अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में स्क्रैप कारोबार से जुड़े एक कथित करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी मामले ने व्यापारिक जगत में हलचल पैदा कर दी है। एक स्क्रैप व्यापारी ने आरोप लगाया है कि तीन कारोबारियों ने उसे प्रतिष्ठित निजी कंपनियों से स्क्रैप खरीद के टेंडर दिलाने और लाभदायक कारोबार में साझेदारी का भरोसा देकर ₹1.14 करोड़ से अधिक की राशि निवेश करवा ली। आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो वादा किया गया स्क्रैप उपलब्ध कराया गया और न ही अधिकांश धनराशि वापस लौटाई गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता राकेशभाई प्रवीणभाई पटनी अहमदाबाद में ‘श्रीकालिका एंटरप्राइज’ नाम से स्क्रैप कारोबार संचालित करते हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि उनकी मुलाकात कुछ वर्ष पहले मुकेशभाई दिनाजी ठाकोर से हुई थी। मुकेश ने स्वयं को स्क्रैप कारोबार से जुड़ा व्यापारी बताते हुए दावा किया कि वह अपने सहयोगियों के साथ बड़ी कंपनियों से स्क्रैप खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया में भाग लेता है और इसके लिए वित्तीय सहयोग की आवश्यकता है।
शिकायत के मुताबिक, मुकेश ठाकोर ने अपने सहयोगियों जुबिन बारोट और तेजस राजेंद्रभाई पटेल के साथ मिलकर शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया कि यदि वह पूंजी उपलब्ध कराएगा तो उसे बड़े पैमाने पर स्क्रैप सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उसे अच्छा लाभ होगा। आरोप है कि तीनों ने कई बैठकों और चर्चाओं के दौरान इस कारोबारी प्रस्ताव को बेहद लाभकारी बताते हुए शिकायतकर्ता का विश्वास जीत लिया।
बताया गया है कि अगस्त 2021 से अगस्त 2022 के बीच शिकायतकर्ता ने आरोपियों और उनसे जुड़ी व्यावसायिक इकाइयों के विभिन्न बैंक खातों में ऑनलाइन माध्यम से लगभग ₹89.12 लाख ट्रांसफर किए। इसके अतिरिक्त अलग-अलग अवसरों पर करीब ₹25 लाख नकद भी सौंपे गए। इस प्रकार कुल भुगतान ₹1.14 करोड़ से अधिक पहुंच गया।
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शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम देने के बावजूद उसे वादा किया गया स्क्रैप कभी उपलब्ध नहीं कराया गया। समय बीतने के साथ जब उसने माल की आपूर्ति और निवेश की वापसी के बारे में पूछताछ शुरू की, तो आरोपियों की ओर से लगातार आश्वासन दिए जाते रहे। बाद में उसे जानकारी मिली कि जिन कंपनियों के स्क्रैप टेंडर का हवाला देकर निवेश लिया गया था, वहां से खरीदा गया स्क्रैप अन्य पक्षों को बेचा जा रहा है।
आरोप है कि जब शिकायतकर्ता ने अपना पैसा वापस मांगना शुरू किया तो आरोपी उससे बचने लगे। फोन कॉल का जवाब देना बंद कर दिया गया और मुलाकात से भी परहेज किया जाने लगा। जांच के दौरान शिकायतकर्ता को यह भी पता चला कि आरोपियों में से दो व्यक्ति उन पतों पर नहीं रह रहे थे, जो पहले उसे बताए गए थे। इससे उसके संदेह और गहरे हो गए।
मामले के उजागर होने के बाद शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जांच एजेंसियां अब बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, कारोबारी दस्तावेजों और धन के प्रवाह से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शिकायतकर्ता से प्राप्त धनराशि का उपयोग किस प्रकार किया गया और उसमें प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका रही।
साइबर एवं वित्तीय अपराध मामलों के जानकारों का कहना है कि कारोबार में निवेश या टेंडर आधारित साझेदारी के प्रस्तावों को स्वीकार करने से पहले संबंधित दस्तावेजों, अनुबंधों और भुगतान व्यवस्था की स्वतंत्र जांच करना बेहद जरूरी है। कई मामलों में ऊंचे मुनाफे का लालच देकर निवेशकों को फंसाया जाता है और बाद में रकम की वसूली कठिन हो जाती है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। खबर लिखे जाने तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी, जबकि जांचकर्ता कथित धोखाधड़ी के पूरे नेटवर्क और धन के वास्तविक उपयोग की पड़ताल में जुटे हुए हैं।
