बलिया। जिले के ताजपुर मुड़ियारी स्थित इंटरमीडिएट कॉलेज में मिड-डे मील योजना के नाम पर ₹13.71 लाख की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। जांच में विद्यालय के कक्षा 6 से 8 तक छात्रों की संख्या और मिड-डे मील रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर मिला। स्कूल रिकॉर्ड में 449 छात्र दिखाए गए, जबकि U-DISE पोर्टल पर इन कक्षाओं में सिर्फ 68 छात्रों का नामांकन दर्ज था। जांच के दौरान विद्यालय में न राशन मिला, न गैस सिलेंडर, न बर्तन और न ही रसोइया। इसके बावजूद रिकॉर्ड में सैकड़ों छात्रों को नियमित भोजन दिए जाने का उल्लेख किया गया।
मामले में कॉलेज के प्रधानाचार्य चंद्रशेखर पांडेय और मिड-डे मील के जिला प्रबंधक (डीसी) अजीत पाठक के खिलाफ मनियर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी मनियर अनूप कुमार त्रिपाठी की तहरीर पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी और सरकारी धनराशि के दुरुपयोग से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है।
छात्रों की शिकायत से खुला मामला
विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने 28 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी मंगला प्रसाद से मिड-डे मील योजना में गड़बड़ी की शिकायत की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जिला विकास अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की दो सदस्यीय जांच समिति गठित की।
समिति ने विद्यालय पहुंचकर दस्तावेजों, छात्र संख्या, U-DISE पोर्टल, मिड-डे मील रजिस्टर और IVRS से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की। दस्तावेजों और मौके की स्थिति में अंतर मिलने के बाद जांच रिपोर्ट तैयार की गई। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए और पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
449 छात्र बताए, U-DISE में सिर्फ 68
जांच में छात्र संख्या से जुड़ी विसंगति सबसे महत्वपूर्ण रही। विद्यालय की ओर से कक्षा 6 से 8 में कुल 449 छात्र-छात्राओं के होने का आंकड़ा प्रस्तुत किया गया था। इसके विपरीत U-DISE पोर्टल पर कक्षा 6 में सात, कक्षा 7 में 37 और कक्षा 8 में 24 छात्र दर्ज मिले। तीनों कक्षाओं को मिलाकर पोर्टल पर कुल 68 छात्र ही दर्ज थे।
पिछले शैक्षणिक सत्र के आंकड़ों में भी अंतर मिला। वर्ष 2025-26 के लिए U-DISE पोर्टल पर कक्षा 6 में 37, कक्षा 7 में 24 और कक्षा 8 में नौ छात्रों का नामांकन दर्ज था। इसके बावजूद मिड-डे मील के रिकॉर्ड में इससे कई गुना अधिक छात्रों को भोजन दिए जाने का दावा किया गया।
रजिस्टर में रोज 270 से ज्यादा बच्चों को भोजन
जांच समिति के मुताबिक, अप्रैल 2026 के मिड-डे मील रजिस्टर में प्रतिदिन औसतन 271 से 275 छात्रों को भोजन दिए जाने का उल्लेख किया गया। मई में भी 272 से 275 छात्रों को भोजन उपलब्ध कराने का रिकॉर्ड दर्ज था। छात्र संख्या और भोजन वितरण के आंकड़ों में भारी अंतर ने रिकॉर्ड की सत्यता पर सवाल खड़े कर दिए।
अगस्त के रिकॉर्ड में भी ऐसी ही विसंगति सामने आई। जांच के अनुसार, पांच अगस्त तक रजिस्टर में किसी छात्र की उपस्थिति दर्ज नहीं थी। इसके बावजूद IVRS रिकॉर्ड में एक, तीन और चार अगस्त को 199 छात्रों की उपस्थिति दर्ज दिखाई गई। जांच टीम ने इन आंकड़ों को भी संदिग्ध माना।
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स्कूल में बंद मिलीं कक्षाएं, रसोई भी निष्क्रिय
जांच के दौरान टीम को विद्यालय में कक्षा 6, 7 और 8 संचालित नहीं मिलीं। प्रधानाचार्य इन कक्षाओं के संचालन नहीं होने के संबंध में कोई आधिकारिक छुट्टी आदेश भी प्रस्तुत नहीं कर सके।
मिड-डे मील की व्यवस्था की मौके पर जांच की गई तो स्थिति और गंभीर मिली। विद्यालय में खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडर, राशन, बर्तन और थालियां मौजूद नहीं थीं। रसोइया भी नहीं मिला। किचन शेड भी अक्रियाशील पाया गया। ऐसे में रिकॉर्ड में सैकड़ों छात्रों को नियमित भोजन उपलब्ध कराने के दावे पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
दो साल में ₹13.71 लाख का भुगतान
जांच में सामने आया कि मिड-डे मील योजना के तहत विद्यालय को दो वित्तीय वर्षों में कुल ₹13,71,573 का भुगतान किया गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹7,30,904 और 2025-26 में ₹6,40,669 का भुगतान हुआ।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को कथित रूप से गलत तरीके से खर्च की गई सरकारी धनराशि की नियमानुसार वसूली और विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही संबंधित आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराने को कहा गया।
अब पुलिस भुगतान और रिकॉर्ड की जांच कर रही है
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में विद्यालय के मिड-डे मील रजिस्टर, U-DISE रिकॉर्ड, IVRS आंकड़े, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और बैंक लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्र संख्या में कथित तौर पर इतना बड़ा अंतर कैसे दर्ज हुआ और भुगतान की प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि यदि विद्यालय में मिड-डे मील की वास्तविक व्यवस्था मौजूद नहीं थी, तो रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में छात्रों को भोजन दिए जाने की प्रविष्टियां किस आधार पर दर्ज की गईं। पुलिस और विभागीय जांच में इन सवालों के जवाब मिलने के बाद मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
