Givaudan, DSM-Firmenich और International Flavors & Fragrances पर भारतीय बाजार में कथित कार्टेल बनाने का आरोप; व्यावसायिक गोपनीय जानकारी सामने आने की शिकायत के बाद CCI ने जांच रिपोर्ट वापस ली

भारत में ग्लोबल फ्रेगरेंस कंपनियों पर कीमतें तय करने के आरोप की नई जांच, CCI ने खोला एंटीट्रस्ट केस

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By Roopa
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नई दिल्ली: भारतीय प्रतिस्पर्धा नियामक ने दुनिया की तीन बड़ी फ्रेगरेंस कंपनियों के खिलाफ कथित कीमत-समन्वय को लेकर नई एंटीट्रस्ट जांच शुरू की है। नियामक के एक गोपनीय दस्तावेज के मुताबिक जांच Swiss fragrance maker Givaudan, DSM-Firmenich और US-based International Flavors & Fragrances (IFF) से जुड़ी है। आरोप है कि कंपनियों ने भारतीय फ्रेगरेंस उद्योग में कीमतों को लेकर कथित तौर पर आपसी समन्वय किया। मामले में कथित गतिविधियां वर्ष 2024 से जारी होने की बात सामने आई है।

यह जांच ऐसे समय शुरू हुई है जब यही तीन कंपनियां पहले से एक अलग मामले में भी नियामकीय जांच का सामना कर रही हैं। उस मामले में आरोप है कि कंपनियों ने कर्मचारियों को एक-दूसरे की कंपनियों में नौकरी करने से रोकने के लिए कथित तौर पर आपसी समझौते किए थे।

CCI दस्तावेज में कार्टेलाइजेशन का जिक्र

22 जुलाई की तारीख वाले Competition Commission of India (CCI) के गोपनीय दस्तावेज में नए मामले को भारतीय फ्रेगरेंस उद्योग में कथित कार्टेलाइजेशन से संबंधित जांच बताया गया है। दस्तावेज के मुताबिक मामला कीमतों के कथित समन्वय से जुड़ा है और इसकी जांच करीब दो वर्षों से चल रही है।

भारत में चल रही प्रतिस्पर्धा संबंधी जांच आम तौर पर अंतिम निष्कर्ष आने तक सार्वजनिक नहीं की जाती। हालांकि, सामने आए आंतरिक दस्तावेज से जांच की प्रगति और नियामक के सामने मौजूद प्रक्रियात्मक मुद्दों की जानकारी मिलती है।

CCI की जांच टीम ने कथित तौर पर अपनी जांच के निष्कर्षों पर आधारित रिपोर्ट तैयार कर फरवरी में संबंधित कंपनियों के साथ साझा की थी। इसके बाद Givaudan और IFF ने रिपोर्ट में व्यावसायिक रूप से संवेदनशील जानकारी को पर्याप्त रूप से छिपाया नहीं गया होने की आपत्ति जताई। शिकायतों के बाद CCI ने रिपोर्ट वापस ले ली।

व्यावसायिक गोपनीय जानकारी के कारण रिपोर्ट वापस

रिपोर्ट वापस लिए जाने के बाद अब CCI को इसका संशोधित संस्करण तैयार करना होगा। इसमें कंपनियों से जुड़ी संवेदनशील व्यावसायिक जानकारी को उचित तरीके से हटाकर या छिपाकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस प्रक्रिया के कारण जांच के अगले चरण में पहुंचने में और समय लग सकता है।

मामले ने प्रतिस्पर्धा संबंधी जांच में कंपनियों की गोपनीय व्यावसायिक सूचनाओं को संभालने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। भारतीय एंटीट्रस्ट वकील गौतम शाही के अनुसार, व्यावसायिक रूप से संवेदनशील डेटा का नुकसान या उसका उचित तरीके से सुरक्षित न रहना बाजार में प्रतिस्पर्धा की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।

अब CCI को संशोधित रिपोर्ट तैयार कर आगे की प्रक्रिया बढ़ानी होगी। जांच में सामने आने वाले निष्कर्ष यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि कीमतों के कथित समन्वय के आरोपों को आगे नियामकीय कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार मिलता है या नहीं।

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तीनों कंपनियां विदेशों में भी जांच के घेरे में

भारतीय जांच इन कंपनियों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर चल रही प्रतिस्पर्धा संबंधी पड़ताल का हिस्सा भी बन रही है। 2023 में Swiss और British competition authorities ने तीनों कंपनियों से जुड़े मामलों की जांच शुरू की थी। European Commission ने भी फ्रेगरेंस और उसके ingredients की आपूर्ति से संबंधित संभावित मिलीभगत की जांच की बात कही है।

कंपनियां पहले अंतरराष्ट्रीय एंटी-कार्टेल जांच में सहयोग करने की बात कह चुकी हैं। भारत में कीमतों से जुड़ी जांच और कर्मचारियों की भर्ती रोकने से संबंधित कथित समझौते की जांच अलग-अलग मामलों के रूप में चल रही है, हालांकि दोनों में वही तीन कंपनियां शामिल हैं।

Givaudan का मुख्यालय Switzerland में है। DSM-Firmenich का गठन 2023 में Dutch specialty chemicals company DSM और Firmenich के विलय से हुआ था। वहीं IFF अमेरिका स्थित कंपनी है और फ्रेगरेंस तथा फ्लेवर ingredients की वैश्विक प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।

भारत का फ्रेगरेंस बाजार तेजी से बढ़ रहा

यह जांच भारत के फ्रेगरेंस और फ्लेवर उद्योग में तेजी से बढ़ते कारोबार के बीच सामने आई है। Grand View Research के अनुसार, भारत का flavours and fragrances market वर्ष 2024 में करीब $2.5 billion से बढ़कर 2033 तक लगभग $5 billion तक पहुंच सकता है।

बाजार के इस विस्तार के साथ प्रतिस्पर्धा की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो गई है, खासकर ऐसे क्षेत्र में जहां कुछ बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की मजबूत बाजार हिस्सेदारी है।

फिलहाल CCI की जांच नियामकीय स्तर पर है और तीनों कंपनियों के खिलाफ किसी तरह की अंतिम दोषसिद्धि या गलत आचरण का निष्कर्ष सामने नहीं आया है। संशोधित जांच रिपोर्ट में कथित कीमत-समन्वय से जुड़े निष्कर्षों के साथ कंपनियों की गोपनीय व्यावसायिक जानकारी को सुरक्षित रखने पर ध्यान दिया जाएगा। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और CCI के अंतिम निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

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