गाजियाबाद। फर्जी कंपनियां और वेबसाइटें बनाकर निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देने के बाद करीब 175 लोगों से 26 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि ब्लूम ड्राइव, फेविओना मार्केटिंग और एनसोर इंफ्रा एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड समेत विभिन्न नामों का इस्तेमाल कर निवेशकों को भरोसे में लिया गया। फर्जी दस्तावेज और वेबसाइट पर कथित तौर पर मुनाफे से जुड़े आंकड़े दिखाकर लोगों को ऊंचे रिटर्न का झांसा दिया गया। बाद में विश्वास मजबूत करने के लिए कुछ निवेशकों को दुबई ले जाकर वहां कंपनी का कार्यालय भी दिखाया गया।
आरोपियों के झांसे में आकर कई लोगों ने अपनी जमा पूंजी ही नहीं, बल्कि गहने बेचकर, बैंक से कर्ज लेकर और परिचितों से उधार लेकर भी रकम निवेश की। जब निवेशकों ने अपनी जमा राशि वापस मांगनी शुरू की तो कथित तौर पर उन्हें परेशान किया गया और धमकियां दी गईं। मामले में देहरादून निवासी और एम्स ऋषिकेश के सलाहकार दिनेश कुमार शर्मा की शिकायत पर सिहानी गेट थाना पुलिस ने छह नामजद और कुछ अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) एक्ट, 1978 की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। मुकदमे में सतीश कुमार उर्फ मोस्त्रा, हैप्पी शेख, रोविंदर सिंह उर्फ रविंद्र बांगड़, देव बांगड़, धर्म सिंह रंधावा और नसीब को नामजद किया गया है।
शिकायत के मुताबिक, मार्च 2020 में दिनेश कुमार की मुलाकात देव बांगड़ से हुई थी। इसके बाद फरवरी 2021 में कुरुक्षेत्र के एक रिसॉर्ट में हैप्पी शेख और रोविंदर सिंह उर्फ रविंद्र बांगड़ ने कथित तौर पर लग्जरी ट्रांसपोर्ट के साथ क्रिप्टो, फॉरेक्स ट्रेडिंग और डिजिटल एसेट्स के कारोबार के बारे में बड़े दावे किए। निवेशकों को इन कारोबारों से भारी मुनाफा होने की बात बताकर निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
शिकायत में आरोप है कि 11 फरवरी को दिनेश कुमार ने गाजियाबाद में नसीब को तीन लाख रुपये नकद दिए। इसके बाद एलपीएनटी नाम की वेबसाइट पर निवेशकों के डिजिटल खाते बनाए गए। इन खातों में हर महीने रिटर्न बढ़ता हुआ दिखाया जाता था। इस तरह ऑनलाइन रिकॉर्ड के माध्यम से निवेशकों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि उनकी रकम पर नियमित लाभ मिल रहा है और निवेश सुरक्षित तरीके से बढ़ रहा है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
दिसंबर 2021 में आरोपियों ने ‘द सोल्वर्स’ नाम से एक नई कंपनी बनाई। शिकायत के अनुसार, निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए उन्हें दुबई ले जाया गया और वहां कंपनी का कार्यालय दिखाया गया। विदेश में कार्यालय और कारोबार का कथित प्रदर्शन देखकर कई निवेशकों ने योजना में अपनी रकम और बढ़ा दी। आरोप है कि इस दौरान निवेशकों से बड़ी मात्रा में धन जुटाया गया और अलग-अलग माध्यमों से निवेश जारी रखने के लिए कहा गया।
मामले में नया मोड़ मई 2025 के बाद आया। आरोप है कि इस अवधि के बाद कंपनी की वेबसाइट और मोबाइल ऐप अचानक बंद हो गए। निवेशकों को अपने डिजिटल खातों और निवेश से संबंधित जानकारी तक पहुंच नहीं रही थी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सिस्टम से निवेशकों का डेटा कथित तौर पर हटा दिया गया। इसके बाद लोगों ने कंपनी से अपनी मूल रकम और कथित रिटर्न वापस मांगना शुरू किया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम वापस मांगने पर कुछ निवेशकों को धमकियां दी गईं। कुछ लोगों को सुनसान स्थानों पर ले जाकर असलहों के बल पर डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की जांच कर रही है।
प्राथमिकी के बाद पुलिस निवेशकों से जुड़े दस्तावेज, भुगतान का रिकॉर्ड, वेबसाइट और ऐप से संबंधित डिजिटल साक्ष्य तथा कथित कंपनियों के दस्तावेजों की जांच कर सकती है। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी होगा कि निवेशकों से जुटाई गई करीब ₹26 करोड़ की रकम किन खातों में गई और उसका इस्तेमाल कहां किया गया। इसके साथ ही पुलिस यह पता लगाने में जुटेगी कि 175 निवेशकों से कथित तौर पर रकम जुटाने में नामजद और अज्ञात आरोपियों की क्या भूमिका थी तथा दुबई स्थित कार्यालय और ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म का वास्तविक स्वरूप क्या था।
