केंद्रीय वित्त मंत्री के नाम से जुड़ी बताई गई कथित योजना में AI से निवेश प्रबंधन का दावा; फरवरी से जुलाई तक अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करती रही पीड़िता

Google पर फर्जी सरकारी निवेश योजना का झांसा, 58 वर्षीय शिक्षिका से ₹30.63 लाख की ठगी

Roopa
By Roopa
5 Min Read

बेंगलुरु। बेंगलुरु के कॉक्स टाउन की 58 वर्षीय शिक्षिका कथित ऑनलाइन निवेश घोटाले में ₹30.63 लाख गंवा बैठीं। आरोप है कि ठगों ने Google पर दिखाए गए एक भ्रामक विज्ञापन के जरिए उन्हें ऐसी निवेश योजना का भरोसा दिलाया, जिसे भारत सरकार से जुड़ा बताया गया था। शिकायत के अनुसार, कथित योजना को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से संबंधित होने का दावा किया गया था।

पीड़िता ने ईस्ट CEN क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत में बताया कि फरवरी 2026 में उन्हें Google पर यह विज्ञापन दिखाई दिया था। इसमें एक निवेश कार्यक्रम का प्रचार किया गया था और दावा किया गया था कि निवेश से जुड़े लेनदेन Artificial Intelligence यानी AI के जरिए संचालित किए जाएंगे। सरकारी नाम और AI तकनीक का इस्तेमाल किए जाने के कारण कथित योजना वास्तविक प्रतीत हुई।

शिकायत के मुताबिक, पीड़िता ने 11 फरवरी को इस योजना में निवेश शुरू किया और 3 जुलाई तक अलग-अलग चरणों में रकम जमा करती रहीं। इस दौरान कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया और खुद को निवेश सलाहकार तथा वित्तीय प्रतिनिधि बताया। आरोप है कि इन लोगों ने निवेश प्रक्रिया, संभावित रिटर्न और लेनदेन से जुड़ी जानकारी देकर उन्हें लगातार रकम लगाने के लिए प्रेरित किया।

पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता ने कई लोगों के नाम और उन मोबाइल नंबरों की जानकारी दी है, जिनसे कथित तौर पर उनसे संपर्क किया गया था। आरोप है कि ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी देकर वहां निवेश राशि भेजने को कहा। पीड़िता ने इन खातों में रकम ट्रांसफर की। पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और लेनदेन के रिकॉर्ड की जांच कर कथित नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

ठगी में बड़ी रकम गंवाने के लिए पीड़िता ने अपनी सोने की संपत्ति तक गिरवी रखी। इसके अलावा उन्होंने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी पैसे उधार लिए थे। शिकायत में उन्होंने पुलिस से लेनदेन की जांच कर रकम बरामद कराने की मांग की है।

साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, ऑनलाइन निवेश ठगी में अपराधी अब सरकारी संस्थानों, वरिष्ठ अधिकारियों और AI जैसी तकनीकी शब्दावली का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी विज्ञापन में सरकारी नाम, किसी बड़े अधिकारी का संदर्भ या AI आधारित निवेश का दावा दिखाई देना उसकी वास्तविकता की गारंटी नहीं है। निवेश से पहले संबंधित योजना की पुष्टि केवल आधिकारिक सरकारी या नियामकीय स्रोतों से करनी चाहिए।

Algoritha Security Launches ‘Make in India’ Cyber Lab for Educational Institutions

Prof. Triveni Singh ने यह भी कहा कि फर्जी निवेश नेटवर्क में पीड़ित को शुरुआत में आकर्षक रिटर्न या व्यवस्थित निवेश प्रक्रिया दिखाई जा सकती है। इसके बाद उसे अधिक रकम लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। ऐसे मामलों में एक बार पैसा ट्रांसफर होने के बाद उसे कई बैंक खातों और अन्य वित्तीय माध्यमों से आगे भेजा जा सकता है, जिससे रकम की वास्तविक मंजिल का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की ठगी में शुरुआती संपर्क डिजिटल विज्ञापन, सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए हो सकता है। इसके बाद कथित सलाहकार फोन या ऑनलाइन माध्यम से लगातार संपर्क बनाए रखते हैं। निवेशक को खाते में बढ़ती रकम या संभावित मुनाफे की जानकारी देकर उसका भरोसा मजबूत किया जाता है और फिर बड़ी राशि जमा कराने का दबाव बनाया जाता है।

पुलिस ने मामले में Information Technology Act, 2000 की धारा 66(C) और 66(D) तथा Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज किया है। जांच में पुलिस कथित आरोपियों के मोबाइल नंबर, बैंक खाते और धन के लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही है।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू Google पर दिखाए गए कथित विज्ञापन का स्रोत भी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि विज्ञापन किसने तैयार किया, किस माध्यम से प्रसारित किया गया और पीड़िता से संपर्क करने वाले लोगों का इससे क्या संबंध था। बैंक खातों में पहुंची रकम आगे किन खातों में गई, इसका पता लगाना भी जांच का अहम हिस्सा है।

यह मामला ऑनलाइन निवेश विज्ञापनों के जरिए बढ़ते वित्तीय साइबर अपराध की गंभीरता को सामने लाता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि सरकारी योजना, AI आधारित निवेश या किसी बड़े अधिकारी के नाम का इस्तेमाल देखकर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। निवेश से पहले योजना, कंपनी, नियामकीय अनुमति और भुगतान से जुड़े विवरण की स्वतंत्र पुष्टि करना जरूरी है।

हमसे जुड़ें

Share This Article