बरहामपुर: ओडिशा के बरहामपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से कथित तौर पर करीब ₹1.5 करोड़ की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। मामले में बैद्यनाथपुर पुलिस ने एक दंपती समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी युवाओं को अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनसे बड़ी रकम वसूलते थे। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है।
पुलिस के अनुसार, इस कथित फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी जगदीश कुमार बेहरा है। आरोप है कि उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को सरकारी विभागों में नियुक्ति दिलाने का झांसा दिया। नौकरी पाने की उम्मीद में अभ्यर्थियों से अलग-अलग रकम ली गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी कितने समय से इस नेटवर्क को चला रहे थे और इसमें उनके साथ कितने अन्य लोग जुड़े हुए हैं।
नौकरी के नाम पर दस्तावेज भी लिए
जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर कई नौकरी अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी अपने कब्जे में रख लिए थे। इससे जांच एजेंसियों को आशंका है कि आरोपी केवल रकम वसूलने तक सीमित नहीं थे, बल्कि अभ्यर्थियों को लंबे समय तक अपने प्रभाव में रखने के लिए उनके महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अपने पास रखते थे।
पुलिस की छापेमारी के दौरान आरोपियों के ठिकानों से कई ऐसे दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनकी अब जांच की जा रही है। इनमें विभिन्न संस्थानों के नाम से जारी किए गए फर्जी नियुक्ति पत्र, वित्तीय लेनदेन से संबंधित रसीदें और ऑनलाइन पैसे के हस्तांतरण से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। बरामद सामग्री के आधार पर पुलिस कथित ठगी की पूरी प्रक्रिया और रकम के लेनदेन की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।
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कितने युवाओं से ठगी, जांच जारी
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस बात का पता लगाना है कि इस कथित नौकरी घोटाले में कुल कितने बेरोजगार युवा फंसे और उनसे वास्तव में कितनी रकम वसूली गई। शुरुआती स्तर पर ठगी की रकम करीब ₹1.5 करोड़ बताई जा रही है, लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही कुल वित्तीय नुकसान की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की संभावना है।
जांच एजेंसियां बरामद रसीदों और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर रही हैं। इसके जरिए उन लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है जिन्होंने आरोपियों को रकम दी या कथित तौर पर नेटवर्क के संचालन में सहयोग किया। पुलिस यह भी जांच रही है कि फर्जी नियुक्ति पत्र किस तरीके से तैयार किए गए और क्या इनके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका थी।
नेटवर्क में और लोगों की भूमिका की तलाश
पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मामले की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अधिकारियों का प्रयास है कि नौकरी के नाम पर चलाए जा रहे कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जाए। साथ ही उन अभ्यर्थियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, जिन्होंने नौकरी पाने के लिए आरोपियों को पैसे दिए थे।
पुलिस के मुताबिक, मामले में बरामद दस्तावेज और डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड जांच के अहम आधार हैं। इनकी पड़ताल के बाद कथित ठगी की रकम, पीड़ितों की संख्या और आरोपियों की भूमिका को लेकर और तथ्य सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल सभी पांच आरोपी न्यायिक प्रक्रिया के तहत हैं और पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।
