जयपुर। राजस्थान पुलिस की विशेष जांच इकाई (SOG) के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार सोनी पर उदयपुर नगर निगम से जुड़े करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले की जांच के दौरान ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगने का आरोप लगा है। राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कार्रवाई करते हुए सोनी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सोनी ने मामले में पहले गिरफ्तार एक व्यक्ति को राहत देने के बदले कथित बिचौलिये सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला के जरिए रिश्वत की मांग की थी।
ACB के मुताबिक सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को शनिवार को शिकायतकर्ता से ₹2 करोड़ की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। इसके बाद जांच में कथित तौर पर मुकेश कुमार सोनी की भूमिका सामने आई। ACB ने उन्हें बालोतरा जिले स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया और रविवार को गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान बरामद रकम में ₹4 लाख भारतीय मुद्रा में होने की जानकारी दी गई है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) में आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया है।
शिकायत के बाद रिश्वत की मांग का सत्यापन
ACB महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, खुफिया इकाई की उदयपुर शाखा को शिकायत मिली थी कि SOG अधिकारी मुकेश कुमार सोनी कथित बिचौलिये सज्जन सिंह जैन के माध्यम से ₹2 करोड़ की मांग कर रहे हैं। शिकायतकर्ता पहले ही उदयपुर नगर निगम के जमीन घोटाले से जुड़े मामले में गिरफ्तार हो चुका था।
आरोप है कि शिकायतकर्ता को केस में राहत देने, उसे दूसरे मामलों में आरोपी नहीं बनाने और उसके घरों से कार्रवाई के दौरान लिए गए दस्तावेज लौटाने के बदले यह रकम मांगी गई थी। ACB ने शिकायत मिलने के बाद बातचीत के माध्यम से रिश्वत की मांग का सत्यापन किया। शिकायतकर्ता यह भी सुनिश्चित करना चाहता था कि मांगी गई रकम वास्तव में मुकेश कुमार सोनी के लिए ही मांगी जा रही है।
मोबाइल पर सिर्फ रकम दिखाने का आरोप
सत्यापन के दौरान सज्जन सिंह जैन ने शिकायतकर्ता की मुलाकात मुकेश कुमार सोनी से एक कार में कराई। ACB अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान सोनी ने कथित तौर पर बातचीत नहीं की। आरोप है कि उन्होंने मोबाइल फोन पर केवल ₹2 करोड़ की रकम लिखकर दिखाई। शिकायतकर्ता और ACB को इस मुलाकात से रिश्वत की कथित मांग की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई।
शनिवार को ACB ने शिकायतकर्ता के कारखाने में सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को ₹2 करोड़ की रकम लेते हुए पकड़ लिया। इसके बाद मुकेश कुमार सोनी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। उन्हें बालोतरा जिले में उनके आवास से हिरासत में लिया गया और रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
उदयपुर जमीन घोटाले की जांच कर रहे थे सोनी
मुकेश कुमार सोनी जिस मामले की जांच से जुड़े थे, वह उदयपुर नगर निगम को जमीन योजनाओं और स्लम क्षेत्रों के हस्तांतरण से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला है। वर्ष 2004 में उदयपुर सुधार न्यास (UIT), जिसे अब उदयपुर विकास प्राधिकरण के नाम से जाना जाता है, ने 30 जमीन योजनाओं और 16 स्लम क्षेत्रों को नगर निगम को हस्तांतरित किया था। इन्हीं में कुछ भूखंडों के आवंटन और रिकॉर्ड से जुड़ी अनियमितताओं की जांच चल रही थी।
आरोपों के अनुसार, कुछ भूखंडों का आवंटन होने के बाद आवंटियों ने निर्धारित राशि जमा नहीं की तो उनके आवंटन स्वतः निरस्त हो गए। हालांकि, इन भूखंडों से संबंधित फाइलें नगर निगम को हस्तांतरित नहीं की गईं। इसके अलावा खाली भूखंडों, कोने के भूखंडों और निरस्त आवंटनों से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी भी नगर निगम के पास नहीं थी।
फर्जी दस्तावेजों से भूखंडों पर कब्जे के आरोप
जांच में आरोप लगाया गया कि कई जमीनों पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा किया गया और इसमें कुछ सरकारी अधिकारियों की कथित मिलीभगत रही। मामले की जांच के लिए दिसंबर 2021 में नगर निगम ने एक समिति गठित की थी। समिति ने मार्च 2022 में रिपोर्ट दी, लेकिन रिपोर्ट पर केवल अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए थे और जनप्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।
रिपोर्ट के बाद उदयपुर के दो पुलिस थानों में मामले दर्ज किए गए। मई 2022 में जांच SOG की जोधपुर इकाई को सौंपी गई। मई 2023 में मामला SOG उदयपुर इकाई और अप्रैल 2024 में SOG अजमेर इकाई को स्थानांतरित किया गया। वर्तमान में इसी इकाई के स्तर पर मामले की जांच चल रही थी।
अब जांच अधिकारी की गिरफ्तारी
जिस जमीन घोटाले की जांच आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी SOG अजमेर इकाई के पास थी, उसी जांच से जुड़े अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार सोनी की ₹2 करोड़ की कथित रिश्वत मांगने के मामले में गिरफ्तारी हुई है। ACB अब मुकेश कुमार सोनी और कथित बिचौलिये सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला के बीच लेनदेन, बातचीत और रकम के स्रोत की जांच कर रही है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि कथित रिश्वत की मांग के पीछे केवल शिकायतकर्ता से जुड़ा मामला था या जमीन घोटाले की जांच से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में भी किसी तरह की मांग की गई थी। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर होगी।
