 लाख भी जमा किए। पुलिस के अनुसार, दंपती ने अलग-अलग जरूरतों और बहानों का हवाला देकर उनसे लगातार रकम ली, जिससे कथित तौर पर कुल राशि बढ़कर ₹1.05 करोड़ हो गई।
James को जब निवेश की रकम और कथित रिटर्न वापस नहीं मिला तो उन्होंने दंपती से संपर्क करने की कोशिश की। आरोप है कि इसके बाद दोनों ने उनसे दूरी बना ली और फिर अचानक गायब हो गए। लंबे समय तक संपर्क नहीं होने और रकम वापस न मिलने के बाद James ने मामले की शिकायत चेन्नई पुलिस आयुक्त से की।
शिकायत 20 अप्रैल 2015 को दर्ज कराई गई थी। इसके बाद सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। हालांकि जांच के दौरान आरोपी लगातार पुलिस की पकड़ से बाहर रहे। करीब एक दशक तक उनके ठिकाने का पता नहीं चल सका।
Algoritha Security Launches ‘Make in India’ Cyber Lab for Educational Institutions
मामले में लंबी जांच के बाद CCB की विशेष टीम ने तकनीकी इनपुट की मदद से आरोपियों की गतिविधियों और संभावित ठिकानों का पता लगाया। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, दंपती ने कथित तौर पर निवेश और चिट फंड कारोबार को भरोसे के आधार के रूप में इस्तेमाल किया। परिचित होने के कारण शिकायतकर्ता ने उनके दावों पर विश्वास किया और अलग-अलग माध्यमों से रकम उपलब्ध कराई। मामले में बैंक लेनदेन और चिट फंड में जमा की गई राशि जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
करीब एक दशक तक आरोपियों के फरार रहने के कारण इस मामले की जांच में उनकी गतिविधियों और ठिकानों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण रहा। तकनीकी माध्यमों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम आखिरकार उन तक पहुंचने में सफल रही। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और रकम के इस्तेमाल की भी जांच की जा सकती है।
यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि निवेश, चिट फंड और रियल एस्टेट में असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न का भरोसा देकर लोगों से रकम जुटाने वाली योजनाओं में सावधानी जरूरी है। किसी भी निवेश से पहले कंपनी, कारोबार, वित्तीय दस्तावेज और भुगतान की वैधता की स्वतंत्र रूप से जांच करना महत्वपूर्ण है।
फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस मामले में उपलब्ध वित्तीय दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच कर रही है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
