बारां- लगातार साइबर जागरूकता अभियानों के बावजूद अपराधी ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को ठगने के नए तरीके खोज रहे हैं। बारां के नाहरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े खेड़ली, बादीपुरा और सिमलोद के तीन महिला एएनएम (Auxiliary Nurse Midwives) इस बार साइबर ठगी का शिकार बने। आरोपियों ने सरकारी अधिकारी बनकर उनके खातों से लगभग ₹2 लाख की राशि उड़ा ली।
नकली कॉल से भरोसा जीतना: पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, एक अज्ञात व्यक्ति ने एएनएम से कॉल कर स्वयं को तहसीलदार बताया। उसने कहा कि उनके स्वास्थ्य केंद्रों पर शौचालय निर्माण के लिए सरकार की ओर से बजट स्वीकृत हुआ है और मार्च माह के अंत तक राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही है। ठग ने सभी तीनों एएनएम को एक कॉन्फ्रेंस कॉल पर जोड़ते हुए एक अन्य व्यक्ति को शामिल किया, जिसने खुद को सीएचसी का डॉक्टर बताया। पहले से बजट जानकारी होने के कारण एएनएम उनके भरोसे में आ गईं और कॉल में बताई गई प्रक्रिया का पालन किया।
विश्वास जीतने के लिए ₹10 की पहली ट्रांसफर: अपराधियों ने भरोसा जीतने के लिए सबसे पहले तीनों एएनएम के खातों में ₹10-₹10 ट्रांसफर किए। यह छोटी राशि वैधता का भ्रम पैदा करने के लिए थी। जब विश्वास स्थापित हो गया, तब ठगों ने मनी रिक्वेस्ट के जरिए खातों से कुल ₹2 लाख निकाल लिए। खातों से पैसे कटने के मैसेज आने पर एएनएम को ठगी का एहसास हुआ।
फौरन शिकायत दर्ज: पीड़ितों ने तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। साइबर थानाधिकारी आशा सिंह ने कहा कि अपराधी पहले से ही लोगों की निजी जानकारी जुटाते हैं और सरकारी अधिकारी या परिचित बनकर भरोसा जीतते हैं।
सतर्क रहने की जरूरत: अधिकारी सिंह ने चेताया कि नागरिकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। अपराधी आपातकाल या पद की प्रामाणिकता का बहाना बनाकर संवेदनशील वित्तीय जानकारी प्राप्त करते हैं। ग्रामीण स्वास्थ्यकर्मी इस तरह के हमलों के लिए विशेष रूप से संवेदनशील हैं, क्योंकि डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा उपायों की जानकारी सीमित होती है।
विशेषज्ञ का कहना: renowned cybercrime expert और पूर्व IPS प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने बताया, “साइबर ठग पहले लक्षित व्यक्ति की व्यक्तिगत और पेशेवर जानकारी इकट्ठा करते हैं। सरकारी योजनाओं और पदों का नाम लेकर विश्वास जीतना उनका प्रमुख तरीका है। ग्रामीण क्षेत्रों के कर्मचारी डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सुरक्षा में कम अनुभव रखते हैं, इसलिए वे इस तरह के फ्रॉड के लिए आसानी से निशाना बन जाते हैं। सतर्कता और तत्काल रिपोर्टिंग सबसे प्रभावी रोकथाम है।”
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साइबर सुरक्षा के जरूरी सुझाव:
- अज्ञात या संदिग्ध कॉल का उत्तर न दें।
- किसी को भी OTP, बैंक डिटेल या निजी जानकारी न दें।
- तुरंत लाभ, पैसे दोगुना करने या शेयर बाजार में जल्दी फायदा जैसी योजनाओं में न आएं।
- अधिकारी या परिचित का दावा करने वाले व्यक्ति की पहचान पहले जांचें।
- कॉल पर पैसे ट्रांसफर या बैलेंस चेक करने को कहने पर तुरंत कॉल काट दें और इंटरनेट बंद कर दें।
- अज्ञात लिंक या मनी रिक्वेस्ट स्वीकार न करें।
- ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें। शुरुआती 1–2 घंटे में रिपोर्ट करने से पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
ग्रामीण भारत में बढ़ता साइबर खतरा: यह मामला यह दर्शाता है कि साइबर अपराध अब छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों को भी निशाना बना रहा है। अपराधी डिजिटल भुगतान और सरकारी योजनाओं का फायदा उठाते हैं। समय पर जांच, सतर्कता और कॉल/मनी रिक्वेस्ट के सावधानीपूर्वक संचालन से ही इस तरह की ठगी रोकी जा सकती है।
अधिकारियों ने इस नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है और बैंक एवं साइबर सुरक्षा इकाइयों के साथ समन्वय कर रहे हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि ग्रामीण समुदाय, जो डिजिटल बैंकिंग जागरूकता कार्यक्रमों से कम परिचित हैं, इस तरह की ठगी के लिए प्राथमिक लक्ष्य बने रहते हैं।
सार्वजनिक चेतावनी: साइबर विशेषज्ञ नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि सरकारी अधिकारियों का दावा करने वाले अप्रत्याशित संपर्कों से सतर्क रहें। नियमित बैंक खाता मॉनिटरिंग, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन और संदिग्ध ट्रांजेक्शन की तुरंत रिपोर्टिंग बड़े वित्तीय नुकसान को रोक सकती है।
बारां का यह मामला याद दिलाता है कि ₹10 जैसी छोटी ट्रांसफर भी बड़े साइबर अपराध का पहला कदम बन सकती है। अधिकारियों का कहना है कि अग्रिम सतर्कता, खासकर स्वास्थ्यकर्मियों और ग्रामीण कर्मचारियों के लिए बेहद जरूरी है।
