बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर कथित ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, 4,000 से अधिक लोगों को सरकारी विभागों से मिलते-जुलते नाम वाली संस्थाओं में नौकरी का झांसा देकर प्रत्येक से ₹40,000 की सुरक्षा राशि वसूली गई। आरोपियों ने हर गांव से दो लोगों की नियुक्ति का दावा किया और चयनित अभ्यर्थियों को ₹15,000 मासिक वेतन देने का भरोसा दिलाया। बाद में कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति पत्र देकर कुछ लोगों से काम भी कराया गया, लेकिन कार्यालय बंद कर आरोपी फरार हो गए।
मामले में पुलिस ने एक ग्रामीण की शिकायत के आधार पर 13 नामजद और पांच अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब कथित भर्ती नेटवर्क के संचालन, बैंक लेनदेन, दस्तावेजों और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
सरकारी संस्थाओं जैसे नामों से बनाया भरोसा
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने बलिया के टीखमपुर इलाके में किराये के परिसर से कथित तौर पर ‘लघु उद्योग विकास परिषद’, ‘उज्ज्वला शिक्षा मिशन’ और ‘औद्योगिक प्रशिक्षण महिला विकास योजना’ जैसी संस्थाओं के नाम पर गतिविधियां शुरू कीं।
इन नामों का इस्तेमाल लोगों के बीच यह धारणा बनाने के लिए किया गया कि संस्थाएं सरकारी योजनाओं या विभागों से जुड़ी हैं। कथित तौर पर लोगों को बताया गया कि सरकार प्रत्येक गांव में दो व्यक्तियों की नियुक्ति करने जा रही है। इसके लिए उम्मीदवारों से ₹40,000 सुरक्षा राशि जमा करने को कहा गया।
नौकरी के साथ ₹15,000 प्रतिमाह वेतन का वादा किया गया। सरकारी नौकरी जैसी स्थिर आय की उम्मीद में बड़ी संख्या में लोगों ने कथित तौर पर रकम जमा कर दी।
4,000 से ज्यादा लोगों ने जमा किए पैसे
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, क्षेत्र के 4,000 से अधिक लोगों ने आरोपियों के बताए अनुसार ₹40,000-₹40,000 जमा किए। इस आधार पर केवल शिकायत में बताए गए लोगों की संख्या और राशि को देखें तो वसूली का आंकड़ा करीब ₹16 करोड़ तक पहुंचता है।
आरोप है कि रकम लेने के बाद अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। कुछ लोगों को काम भी सौंपा गया, जिससे उन्हें लंबे समय तक यह विश्वास रहा कि भर्ती प्रक्रिया वास्तविक है। बाद में अचानक कार्यालय बंद हो गया और कथित तौर पर आरोपी वहां से फरार हो गए।
इसके बाद नौकरी पाने वाले लोगों को कथित फर्जीवाड़े का पता चला और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
फर्जी नियुक्ति पत्र से लेकर कार्यालय बंद करने तक
शिकायतकर्ता Rajesh Kumar Kannaujiya ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने लोगों को सरकारी नौकरी का भरोसा देकर उनसे सुरक्षा राशि ली। इसके बाद नियुक्ति पत्र जारी किए गए और कुछ लोगों से काम कराया गया।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित नेटवर्क ने कुल कितने लोगों से रकम वसूली और ठगी की वास्तविक राशि कितनी है। जांच में बैंक खातों और पैसों के लेनदेन से इस पूरे मामले की वित्तीय तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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13 नामजद, पांच अज्ञात आरोपी
मामले में 13 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि पांच अन्य आरोपियों की पहचान अभी नहीं हुई है। पुलिस ने सभी के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच एजेंसियां अब आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेज, नियुक्ति पत्र, किराये के कार्यालय से जुड़े रिकॉर्ड, बैंक खातों और अभ्यर्थियों से संपर्क के माध्यमों की पड़ताल कर रही हैं। यह भी जांच का हिस्सा है कि क्या इसी तरीके से बलिया के बाहर भी लोगों को नौकरी का झांसा दिया गया।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से बढ़ रहा नौकरी ठगी का खतरा
बलिया का मामला केवल फर्जी नियुक्ति पत्र तक सीमित नहीं है। नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह अब सरकारी संस्थानों से मिलते-जुलते नाम, पेशेवर दिखने वाले दस्तावेज, कार्यालय और भर्ती प्रक्रिया का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले अपराधी अब पीड़ित को भरोसा दिलाने के लिए पूरी भर्ती प्रक्रिया का नकली ढांचा तैयार कर देते हैं। उनके अनुसार, सरकारी नौकरी के लिए किसी निजी व्यक्ति या संदिग्ध संस्था को बड़ी रकम देना गंभीर चेतावनी है। अभ्यर्थियों को नियुक्ति से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट, भर्ती विज्ञापन और अधिकृत भर्ती पोर्टल से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
दूरसंचार विभाग ने भी किया सावधान
दूरसंचार विभाग ने भी ऑनलाइन नौकरी के प्रस्तावों को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार, अनजान नंबरों से आने वाले नौकरी के प्रस्तावों और फर्जी ऑफर लेटर पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। नौकरी के नाम पर भुगतान करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच जरूरी है। संदिग्ध नंबरों की शिकायत Sanchar Saathi पोर्टल के माध्यम से की जा सकती है।
पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश के साथ-साथ यह पता लगाने में जुटी है कि कथित भर्ती रैकेट में और कितने लोग शामिल थे। बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच से यह भी सामने आने की उम्मीद है कि 4,000 से अधिक लोगों से कथित तौर पर जुटाई गई रकम कहां और किन माध्यमों से भेजी गई।
